सुप्रीम कोर्ट में कुलदीप सिंह सेंगर की जमानत याचिका खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार 9 फरवरी को उन्नाव बलात्कार मामले से जुड़े पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के केस में पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को कोई तत्काल राहत नहीं दी. अदालत ने दिल्ली हाई कोर्ट से अनुरोध किया कि सेंगर की दोषसिद्धि और 10 साल की सजा के खिलाफ अपील को “नियमों से बाहर” यानी प्राथमिकता पर सुनवाई की जाए। साथ ही, मामले का फैसला तीन महीने के अंदर कर दिया जाए।

पीड़िता की तरफ से वकील महमूद प्राचा ने बताया कि उनकी अपील में सेंगर की सजा को आईपीसी की धारा 304 (गैर-इरादतन हत्या) से धारा 302 (हत्या) में बदलकर आजीवन कारावास करने की मांग की गई है. सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि पीड़िता की यह अपील सेंगर की अपील के साथ ही सुनी जाए.

सेंगर के वकील ने तर्क दिया कि तय समय की सजा वाले मामलों में अपील लंबित रहते सजा निलंबित करना सामान्य है. लेकिन बेंच ने ध्यान दिलाया कि सेंगर उन्नाव बलात्कार के अलग केस में पहले से आजीवन कारावास की सजा काट रहा है. जस्टिस बागची ने पूछा, “अगर आप किसी दूसरे अपराध में उम्रकैद काट रहे हैं, तो क्या यह सजा निलंबन के लिए प्रासंगिक नहीं है?”

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने वकील महमूद प्राचा से नाराजगी जताई, क्योंकि उन्होंने मामले पर मीडिया से बात की थी. CJI ने कहा कि हम इस केस में चल रहे मीडिया ट्रायल से वाकिफ हैं, जिसे हम बर्दाश्त नहीं करते. अगर आप वकील हैं तो मीडिया से बात करने का कोई हक नहीं है. मुख्य न्यायाधीश के तौर पर मैं यह सब सहन नहीं कर सकता।

यह मामला 2017 के उन्नाव बलात्कार कांड से जुड़ा है, जहां एक नाबालिग लड़की पर सेंगर पर आरोप लगा था. 2018 में कोर्ट सुनवाई के दौरान पीड़िता के पिता पर हमला हुआ, उन्हें हथियार एक्ट में गिरफ्तार किया गया और हिरासत में उनकी मौत हो गई. सेंगर को इस मौत के केस में 10 साल की सजा हुई है, जबकि बलात्कार केस में उम्रकैद है।

सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट से तेज सुनवाई की अपील की है, ताकि न्याय जल्द मिल सके. यह फैसला पीड़िता परिवार के लिए उम्मीद की किरण है, जहां सजा बढ़ाने की मांग लंबित है।

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