विशेष संवाददाता चिमन लाल
डिजिटल माध्यम से होगी देश की जनगणना 2027: डीसी
झज्जर,
उपायुक्त स्वप्निल रविंद्र पाटिल ने कहा कि भारत सरकार द्वारा प्रस्तावित जनगणना 2027 देश के प्रशासनिक इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ने जा रही है, क्योंकि यह भारत की पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना होगी। उपायुक्त ने जनगणना की तैयारियों को लेकर आयोजित जिला स्तरीय बैठक में अधिकारियों को यह जानकारी दी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि जनगणना के लिए नियुक्त स्टाफ का प्रशिक्षण कराएं। प्रशिक्षण में सभी बिंदुओं को सही तरीके से कवर करें। बैठक में गृह मंत्रालय भारत सरकार की ओर से नियुक्त जिला जनगणना समन्वयक मोहित कुमार ने डिजिटल जनगणना प्रक्रिया की विस्तार से बिंदुवार जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जनगणना कार्य की तैयारियां प्रारंभ हो चुकी हैं। सभी गांवों, शहरों, खंडों , तहसीलों और जिलों की लिस्टिंग हो चुकी है। जनगणना पूरी होने तक अब कोई भी बदलाव नहीं होगा।
उपायुक्त ने कहा कि जनगणना केवल आंकड़ों का संकलन नहीं, बल्कि राष्ट्र की नीतिगत दिशा तय करने की आधारशिला है। भारत जैसे विशाल देश में लगभग 140 करोड़ नागरिकों की गणना एक अत्यंत व्यापक, संवेदनशील और जिम्मेदारी पूर्ण कार्य है। इसकी शुद्धता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए पूर्व परीक्षण (प्री-टेस्ट) किया जा चुका है तथा अब प्रशिक्षण एवं रिहर्सल का अगला चरण शुरू किया जा रहा है। उपायुक्त ने बताया कि इस बार जनगणना प्रक्रिया पूरी तरह पेपरलेस होगी। मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से घर-घर जाकर आंकड़े सीधे डिजिटल रूप से दर्ज किए जाएंगे। इससे न केवल डेटा की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होगा, बल्कि मानवीय त्रुटियां भी न्यूनतम होंगी और डेटा प्रोसेसिंग में लगने वाला समय भी काफी कम हो जाएगा। डिजिटल प्लेटफॉर्म के उपयोग से जनगणना प्रक्रिया अधिक तेज, पारदर्शी और भरोसेमंद बनेगी। उन्होंने जानकारी दी कि जनगणना 2027 दो चरणों में संपन्न की जाएगी। पहला चरण हाउस लिस्टिंग का कार्य एक मई 2026 से आरंभ होगा, जबकि दूसरा चरण जनसंख्या गणना (एन्यूमरेशन) फरवरी 2027 में आयोजित किया जाएगा। इन दोनों चरणों में प्रत्येक परिवार और प्रत्येक व्यक्ति का सटीक विवरण दर्ज किया जाएगा। उपायुक्त ने कहा कि जनगणना के आंकड़े केंद्र व राज्य सरकारों की योजनाओं, संसाधनों के उचित वितरण तथा विकास कार्यों की प्राथमिकताएं तय करने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। इससे यह भी आकलन होता है कि सरकारी योजनाएं जमीनी स्तर पर कितनी प्रभावी सिद्ध हुई हैं और किन क्षेत्रों में अतिरिक्त प्रयास की आवश्यकता है। ऐसे में प्रत्येक नागरिक की सहभागिता अत्यंत आवश्यक है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी व्यक्ति जनगणना से वंचित न रहे।
उपायुक्त ने कहा कि प्रशिक्षण, हाउस लिस्टिंग तथा जनसंख्या गणना सहित जनगणना के सभी आगामी चरणों में जिला प्रशासन द्वारा सभी विभागों का आपसी समन्वय और सहयोग सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि यह राष्ट्रीय कार्य पूरी निष्ठा, पारदर्शिता और सटीकता के साथ संपन्न हो सके। बैठक में जिला राजस्व अधिकारी मनबीर सांगवान, डीआईपीआरओ सतीश कुमार ,जिला शिक्षा अधिकारी रतिंदर सिंह सहित तहसीलदार, बीडीपीओ और विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।