विक्रम गोस्वामी / वरिष्ठ संवाददाता
नई दिल्ली । क्राइम हिलोरे समाचार समूह के प्रबंध संपादक एवं वरिष्ठ पत्रकार मणि आर्य ने हाल ही में खुलासे किए हैं, जिसमें उन्होंने स्पष्ट शब्दों में पहाड़गंज इलाके के भू–माफिया बलविंदर कपूर और बीसी शिवदयाल उर्फ़ चिंटू को अपने ऊपर हो रहे झूठे आरोपों के पीछे अपराधी तत्व बताया है। मणि आर्य ने बताया कि ये दोनों व्यक्ति उनके खिलाफ सामाजिक, कानूनी तथा मीडिया पर दबाव बनाने के लिए लगातार झूठ फैलाने और धमकी देने में लगे हैं।
मिथ्या आरोपों का पर्दाफाश
मणि आर्य का कहना है कि बीसी शिवदयाल और बलविंदर कपूर सोशल मीडिया पर कई झूठी पोस्ट और वीडियो शेयर कर रहे हैं, जिनमें उन पर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं—जैसे 8,450 संबंधी वित्तीय गड़बड़ी, संस्था की अनियमितता और पंजीकरण न होने का दावा। मणि आर्य ने आरोपों को न केवल “आधारहीन” बताया, बल्कि यह भी स्पष्ट किया कि “कोई भी संस्था बिना रजिस्ट्रेशन के नहीं चलती। प्रमाण की आवश्यकता नहीं, क्योंकि उनका दावा ही गलत है।“
इन आरोपों पर मणि आर्य ने कहा, “ये दोनों अपराधी मानसिकता वाले लोग हैं, जो अपनी आपराधिक गतिविधियों को मीडिया को डराकर छुपाने की कोशिश कर रहे हैं। ये खिसियानी बिल्ली खंभा नोचने की तरह सोशल मीडिया और अदालत कभी-कभी पुलिस के नाम पर भी भ्रम फैलाते हैं।”
न्यायालय ने आवेदनों को खारिज किया
बीसी शिवदयाल उर्फ चिंटू पर मध्य जिला पुलिस ने दिल्ली पुलिस एक्ट की धारा 50 (शांति भंग) का नोटिस जारी किया था, जिसमें स्पष्ट निर्देश दिया गया था कि वह पहाड़गंज इलाके में किसी भी व्यक्ति को धमकाने या शांति भंग करने की गतिविधियों से बाज़ आए। इसके अलावा बलविंदर कपूर द्वारा दायर रिट पिटिशन को दिल्ली उच्च न्यायालय ने पूरी तरह खारिज कर दिया, यह संदेश देते हुए कि आरोपों की कोई वैधानिक शक्ति नहीं है।
मणि आर्य ने गर्व के साथ बताया कि उनकी संस्था के वकीलों ने अदालत में इतनी मजबूती से जवाब दिया कि अदालत ने दोनों की याचिकाओं को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, “ये अदालत-सम्मानित जवाब दोनों आरोपियों की रणनीति को पूरी तरह से विफल कर गए।”
अपराधी चरित्र का पर्दाफाश
मणि आर्य की रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ कि दोनों आरोपियों के व्यापारिक तौर–तरीके में गड़बड़ियाँ हैं। बलविंदर कपूर का नाम भू–माफिया व बिल्डर के रूप में जुड़ा है, जिन पर भवन कब्ज़ा, ज़मीन पर अवैध कब्ज़ा और ठगी के गंभीर आरोप हैं। वहीं, बीसी शिवदयाल को क्षेत्र में अपनी ‘डरा–धमकाकर व्यवसाय बढ़ाने’ की प्रवृत्ति के लिए जाना जाता है। मणि आर्य ने कहा, “ये एक बिल्डर नहीं, बल्कि बिल्डर के साथ बदमाश बनने वाले लोग बन चुके हैं।” उन्होंने मुख्यमंत्री और संबंधित सुरक्षा एजेंसियों से अपील की कि ऐसे अपराधी तत्वों की कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि आम जनता को डर और धमकी से निजात मिल सके।
विरोध में कानूनी मोर्चा और मीडिया कानून
मणि आर्य ने प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया, विश्व पत्रकार महासंघ और संबंधित अन्य संस्थाओं को अपने मामले में समर्थन देने के लिए धन्यवाद दिया।उन्होंने बताया कि आरोपियों ने इन संस्थाओं के खिलाफ भी गलत दावे किए, लेकिन वहाँ भी उनकी याचिका विफल हुई। उन्होंने जोर देकर कहा कि “सत्य पत्रकारिता को किसी भी दबाव से डरने की आवश्यकता नहीं। इस तरह के आरोप पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर हमला करते हैं।”
प्रशासन को चेतावनी
पत्रकार मणि आर्य ने पुलिस और प्रशासन से आग्रह किया कि वे इन अपराधियों पर जल्द से जल्द कानूनी कार्रवाई करें, क्योंकि अभी भी इनके प्रभाव के कारण पहाड़गंज में एक अर्धकानूनी शासन की स्थिति बनी हुई है। उन्होंने कहा कि यदि सराफा, मिधाता या अन्य प्रमुख व्यवसायी जो इन लोगों से डरते हुए सार्वजनिक स्थल पर नहीं आ रहे, तो यह शांति–व्यवस्था के प्रति प्रशासन की जवाबदेही भी होगी।
जनता से जवाबदेही की उम्मीद
मणि आर्य ने जनता से भी सवाल किया कि “क्या आप ऐसे भू–माफियाओं को इजाजत देंगे कि वे सोशल मीडिया और अदालत के माध्यम से झूठ फैलाकर आपकी या अन्य किसी की प्रतिष्ठा को मिटा दें? वे 8,450 फर्जी-आरोप लेकर पूरे इलाके में आतंक फैला रहे हैं।” उन्होंने आम नागरिकों से अपील की कि वे इन आरोपों को सामाजिक माध्यमों पर दोबारा नहीं फैलाएं और शांत रहें।
मीडिया—एक सतर्क प्रहरी
मणि आर्य ने अंतिम शब्दों में कहा कि “पत्रकार केवल खबर नहीं करते, बल्कि लोकतंत्र के प्रहरी होते हैं। हमारी यह लड़ाई सच और स्वतंत्र विचार की लड़ाई है।” उन्होंने प्रेस काउंसिल, अदालत और नागरिक संयम की जय-जयकार की और समाप्त किया: “सत्यमेव जयते।”
इस पूरे घटनाक्रम से स्पष्ट होता है कि पत्रकार मणि आर्य ने अपने पत्रकारिता के सिद्धांत की रक्षा की लड़ाई को मजबूती से आगे बढ़ाया है। उन्होंने दोनों आरोपियों को अपराधी चिह्नित करते हुए न्यायपालिका और कानून के प्रति विश्वास बनाए रखा है, जो लोकतंत्र एवं स्वतंत्र पत्रकारिता के लिए एक बड़ी मिसाल बन सकता है। फिलहाल इस मामले में दिल्ली पुलिस कमिश्नर एवं अन्य प्रशासनिक अधिकारियों को लिखित शिकायत दी जा चुकी है। इस पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए दिल्ली पुलिस कमिश्नर ने जांच के आदेश जारी किए हैं।