विशेष संवाददाता चिमन लाल
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के मध्य स्थित पहाड़गंज क्षेत्र के आर्य नगर में स्थित प्रसिद्ध आर्य समाज मंदिर में शनिवार 31 जनवरी से रविवार 1 फरवरी तक आयोजित 1001 गायत्री महायज्ञ ने पूरे क्षेत्र को वैदिक ऊर्जा और आध्यात्मिक चेतना से भर दिया। आर्य जगत की विदुषी और सुप्रसिद्ध यज्ञ प्रवक्ता नीरजा आर्या जी के सान्निध्य में संपन्न हुए इस दो दिवसीय महायज्ञ में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने परिवार सहित सहभागिता कर आत्मिक लाभ प्राप्त किया।
शनिवार प्रातः वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ यज्ञ का शुभारंभ हुआ। हवन कुंड से उठती आहुतियों की सुगंध, सामूहिक गायत्री मंत्र जप और ऋषि परंपरा पर आधारित वैदिक विधि-विधान ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। यज्ञ के दौरान नीरजा आर्या जी ने उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए गायत्री मंत्र के आध्यात्मिक, मानसिक और सामाजिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गायत्री महायज्ञ केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि व्यक्ति और समाज के नैतिक उत्थान का सशक्त माध्यम है।
रविवार को यज्ञ की पूर्णाहुति के साथ शांति पाठ किया गया, जिसमें विश्व कल्याण, राष्ट्र की उन्नति और मानव मात्र के सुख-शांति की कामना की गई। शांति पाठ के उपरांत ऋषि लंगर का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने पंक्तिबद्ध होकर प्रसाद ग्रहण किया। लंगर में जाति, वर्ग और सामाजिक भेदभाव से ऊपर उठकर सभी के लिए समान व्यवस्था की गई, जो आर्य समाज की समानता और मानवता की मूल भावना को दर्शाता है।
इस अवसर पर क्षेत्र के अनेक गणमान्य व्यक्ति, सामाजिक कार्यकर्ता और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। पहाड़गंज क्षेत्र के निगम पार्षद मनीष चड्ढा ने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे वैदिक कार्यक्रम समाज में सकारात्मक ऊर्जा और संस्कारों को सुदृढ़ करते हैं। कार्यक्रम में संजय आचार्य, आर्य समाज के प्रधान विजय कपूर, महामंत्री चंद्र मोहन कपूर, डॉ. जनमेजय राणा (महामंत्री), संजीव कोहली (उपप्रधान), श्रीमती शशि विज, वरुण हीरा, स्वदेश चड्ढा (महामंत्री, सनातन धर्म सभा), कमल बागड़ी (निगम पार्षद, राम नगर) सहित अनेक प्रमुख व्यक्ति उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में मणि आर्य, राष्ट्रीय संयोजक, विश्व पत्रकार महासंघ एवं प्रबंधक संपादक क्राइम हिलोरे न्यूज ग्रुप की उपस्थिति भी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। उन्होंने कहा कि आज के समय में वैदिक परंपराओं और यज्ञ जैसे आयोजनों की प्रासंगिकता और भी बढ़ गई है, क्योंकि ये मानव को मानसिक शांति, सामाजिक समरसता और नैतिक मूल्यों से जोड़ते हैं।
आर्य समाज मंदिर के पदाधिकारियों ने आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी यजमानों, स्वयंसेवकों और श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त किया। दो दिवसीय 1001 गायत्री महायज्ञ न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र रहा, बल्कि समाज में सद्भाव, सेवा और संस्कारों के संदेश को भी मजबूती से स्थापित करता नजर आया।