सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बंगाल सरकार को 5 बड़े झटके

I-पैक छापेमारी मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई.।इस दौरान अदालत ने इस बात को माना कि केंद्रीय जांच एजेंसी के कामकाज में राज्य ने दखल देने की कोशिश की. सुनवाई के दौरान ईडी की तरफ से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि इस मामले में मुख्यमंत्री स्वयं आरोपी हैं, जबकि पश्चिम बंगाल के डीजीपी ने सहयोगी की भूमिका निभाई. क्यों कि दफ्तर से फाइलें और दस्तावेज चोरी करने का काम खुद सीएम ममता बनर्जी से किया।इस मामले में अदालत भी ममता सरकार पर सख्त नजर आई. इसे ममता सरकार के लिए बड़े झटके के तौर पर देखा जा रहा है।

जांच एजेंसी के काम में दखल हुआ, 2 हफ्ते में जवाब दे ममता सरकार, सुप्रीम आदेश | I-PAC बवाल कथा

सुप्रीम कोर्ट से ममता बनर्जी सरकार को 5 बड़े झटके

  1. कोलकाता में ईडी रेड के दौरान आई-पीएसी ऑफिस में सीएम ममता बनर्जी और पुलिस प्रशासन अधिकारियों के जाने और फाइलें आदि ले जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने माना कि जांच एजेंसी के काम में दखल हुआ. दरअसल सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि ईडी के अधिकारियों को छापे वाली जगह पर कुछ दस्तावेजों के बारे में सूचना मिली थी, जो जांच के दायरे में हैं. स्थानीय पुलिस को छापेमारी की जानकारी दी गई थी, लेकिन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गैरकानूनी तरीके से छापे की जगह पहुंचकर दस्तावेजों की चोरी की।
  2. सुप्रीम कोर्ट ने ईडी अधिकारियों पर दर्ज चार एफआईआर की कार्यवाही पर रोक लगा दी. कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार की एजेंसियों को केंद्रीय जांच में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है. यह मामला देश में कानून के शासन और संवैधानिक संस्थाओं के स्वतंत्र कामकाज पर गंभीर सवाल उठाता है।
  3. सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल पुलिस प्रशासन और ममता सरकार से जवाब तलब किया है. इस मामले में कोर्ट ने सरकार और राज्य पुलिस अधिकारियों को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
  4. बंगाल डीजीपी राजीव कुमार और कोलकाता पुलिस कमिश्नर मनोज वर्मा के सस्पेंशन की मांग पर केंद्रीय गृह मंत्रालय और ममता सरकार से राय मांगी गई है.
  5. सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल में पुलिस प्रशासन को घटनास्थल से जुड़े सीसीटीवी सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने कहा कि सभी CCTV फुटेज और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज़ को सुरक्षित रखा जाए, ताकि आगे की सुनवाई में कोई साक्ष्य प्रभावित न हों।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट टिप्पणी की कि ED के पास चुनावी कार्यों या पार्टी गतिविधियों में दखल देने का कोई अधिकार नहीं है, इसके साथ ही राज्य सरकार की एजेंसियों को भी केंद्रीय जांच में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है.कोर्ट ने अपने आदेश में ED की उस दलील को भी रिकॉर्ड में लिया कि टीएमसी के लीगल सेल ने 9 जनवरी को हाईकोर्ट में भीड़ जुटाने के लिए व्हाट्सऐप मैसेज भेजे, जिसकी वजह से कोर्ट परिसर में अव्यवस्था जैसी स्थिति पैदा हुई. SG तुषार मेहता ने इसे गंभीर मसला बताते हुए कहा कि इस गतिविधि में राज्य के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की भी भूमिका है, सुप्रीम कोर्ट इसकी जांच करे।

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