दिल्ली पुलिस के सब-इंस्पेक्टरों का 15 साल बाद भी पहला प्रमोशन नहीं, उपराज्यपाल से की गई हस्तक्षेप की मांग

विशेष संवाददाता मणि आर्य

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस के सब-इंस्पेक्टर (एक्ज़िक्यूटिव) बैच 2010 के पुलिसकर्मियों ने 15 साल से पहले प्रमोशन से वंचित रहने को लेकर उपराज्यपाल दिल्ली को ज्ञापन सौंपा है। इन पुलिसकर्मियों का आरोप है कि 2010 में भर्ती होने के बावजूद उन्हें आज तक पहला प्रमोशन नहीं मिला, जबकि अन्य विभागीय रैंकों को समय पर पदोन्नति मिल चुकी है। उनका कहना है कि विभाग ने अब तक उनके प्रमोशन के लिए कोई स्पष्ट नीति तय नहीं की है और उन्हें प्रमोशन के मुद्दे पर लगातार उपेक्षा का सामना करना पड़ रहा है।

इन पुलिसकर्मियों ने यह आरोप भी लगाया कि 2010 से 2013 के बीच जिन अन्य रैंकों में भर्ती की गई, जैसे कांस्टेबल, हेड कांस्टेबल, एएसआई, इंस्पेक्टर और एसीपी, उन्हें 10-12 साल के भीतर प्रमोशन मिल चुका है, जबकि सब-इंस्पेक्टरों का मामला बिल्कुल उलटा है। यह स्थिति तब है जब इन पुलिसकर्मियों को अब 16 साल हो गए हैं, लेकिन वे आज भी अपने पहले प्रमोशन का इंतजार कर रहे हैं।

पिछले साढ़े तीन सालों में एक भी सब-इंस्पेक्टर का प्रमोशन न होना इस समस्या को और भी गंभीर बना रहा है। पुलिसकर्मियों ने बताया कि विभाग ने पिछले तीन साल में किसी भी सब-इंस्पेक्टर को प्रमोट नहीं किया, जबकि पहले से प्रमोट किए गए अधिकारियों को नियमित प्रमोशन दिया गया। इस मुद्दे पर सैकड़ों ई-मेल और प्रतिनिधित्व भेजे गए, लेकिन विभाग ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

महिला सब-इंस्पेक्टरों ने प्रमोशन में भेदभाव के खिलाफ केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) में याचिका भी दायर की थी। उनका कहना है कि विभाग ने इस मामले में केवल नजरअंदाजी की है और उन्हें न्याय दिलाने में कोई वास्तविक कदम नहीं उठाए हैं। साथ ही, इस ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि जिन विभागों में मिनिस्टीरियल, स्टेनो और टेक्निकल कैडर के जूनियर अधिकारी प्रमोशन पाकर अब सीनियर हो गए हैं, वह भी सब-इंस्पेक्टरों में नाराजगी का कारण बना है।

सब-इंस्पेक्टरों का कहना है कि वे रोज़ाना जनता को न्याय दिलाने का कार्य करते हैं, लेकिन आज खुद न्याय के लिए भटक रहे हैं। वे यह भी बताते हैं कि रिटायरमेंट प्रमोशन स्कीम के तहत एक रैंक प्रमोशन की योजना का फायदा उन्हें नहीं मिलेगा, क्योंकि वे पहले प्रमोशन से ही वंचित हैं। इस योजना के बारे में उपराज्यपाल द्वारा किए गए ऐलान के बावजूद, ये पुलिसकर्मी इसके लाभ से बाहर हैं।

ज्ञापन में यह भी सवाल उठाया गया है कि अन्य राज्यों में जहां डायरेक्ट भर्ती सब-इंस्पेक्टरों को 7-10 साल के भीतर प्रमोशन मिल जाता है, वहीं दिल्ली में यह प्रक्रिया इतनी धीमी और भेदभावपूर्ण क्यों है? यह मुद्दा दिल्ली पुलिस के सब-इंस्पेक्टरों के लिए असमंजस और निराशा का कारण बना है, और उनकी इस बात को सही ठहराया जा सकता है कि उन्हें सिर्फ एक वाजिब प्रमोशन की आवश्यकता है, जो उनकी सेवा और संघर्ष का सम्मान हो।

इन पुलिसकर्मियों ने उपराज्यपाल से आग्रह किया है कि वे इस मामले में हस्तक्षेप करें और प्रमोशन प्रक्रिया को पारदर्शी, समयबद्ध और न्यायपूर्ण बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाएं। उनका कहना है कि विभाग की अनदेखी और लगातार हो रही देरी ने उन्हें कानूनी कार्रवाई करने के अलावा कोई और विकल्प नहीं छोड़ा है।

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