बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सक्रिय राज्य राजनीति को छोड़कर राज्यसभा जाने की तैयारी में।

बिहार की राजनीति के ‘चाणक्य’ कहे जाने वाले नीतीश कुमार क्या अब दिल्ली की राजनीति में अपनी नई पारी शुरू करने जा रहे हैं? बिहार की राजनीति में एक ऐसे युग के अंत की सुगबुगाहट तेज हो गई है जिसने पिछले दो दशकों से राज्य की सत्ता को अपने इर्द-गिर्द केंद्रित रखा था।इस सवाल ने कल होली के रंग में भंग डाल दिया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सक्रिय राज्य राजनीति को छोड़कर राज्यसभा जाने की खबरों ने बिहार के सियासी गलियारों में भूकंप ला दिया है। जहां एक ओर विपक्षी दल इसे एक पारी का अंत बता रहे हैं, वहीं जेडीयू (JDU) के भीतर दुख के सुर फूटने लगे हैं।

पटना में जेडीयू कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच छाई मायूसी इस कदर है कि पार्टी के कद्दावर नेता राजीव रंजन पटेल ने यहां तक कह दिया कि बिहार की जनता रो रही है और कार्यकर्ताओं के लिए कल की होली मातम जैसी थी।जेडीयू नेता राजीव रंजन पटेल ने मुख्यमंत्री के संभावित फैसले पर अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए सीधे तौर पर नेतृत्व को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले से पहले हजारों कार्यकर्ताओं से पूछा तक नहीं गया। हम उन कार्यकर्ताओं के लिए क्या जवाब देंगे जिन्होंने नीतीश कुमार के नाम पर वोट मांगे और उन्हें जिताया?

पटेल ने साफ शब्दों में कहा अगर नीतीश कुमार बिहार की राजनीति में नहीं रहेंगे, तो हम पार्टी में रहकर क्या करेंगे? उनके बिना जेडीयू का कोई अस्तित्व नहीं है। नीतीश कुमार के स्वास्थ्य को लेकर उड़ रही अफवाहों पर विराम लगाते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री पूरी तरह स्वस्थ हैं और उनके राज्यसभा जाने का कारण खराब सेहत बिल्कुल नहीं है।

आमतौर पर बिहार में होली का त्योहार बड़े धूमधाम से मनाया जाता है, लेकिन जेडीयू कार्यालय के बाहर दृश्य अलग था। नेताओं का दावा है कि मुख्यमंत्री के इस फैसले की खबर जैसे ही फैली, कार्यकर्ताओं ने अबीर-गुलाल छोड़ दिया।

राजीव रंजन पटेल ने ANI से बातचित करते हुए कहा- बिहार के लोग रो रहे हैं, कल किसी ने होली नहीं मनाई। कार्यकर्ताओं में भारी रोष है कि जिस नेता के लिए उन्होंने अपना जीवन समर्पित कर दिया, वह उन्हें बीच मझधार में छोड़कर केंद्र की राजनीति में जा रहे हैं।

नीतीश कुमार के दिल्ली जाने की चर्चाओं के साथ ही बिहार के अगले मुख्यमंत्री को लेकर भी कयासों का दौर शुरू हो गया है। चर्चा है कि निशांत कुमार (नीतीश के बेटे) को पार्टी के संगठन में बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है, जबकि सरकार चलाने के लिए किसी अनुभवी ओबीसी चेहरे या उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नाम पर मंथन हो सकता है। हालांकि, कार्यकर्ताओं की जिद है कि नीतीश कुमार को इस्तीफा नहीं देना चाहिए और उन्हें 2025-26 के इस कार्यकाल को पूरा करना चाहिए।

इधर, राजद (RJD) और अन्य विपक्षी दलों ने इस घटनाक्रम पर चुटकी ली है। विपक्ष का कहना है कि नीतीश कुमार अब बिहार की समस्याओं और बढ़ती बेरोजगारी का सामना नहीं कर पा रहे हैं, इसलिए वे राज्यसभा के सुरक्षित रास्ते से दिल्ली जाना चाहते हैं।

होली के अगले दिन पटना की हवाओं में राजनीतिक अनिश्चितता घुली हुई है। जेडीयू नेताओं का यह खुला विरोध दर्शाता है कि नीतीश कुमार के लिए बिहार छोड़ना इतना आसान नहीं होगा। आने वाले 48 घंटे बिहार की सत्ता और जेडीयू के अस्तित्व के लिए बेहद निर्णायक होने वाले हैं।

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