फोन पर धमकी देकर रूपयों की डिमांड करने के मामले में दो आरोपी गिरफ्तार

विशेष संवाददाता चिमन लाल

झज्जर

सीआईए झज्जर व थाना शहर झज्जर की संयुक्त पुलिस टीम ने अवैध रूप से पैसों की मांग करने और पैसे ना देने पर जान से मारने की धमकी देने के मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार करने में कामयाबी हासिल की है। मामले की विस्तृत जानकारी देते हुए पुलिस कमिश्नर डॉक्टर राजश्री सिंह ने पत्रकारों से रूबरू होते हुए बताया कि रईया निवासी एक व्यक्ति जिसने झज्जर में आफिस कर रखा है ने शिकायत देते हुए बताया कि 28 अगस्त 2025 को सुबह करीब 9.54 मिनट पर विदेशी नंबर से व्हाट्सएप कॉल आई और 25 लाख रुपए की अवैध रूप से मांग की। मांग पूरी न करने पर जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद 7 सितंबर 2025 को दोबारा सुबह 9:00 बजे कॉल आई और अज्ञात आईडी से इंस्टाग्राम पर कुछ ऑडियो और वीडियो भी आये। जिन्होंने 30 लाख रुपए की अवैध रूप से मांग की और न देने पर जान से मारने की धमकी भी दी। जिस पर कार्रवाई करते हुए सीआईए झज्जर निरीक्षक विवेक मलिक की अगुवाई में थाना शहर झज्जर की व सीआईए झज्जर की संयुक्त टीम ने साइबर की मदद लेते दो आरोपियों को गिरफ्तार करने में कामयाबी हासिल की। पकड़े गए आरोपियों की पहचान प्रितुल निवासी ईगरा जिला जींद आयु 18 साल 6 महीने व मनीष उर्फ अरुण निवासी रईया आयु 19 साल 6 महीने के तौर पर हुई। दोनों आरोपी अपराधिक प्रवृत्ति के लोगों को सोशल मीडिया के माध्यम से फॉलो कर रहे हैं। जिन्होंने उनसे प्रभावित होकर इस वारदात को अंजाम दिया। दोनों के मोबाइल फोन बरामद किए जा चुके हैं। आरोपियों को दो दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया। अभी तक की जांच में यह सामने आया है कि आरोपी मनीष का पहले से ही शिकायतकर्ता के साथ पैसों का लेनदेन था। आरोपी मनीष ने शिकायतकर्ता से 10 हजार रुपए ले रखे थे। इसके बदले में दोनों ने आपस में अपने फोन बदल लिए थे। परंतु शिकायतकर्ता उससे और पैसों की मांग कर रहा था। इस रंजिश को मन में रखते हुए आरोपी मनीष ने इस वारदात कौ अंजान दिया। आरोपियों से वारदात में प्रयोग किए गए दो मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। जिनके खिलाफ आगामी कार्रवाई करते हुए अदालत झज्जर में पेश करके न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
अपील:-आमजन अपने बच्चों का ध्यान रखे बीच-बीच में बच्चों के बैग चेक करते रहें। कहीं आपका बच्चा कोई नशीले पदार्थ का सेवन तो नहीं कर रहा या फिर किसी प्रकार का हथियार तो नहीं ले रहा। कुछ नवयुवक सोशल मीडिया पर अपराधियों के झांसे में आकर भटक जाते हैं। इसलिए परिजनों की यह जिम्मेवारी बनती है कि बच्चों को ऐसी गतिविधियों से दूर रखें। क्योंकि ऐसा करने पर बच्चे क्राइम की ओर आकर्षित हो जाते हैं। अभिभावक बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखें ताकि उन्हें अपराध से दुर रखा जा सके। युवा पीढ़ी अपना ध्यान खेल कूद व पढ़ाई पर केंद्रित करें और खिलाड़ियों को अपना रोल माडल बनाए ना कि अपराधी को। अपराध की जिंदगी बहुत छोटी और तनावपूर्ण होती है। अपराधी की जहा समाज में कोई इज्जत नहीं होती वहीं उनके परिजनों को भी समाज में अच्छे नजरिए से नहीं देखा जाता। अपराधी का जीवन अंधकार मय होता है इसलिए युवाओं को सही मार्ग पर चलकर अपने जीवन को उज्जवल बनाना चाहिए और अपने माता-पिता की समाज में इज्जत बनानी चाहिए ताकि माता-पिता गर्व से कह सके कि यह मेरी संतान है। इसलिए अपराध से दूर रहे और एक शांत मय जीवन जिए।

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