टीबी के प्रकार क्या हैं? एक्स्ट्रा पल्मोनरी (नॉन-पल्मोनरी) टीबी पर विशेष फोकस
प्रश्न 1: क्या टीबी हमेशा फेफड़ों की बीमारी होती है?
नहीं। टीबी मुख्यतः दो प्रकार की होती है:
पल्मोनरी टीबी – जो फेफड़ों को प्रभावित करती है
एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी (EPTB) – जो फेफड़ों के बाहर शरीर के अन्य अंगों को प्रभावित करती है। जैसे :
गर्दन की लसीका ग्रंथियां (लिम्फ नोड्स),फेफड़ों के बाहर पानी की झिल्ली (प्लूरा),पेट/आंत
हड्डियां और रीढ़,दिमाग की झिल्ली (TB meningitis),मूत्र मार्ग / किडनी,महिलाओं के जननांग
तकरीबन 40 – 45% टी बी के मरीज एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी (EPTB) के होते हैं ।
पर यह टी.बी. एक से दूसरे को फैलती नही है ।
प्रश्न 2: इसके सामान्य लक्षण क्या हैं?
लक्षण प्रभावित अंग पर निर्भर करते हैं, जैसे:
गर्दन में गांठ या सूजन,लंबे समय तक बुखार, वजन कम होना,भूख कम लगना, रीढ़ की टीबी में पीठ दर्द, पेट की टीबी में दर्द, पानी भरना या कब्ज/दस्त,दिमाग की टीबी में सिरदर्द, उल्टी, दौरे
महिलाओं में बांझपन या मासिक धर्म की अनियमितता,प्लूरल टीबी में सीने में दर्द और सांस फूलना ।
प्रश्न 3: इसकी पहचान में देरी क्यों होती है?
क्योंकि इसमें अक्सर खांसी नहीं होती। इसके लक्षण कैंसर, गठिया, पेट की बीमारी – ऐसीडिटी या अन्य संक्रमण जैसे लग सकते हैं, इसलिए मरीज और डॉक्टर दोनों स्तर पर पहचान में देरी हो सकती है.
प्रश्न 4: एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी की जांच कैसे होती है?
इसकी जांच में निम्न साधनों का उपयोग होता है:
अल्ट्रासाउंड / CT / MRI,एक्स-रे,FNAC या बायोप्सी,
प्लूरल / पेट / CSF फ्लूइड जांच, CBNAAT / Truenat /molecular tests,
हिस्टोपैथोलॉजी
प्रश्न 5:क्या इसका इलाज फेफड़ों की टीबी से अलग होता है?
अधिकांश मामलों में इलाज National TB Elimination Programme के तहत मुफ्त एंटी-टीबी दवाओं से होता है। लेकिन दिमाग, रीढ़ या गंभीर पेट की टीबी में इलाज की अवधि अधिक हो सकती है और विशेषज्ञ देखरेख की जरूरत पड़ सकती है।
प्रश्न 6: क्या यह पूरी तरह ठीक हो सकती है?
हाँ, यदि समय पर सही जांच और पूरा इलाज हो, तो अधिकांश एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी के मरीज पूरी तरह ठीक हो सकते हैं।
प्रश्न 7: आम जनता को क्या ध्यान रखना चाहिए?
यदि शरीर में लगातार सूजन, गांठ, लंबे समय तक बुखार, पीठ दर्द, पेट में पानी, वजन घटना या महिलाओं में बांझपन जैसी समस्या हो, तो टीबी की संभावना को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
निष्कर्ष:
टीबी केवल फेफड़ों की बीमारी नहीं है। एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी शरीर के लगभग किसी भी अंग को प्रभावित कर सकती है और अक्सर देर से पकड़ी जाती है। समय पर संदेह, सही जांच और पूरा इलाज ही टीबी मुक्त भारत की दिशा में बड़ा कदम है।
डॉ. एस.के. अरोड़ा,
सीनियर चेस्ट विशेषज्ञ,कंसल्टेंट, पूर्व दिल्ली राज्य टी.बी. विभाग प्रमुख , दिल्ली सरकार
(डब्ल्यूएचओ द्वारा सम्मानित)