कड़ाके की ठंड…घना कोहरा और सड़क पर बिखरी ज़िंदगियाँ।
ये वीडियो किसी सुपरहीरो का नहीं है, ये वीडियो है मेरे मित्र और दिल्ली के जाने माने पत्रकार राजेश खत्री का।पंजाब के सफ़र पर थे राजेश…जालंधर के पास अचानक कोहरे में कई गाड़ियाँ आपस में टकरा गईं। चीख़ें थीं, टूटे शीशे थे और गाड़ियों में फँसे लोग जो बस मदद का इंतज़ार कर रहे थे। राजेश रुके। पत्रकार थे, पर उस वक़्त इंसान पहले थे। कड़कड़ाती ठंड में अपने हाथों से गाड़ियों की खिड़कियाँ तोड़ीं, घायलों को बाहर निकाला। एक नहीं…दस से ज़्यादा कॉल की गईं। लेकिन पुलिस करीब 40 मिनट बाद पहुँची। अब पीसीआर मौके पर थी पर घायलों को उठाने से मना कर दिया गया। कहा गया “एम्बुलेंस आएगी, तभी अस्पताल ले जाएँगे।”
और तब राजेश ने इंतज़ार नहीं किया। रास्ते से गुजरती गाड़ियों को रोका अनजान लोगों से मदद मांगी घायलों को अपनी गाड़ियों में बैठाया और अस्पताल पहुँचाया। ख़ुद मीडिया कर्मियों ने टूटी गाड़ियों को सड़क से हटाया ताकि और कोई हादसा न हो। ये वीडियो सवाल पूछता है अगर उस रात राजेश नहीं रुकते तो कितनी ज़िंदगियाँ शायद आज हमारे बीच न होतीं? इंसानियत आज भी ज़िंदा है। Punjab Police India Rajesh Kumar Khatri #bravery #journalism
वरिष्ठ पत्रकार तनसीम हैदर की खास रिपोर्ट