उत्तर प्रदेश में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ चल रहे पॉक्सो केस में एक ऐसी मेडिकल रिपोर्ट सामने आई है, जिसने पुलिस और कानून के गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। ताजा रिपोर्ट के अनुसार, पीड़ित बटुकों की मेडिकल जांच में उनके साथ हुए जबरन यौन उत्पीड़न की पुष्टि हो गई है। यह केवल आरोप नहीं, बल्कि डॉक्टरों की वो कड़वी हकीकत है जो अब फाइलों में दर्ज हो चुकी है। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद अब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्यों पर गिरफ्तारी का शिकंजा और भी कस गया है।
एक विशेष इंटरव्यू में पीड़ित बटुकों ने मठ के भीतर होने वाले उन काले कारनामों का खुलासा किया है, जिन्हें सुनकर किसी का भी खून खौल जाए। बटुकों ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि उन्हें ‘गुरु दीक्षा’ देने के नाम पर कमरे में बुलाया जाता था और फिर उनके साथ आपत्तिजनक हरकतें की जाती थीं। उन्होंने दावा किया कि यह सिलसिला सिर्फ एक-दो बच्चों तक सीमित नहीं है। राजस्थान और बिहार जैसे राज्यों से मासूम बच्चों को मठ में लाया जाता था। बटुकों के अनुसार, वहां करीब 20 और बच्चे ऐसे हैं जो इस हैवानियत का शिकार हो चुके हैं, लेकिन वे डर के मारे सामने नहीं आ पा रहे हैं और आज भी वहां ‘कैद’ हैं।
पीड़ित बच्चों ने एक ऐसे कमरे का जिक्र किया है जिसने जांच एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं। बटुकों का आरोप है कि मठ परिसर में एक खास कमरा है, जहाँ स्वीमिंग पूल बना हुआ है। वहां कुछ ‘सखियां’ उन्हें नहलाती थीं और फिर प्रभावशाली व सफेदपोश लोगों के सामने उन्हें पेश किया जाता था। बटुकों ने कहा कि कई बड़े और रसूखदार लोग वहां आते-जाते थे, जिन्हें वे चेहरे से पहचानते हैं। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि विरोध करने पर उन्हें चुप रहने और जान से मारने की धमकियां दी जाती थीं। ये बच्चे किसी तरह जान बचाकर मठ से भागे और दूसरे धार्मिक गुरु के पास जाकर अपनी आपबीती सुनाई, जिसके बाद यह पूरा मामला अदालत तक पहुंचा।
वही दूसरी ओर, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे एक बड़ी राजनीतिक साजिश करार दिया है। वाराणसी में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने पुलिस की कार्यप्रणाली पर ही सवाल उठा दिए। स्वामी ने कहा कि यह कैसी जांच है जहाँ शिकायतकर्ता आशुतोष महाराज खुद पुलिस की टीम के साथ हर जगह मौजूद हैं? उन्होंने पूछा कि जब शिकायतकर्ता खुद पुलिस की गाड़ी में घूमेगा, तो जांच निष्पक्ष कैसे हो सकती है? स्वामी का दावा है कि ये बच्चे आशुतोष महाराज के प्रभाव में हैं और उनके कहने पर झूठ बोल रहे हैं। उन्होंने साफ कहा कि वे कानून का सम्मान करते हैं, लेकिन उन्हें फंसाने के लिए साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की जा रही है।
एडीजे पॉक्सो कोर्ट के सख्त निर्देश के बाद पुलिस अब इस मामले में एक-एक कड़ी जोड़ रही है। मेडिकल रिपोर्ट में जबरन यौन कृत्य की पुष्टि होने के बाद अब पुलिस के पास आरोपियों को गिरफ्तार करने के पर्याप्त आधार मिल गए हैं। आशुतोष ब्रह्मचारी ने इसे ‘धार्मिक संघर्ष’ बताते हुए कहा है कि उनके पास ऐसे ठोस सबूत हैं जो आरोपियों को उम्रकैद तक दिला सकते हैं। फिलहाल, पूरा मामला कोर्ट में है और कल होने वाली सुनवाई यह तय करेगी कि क्या शंकराचार्य को जेल जाना पड़ेगा या उन्हें कोई राहत मिलेगी। इस हाई-प्रोफाइल केस ने आस्था और कानून के बीच एक ऐसी लकीर खींच दी है, जिस पर पूरे देश की नजरें टिकी हैं।