भारी बारिश के बीच झज्जर जिला प्रशासन मुस्तैद, एसडीआरएफ की टीमें राहत में जुटी

विशेष संवाददाता चिमन लाल

डीसी ने प्रभावित क्षेत्रों व मुंगेशपुर ड्रेन का नाव के जरिये लिया जायजा

बहादुरगढ़,

जिले में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण उत्पन्न परिस्थितियों में नागरिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट मोड में है। एसडीआरएफ की टीम जिला प्रशासन के साथ जलभराव वाले क्षेत्रों में राहत कार्य में जुटी है और नागरिक सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है। डीसी स्वप्निल रविंद्र पाटिल स्वयं फील्ड में मौजूद हैं और जल निकासी के कार्यों की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। बुधवार सुबह डीसी ने जिले में जलभराव वाले क्षेत्रों में पैदल व नाव से निरीक्षण कर ग्राउंड लेवल पर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने बहादुरगढ़ के मुंगेशपुर ड्रेन का भी नाव में सवार होकर निरीक्षण किया और अधिकारियों के साथ मिलकर स्थिति का जायजा लेते हुए जल निकासी और राहत कार्यों को लेकर अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। डीसी ने कहा कि सभी संबंधित विभागों को हाई अलर्ट पर रखा गया है, और जलभराव की समस्या से प्रभावित क्षेत्रों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। मंगेशपुर ड्रेन के क्षतिग्रस्त हिस्से को दुरुस्त करने के लिए एसडीएम बहादुरगढ़ नसीब कुमार की निगरानी में एसडीआरएफ और हरियाणा व दिल्ली की सिंचाई विभाग की टीमें संयुक्त रूप से कार्य कर रही हैं।
डीसी ने कहा कि भारी बारिश के कारण जिले में उत्पन्न स्थिति को देखते हुए प्रशासन पूरी गंभीरता के साथ कार्य कर रहा है। हमारा लक्ष्य है कि नागरिकों को इस प्राकृतिक आपदा के कारण कम से कम असुविधा हो। एसडीआरएफ की टीम राहत कार्य में लगी हुई हैं और मुंगेशपुर, ड्रेन नंबर 8 कुछ स्थानों पर ओवरफ्लो है व कुछ स्थानों पर ज्यादा पानी आने के कारण टूट गई हैं। टीमों द्वारा स्थिति को काबू में किए जाने के पूरे प्रयास जारी हैं। उन्होंने कहा कि सभी विभागों को समन्वय के साथ कार्य करने और त्वरित कार्रवाई करने के लिए निर्देशित किया गया है। इस दौरान नगर परिषद चेयरपर्सन प्रतिनिधि रमेश राठी, परनाला के सरपंच अशोक कुमार भी मौजूद रहे।

ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल 10 सितंबर तक खुला, खराब फसल का दावा करें किसान

डीसी ने कहा कि हरियाणा सरकार ने खरीफ 2025 फसल क्षति के लिए ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल 10 सितंबर तक खोला है। भारी बारिश और जलभराव से प्रभावित झज्जर जिले के किसान पोर्टल पर अपनी फसल नुकसान की जानकारी दर्ज कर सकते हैं। दावों के सत्यापन के बाद निर्धारित मुआवजा प्रदान किया जाएगा। डीसी ने किसानों से अपील की कि वे समय रहते पोर्टल पर दावा दर्ज करें।

युद्ध स्तर पर जल निकासी के प्रयास

डीसी ने बताया कि जिला प्रशासन ने जलभराव की समस्या से निपटने के लिए एक व्यापक एक्शन प्लान तैयार किया है। उन्होंने बताया कि सिंचाई विभाग को विशेष रूप से इस कार्य में तेजी लाने के लिए कहा गया है। विभाग द्वारा युद्ध स्तर पर जल निकासी के कार्य किए जा रहे हैं, और उन सभी क्षेत्रों में विशेष ध्यान दिया जा रहा है जहां जलभराव की स्थिति गंभीर है। अतिरिक्त पंपिंग स्टेशनों को सक्रिय किया गया है, और आवश्यक स्थानों पर अतिरिक्त पंपों की व्यवस्था की गई है।

नागरिकों के लिए कंट्रोल रूम और हेल्पलाइन नंबर

प्रशासन ने नागरिकों की सुविधा के लिए जिला स्तर पर बाढ़ नियंत्रण कक्ष स्थापित किया है, जहां से लोग किसी भी प्रकार की जानकारी और सहायता प्राप्त कर सकते हैं। डीसी ने बताया कि बाढ़ नियंत्रण कक्ष का हेल्पलाइन नंबर 01251-254270 है। इसके अतिरिक्त, सिंचाई विभाग ने भी अपना अलग बाढ़ नियंत्रण कक्ष सक्रिय किया है, जिसका हेल्पलाइन नंबर 01251-481707 है। डीसी ने नागरिकों से अपील की कि वे किसी भी आपात स्थिति में इन हेल्पलाइन नंबरों पर संपर्क करें। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि प्रशासन 24×7 नागरिकों की सहायता के लिए तत्पर है और किसी भी प्रकार की शिकायत या समस्या का त्वरित समाधान किया जाएगा। डीसी ने यह भी स्पष्ट किया कि बारिश की स्थिति पर निरंतर नजर रखी जा रही है, और मौसम विभाग के पूर्वानुमानों के आधार पर आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे जलभराव वाले क्षेत्रों में अनावश्यक रूप से न जाएं और प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन करें। जल निकासी की प्रक्रिया में कोई बाधा न आए।

गांवों ठीकरी पहरा व ग्रामीणों के साथ गश्त लगाने के आदेश

जिले में भारी बारिश के मौसम में सार्वजनिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए डीसी स्वप्निल रविंद्र पाटिल ने बीते रोज पंजाब स्मॉल टाउन पैट्रोल एक्ट, 1918 की धारा 3 के तहत, सभी ग्राम पंचायतों को नहरों, नालों, पुलों, रिंग बांध, सुरक्षा बांध, कलवर्ट्स, रेलवे ट्रैक, सड़कों, बिजली-टेलीफोन लाइनों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, जलघर और अन्य सरकारी भवनों की सुरक्षा के कार्य में ग्रामीणों का सहयोग लेने की अनुमति दी है। ग्राम पंचायतें गांवों के सक्षम वयस्क पुरुषों की मदद से संवेदनशील स्थानों पर दिन-रात गश्त सुनिश्चित करेंगी।

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