करोल बाग जोन में अवैध निर्माण का खेल: बिल्डर्स लॉबी और जनप्रतिनिधि की मिलीभगत का खुलासा

विक्रम गोस्वामी

नई दिल्ली। दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के करोल बाग जोन में अवैध निर्माण की बाढ़ ने भ्रष्टाचार और संरक्षण की गहरी जड़ों को उजागर किया है। खास तौर पर पहाड़गंज के चुना मंडी क्षेत्र में, जहां गली नंबर 5, भवन संख्या 2853-2854 में बिना किसी स्वीकृत नक्शे के दो प्रॉपर्टीज को जोड़कर एक बनाने का अवैध निर्माण जोर-शोर से चल रहा है, वही पहाड़ गंज में सरल स्कीम की आड में जमकर अवैध निर्माण कार्य चल रहे हैं जबकि MCD की सरल स्कीम की नियम शर्तों के अनुसार नक्शे ने अगर कैसा भी फेर बदल किया जाता है तो सरल स्कीम के तहत वो नक्शा स्वतः रद्द माना जाएगा। लेकिन वहीं निगम के अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी सवाल उठा रही है ? इस मामले में जूनियर इंजीनियर (जेई) देवेंद्र कुमार, असिस्टेंट इंजीनियर (एई) दीपक त्यागी और एक्जीक्यूटिव इंजीनियर (ईई) तरुण आर्य की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। क्योंकि वो साइड पर आकर जांच की जरूरत ही नहीं समझते। इसके साथ ही, जनप्रतिनिधि और बिल्डर्स लॉबी के बीच कथित मिलीभगत ने इस भ्रष्टाचार को और हवा दी है।

पहाड़गंज के चुना मंडी में अवैध निर्माण की यह समस्या कोई नई बात नहीं है। पिछले कई वर्षों से इस क्षेत्र में बिना अनुमति के बहुमंजिला इमारतें खड़ी हो रही हैं, अवैध रूप से होटल बनाए जा रहे हैं और उनमें खुल रहे हैं अवैध स्पा ? जो न केवल दिल्ली मास्टर प्लान का उल्लंघन करती हैं, बल्कि आम जनता की सुरक्षा के लिए भी खतरा बन रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे निर्माणों में अग्नि सुरक्षा, पार्किंग नियम और भवन संरचना के मानकों की अनदेखी की जाती है। इसके बावजूद, निगम के अधिकारियों द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। सूत्रों के अनुसार, जेई देवेंद्र कुमार, एई दीपक त्यागी और ईई तरुण आर्य ने इस अवैध निर्माण को नजरअंदाज किया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वे बिल्डर्स लॉबी के दबाव में काम कर रहे हैं।

स्थानीय निवासियों का आरोप है कि जनप्रतिनिधि इस अवैध निर्माण को संरक्षण दे रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, बिल्डर्स लॉबी और जनप्रतिनिधि के बीच गहरी सांठगांठ है, जिसके चलते अवैध निर्माण पर कोई रोक नहीं लग पा रही है। यह भी बताया जा रहा है कि निगम के निचले स्तर के अधिकारी उपायुक्त और निगम आयुक्त को गुमराह करते हैं, जिससे कार्रवाई की प्रक्रिया रुक जाती है। इस मिलीभगत के परिणामस्वरूप, कई अधिकारी अकूत संपत्ति के मालिक बन चुके हैं, जबकि जनता को खतरनाक इमारतों के बीच रहने को मजबूर होना पड़ रहा है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई में ढिलाई को लेकर एमसीडी को कड़ी फटकार लगाई थी। एक मामले में कोर्ट ने निगम आयुक्त को यह स्पष्ट करने को कहा था कि अवैध निर्माण को रोकने में विफल रहने वाले अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है। इसके बावजूद, करोल बाग जोन में स्थिति जस की तस बनी हुई है। चुना मंडी के इस विशेष मामले में, स्थानीय लोगों ने कई बार शिकायतें दर्ज कीं, लेकिन निगम ने कोई कार्रवाई नहीं की। यह सवाल उठता है कि क्या निगम के अधिकारी और जनप्रतिनिधि जानबूझकर अपनी आंखें बंद कर रहे हैं?

स्थानीय निवासियों का कहना है कि अवैध निर्माण के कारण क्षेत्र में यातायात, जल निकासी और अन्य बुनियादी सुविधाओं पर बुरा असर पड़ रहा है। एक निवासी ने बताया कि इन इमारतों के कारण गलियां संकरी हो गई हैं, जिससे आपातकालीन स्थिति में फायर ब्रिगेड या एम्बुलेंस का पहुंचना मुश्किल हो गया है। इसके अलावा, इन निर्माणों से आसपास की संपत्तियों की नींव को भी खतरा है।

दिल्ली में अवैध निर्माण की समस्या लंबे समय से चर्चा में है। एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले दस वर्षों में एमसीडी के 12 जोन में 76,465 अवैध निर्माण के मामले सामने आए, लेकिन कार्रवाई केवल 35,842 मामलों में ही हुई। यह आंकड़ा इस बात का प्रमाण है कि भ्रष्टाचार और राजनीतिक दखल के कारण अवैध निर्माण पर रोक लगाना मुश्किल हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक निगम के अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही तय नहीं की जाएगी, तब तक इस समस्या का समाधान संभव नहीं है।

करोल बाग जोन के इस मामले में, जनप्रतिनिधि और बिल्डर्स लॉबी की मिलीभगत की जांच की मांग जोर पकड़ रही है। स्थानीय लोग चाहते हैं कि निगम आयुक्त इस मामले में व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप करें और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें। साथ ही, चुना मंडी में चल रहे अवैध निर्माण को तत्काल रोका जाए और संबंधित संपत्ति को सील किया जाए।

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