विशेष संवाददाता चिमन लाल
साइबर अपराध घटित होने पर तुंरत साइबर हेल्पलाइन 1930 व नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल पर https//www.cybercrime.gov.in पर करे शिकायत दर्ज
रोहतक
रोहतक पुलिस द्वारा अपने अधिकार क्षेत्र मे स्कूली छात्र/छात्रो, कोचिंग संस्थानो व आमजन को साइबर अपराध पर रोक लगाने व आमजन को साइबर अपराध घटित होने के तरीके बारे जागरूक किया जा रहा है। जिला रोहतक मे स्थित थाना मे स्थापित साइबर हैल्प डेस्क की टीमो ने अपने-2 एरिया मे आमजन को साइबर अपराध बारे जागरूक किया गया। थाना कलानौर, थाना लाखनमाजरा व थाना बहुअकबरपुर की टीम ने आमजन व स्कूली छात्र/छात्रो को साइबर अपराध के प्रति जागरूक किया गया। साइबर हेल्प पुलिस टीम ने कहा कि डिजिटल क्रांति के इस युग में हमारा ज्यादातर काम ऑनलाइन हो गया है या फिर हम अपने मनोरंजन के लिए इंटरनेट यूज करते रहते है। इस डिजिटल युग में सक्रिय साईबर अपराधी साइबर अपराध करने के नए-नए तरीके अपना रहे है। साइबर अपराधियों द्वारा जाल मे फंसाने के लिए आसान तरीके से पैसे कमाने का लालच दिया जाता है। उससे अपने अकाउंट में पैसे डलवाए जाते हैं और पैसे जब तक सैकड़ों में होते हैं तो कमीशन जोड़कर वापस देते हैं। लेकिन जैसे ही रकम हजारों में चली जाती है तो ठगों द्वारा ठगना शुरू कर दिया जाता है। पुलिस टीम ने बताया कि ठगों द्वारा आसान तरीके से पैसे कमाने के मैसेज के साथ एक लिंक भेजा जाता है। जैसे लिंक पर क्लिक किया जाता है तो वाट्सएप पर मैसेज आता है। फिर उसके वाट्सएप पर लिंक भेजकर उसपर क्लिक करके रजिस्टर्ड होने के लिये उकसाया जाता है। व्यक्ति द्वारा जैसे ही रजिस्ट्रेशन किया जाता है तो उसके अकाउंट में 100 रुपये भेजे जाते हैं। उसके बाद उसे कहा जाता है कि अगर वह आगे भी उनका बताया टास्क पूरा करेंगे तो उन्हें कमीशन के तौर पर पैसे मिलेंगे। जब व्यक्ति ठगों के अकाउंट में और रुपए भेजता है तो उसके खाते में और ज्यादा रुपए आते हैं। इस प्रकार शुरुआत मे ठग थोडे-थोडे करके उसके पास रुपये भेजते हैं लेकिन बाद मे उसके साथ ठगी का खेल खेला जाता है और उसके खाते से लाखो रुपये हड़प लिये जाते हैं।
आगे छात्र/छात्राओ को ठगी के तरीके बारे बताते हुये कहा कि जालसाज आपको पोस्ट/कोरियर/ई-मेल के द्वारा पत्र या स्क्रैच कार्ड भेजते है। जिसमे लिखा होता है कि आपने उच्च मूल्य जैसे कि कार, मोटरसाईकिल या इलेक्ट्रॉनिक्स आदि का इनाम जीता है। जालसाज द्वारा पत्र मे आपको एक फोन नम्बर दिया होता है जिस पर कॉल करने के लिए कहा जाता है या एक नकली वेबसाइट पर निर्देशित किया जाता है। जालसाज आपको एक वेबसाइट पर भी आकर्षित कर सकते है जो ई-कॉमर्स वेबसाइट के समान दिखाई देती है या आपको एक नकली या मनगढ़ंत प्रमाण पत्र भेज सकते है। जालसाज खुद को कर्मचारी या संदर्भित ई-कॉमर्स कंपनी के सदस्य होने का दावा करते हैं और प्रमाण के रूप में नकली पहचान पत्र दिखा सकते हैं। जालसाज द्वारा व्यक्तिगत जानकारी और जमा शुल्क (कोरियर शुल्क, कर, सीमा शुल्क, शिपिंग, आदि) की मांग लाटरी के ईनाम की एक्सपायरी डेट का हवाला देकर की जाती है। इस राशि को नकद में या स्कैमर्स द्वारा नियंत्रित बैंक खातों में किए जाने की मांग की जाती है और जालसाज गलत तरीके से पैसे हङप लेते है और बाद में फरार हो जाते हैं।
सावधानी
1 बैंक खातों, क्रेडिट कार्ड, फोन या ईमेल भेजने वाले को अपनी व्यक्तिगत/निजी जानकारी का खुलासा न करें क्योंकि इससे पहचान की चोरी हो सकती है।
2 संदिग्ध ई-मेल का जवाब न दें या संदेहास्पद लिंक पर क्लिक ना करें क्योंकि वे मैलवेयर या वायरस हो सकता है। कभी भी जालसाज द्वारा भेजे गए ऑनलाइन फ़ॉर्म को न भरे।
3 लॉटरी की राशि लेने के लिए कभी किसी को अग्रिम (एडवांस) शुल्क न दें। कोई आपसे अग्रिम शुल्क की मांग नहीं करेगा यदि आप मनी लॉटरी की राशि प्राप्त करते हैं।
4 याद रखें यदि आपने लाटरी मे भाग नहीं लिया है तो आप कभी भी लॉटरी नहीं जीत सकते है।
अगर आपके साथ किसी भी प्रकार का साइबर अपराध हो जाता है या आप किसी ऑनलाइन ठगी का शिकार हो जाते हैं तो बिना किसी देरी के जल्द से जल्द इसकी शिकायत नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल https://www.cybercrime.gov.in, साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930, डायल 112 व साइबर थाना रोहतक और नजदीकी पुलिस थाना/चौकी में सूचना दें।