अमित शाह ने समझाया वक्‍फ‍ बिल नहीं लाते तो ‘लुट’ जाती द‍िल्‍ली…

गृहमंत्री अमित शाह ने वक्‍फ बिल पर चर्चा के दौरान साफ क‍िया क‍ि यह कानून मुसलमानों के ख‍िलाफ नहीं है. लेकिन इसी चर्चा में उन्‍होंने ऐसी घटना का हवाला द‍िया, जो द‍िल्‍लीवालों के ल‍िए जानना जरूरी है.शाह ने 2013 में वक्‍फ कानून में हुए बदलाव के बारे में बताया और कहा, इसकी बदलाव की वजह से हमें वक्‍फ संशोधन बिल लेकर आना पड़ा.

गृहमंत्री अमित शाह ने कहा, सब कुछ ठीक चल रहा था. 2014 का चुनाव होने वाला था. चुनाव बस 25 द‍िन दूर थे. उससे पहले 2013 में रातों रात तुष्टिकरण करने के लिए वक्फ कानून को एक्‍सट्रीम बना दिया गया और इसके कारण क्या हुआ? इसके कारण लुटियन दिल्ली की 123 वीवीआईपी संपत्ति कांग्रेस सरकार ने वक्फ को देने का काम कर दिया. दिल्ली वक्फ बोर्ड ने उत्तरी रेलवे की भूमि वक्फ के नाम घोषित कर दी. हिमाचल में वक्फ की संपत्ति बताकर उस पर अवैध मस्जिद बना दी गई. 250 हेक्‍टेयर क्षेत्रफल वाले 12 गांवों को वक्‍फ की प्रॉपर्टी बना दी गई.

कांग्रेस ने क्‍या क्‍या क‍िया
शाह ने बताया क‍ि तमिलनाडु के 1500 साल पुराने त‍िरु चेंदुरई मंद‍िर की 400 एकड़ जमीन को वक्‍फ संपत्‍त‍ि घोष‍ित कर दी. कर्नाटक की मनीमंडी समित‍ि की रिपोर्ट बताती है क‍ि 29000 एकड़ वक्‍फ की जमीन बिजनेस के ल‍िए क‍िराये पर दे दी. इतना ही नहीं, 2001 से 2012 के बीच 2 लाख करोड़ की वक्‍फ प्रॉपर्टी निजी संस्‍थानों को 100 साल की लीज पर सौंप दी गई. बेंगलुरु में हाईकोर्ट को बीच में आना पड़ा. 600 एकड़ जमीन को जब्‍त करने से रोकना पड़ा. शाह ने बताया क‍ि 1913 से लेकर 2013 तक वक्फ बोर्ड के पास कुल 18 लाख एकड़ भूमि थी. इसमें 2013 से 2025 के बीच 21 लाख एकड़ भूमि और जुड़ गई. यानि कुल 39 लाख एकड़ भूमि में 21 लाख एकड़ भूमि 2013 के बाद की है.

सांसद ने सुनाई द‍िल्‍ली की कहानी
इसके बाद द‍िल्‍ली से सांसद कमलजीत सहरावत ने भी द‍िल्‍ली की कहानी बताई. उन्‍होंने कहा, मैं ज‍िस गांव से हूं, वह द्वारका के बीच में आता है. आपको जानकर हैरानी होगी क‍ि पिछले साल कुछ लोग वहां पर आ गए. और उन्‍होंने हमारे पूजा के स्‍थान को वक्‍फ प्रॉपर्टी बता द‍िया. जहां हम सैकड़ों साल से पूजा करते आ रहे हैं, उसे वक्‍फ प्रॉपर्टी बताया गया. ऐसा सिर्फ मेरे अंबरहाई गांव में नहीं हुआ. भजनपुर गांव में, गोयला गांव में ऐसी जमीनें बताई गई हैं. द‍िल्‍ली में 1047 वक्‍फ प्रॉपर्टी बताई गई है. दिल्‍ली वक्‍फ बोर्ड के पोर्टल पर उसका नाम है. उसका क‍िराया सिर्फ 1 रुपये से लेकर 11 रुपये है.

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