कार्तिक मास का यह पवित्र पर्व हर साल की तरह इस बार भी बेहद शुभ योग में मनाया जाएगा। इस दिन देवी तुलसी और भगवान शालिग्राम का दिव्य मिलन होता है, जिसे “देवशादी” कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन जो व्यक्ति तुलसी विवाह का आयोजन करता है, उसे दांपत्य जीवन में सुख-शांति और समृद्धि प्राप्त होती है।
तुलसी विवाह का शुभ मुहूर्त
तिथि प्रारंभ: 2 नवंबर (रविवार), सुबह 7:31 बजे से
तिथि समाप्त: 3 नवंबर (सोमवार), सुबह 5:07 बजे तक
शुभ विवाह मुहूर्त: शाम 5:35 बजे से 7:13 बजे तक
इस बार तुलसी विवाह सर्वार्थ सिद्धि योग और त्रिपुष्कर योग में पड़ रहा है, जो इसे और भी शुभ बनाता है।
त्रिपुष्कर योग: सुबह 7:31 बजे से शाम 5:03 बजे तक
सर्वार्थ सिद्धि योग: शाम 5:03 बजे से पूरी रात तक
इन योगों में किया गया तुलसी विवाह हर मनोकामना को पूर्ण करने वाला माना गया है।
तुलसी विवाह के लिए आवश्यक पूजा सामग्री
यदि आप इस साल अपने घर पर तुलसी विवाह का आयोजन कर रहे हैं, तो पूजा सामग्री पहले से तैयार कर लें ताकि किसी तरह की कमी न रह जाए।
- भगवान शालिग्राम की मूर्ति या शालिग्राम शिला
- तुलसी का पौधा (सुंदर और हरा-भरा)
- लाल चुनरी और पीला कपड़ा या धोती
- अक्षत, सिंदूर, कुमकुम, कच्चा सूत
- पंचामृत, शहद, गाय का घी
- मूली, गन्ना, और मौसमी फल जैसे अमरूद, आंवला, शकरकंद, सिंघाड़ा, सीताफल
- फूल और फूलों की माला
- मिट्टी के दीये, रुई की बाती
- 16 श्रृंगार का सामान
तुलसी विवाह कथा, तुलसी चालीसा, विष्णु सहस्रनाम, तुलसी विवाह मंगलाष्टक आदि पुस्तकें
तुलसी विवाह का महत्व
हिंदू परंपरा के अनुसार, तुलसी विवाह का आयोजन करने से जीवन में शुभता और समृद्धि आती है। माना जाता है कि जो लोग तुलसी जी और भगवान शालिग्राम का विवाह करवाते हैं, उनके घर में सदैव सुख-शांति बनी रहती है।
जिनके विवाह में देरी हो रही है, उनके लिए तुलसी विवाह का आयोजन अत्यंत शुभ माना गया है। यह पूजा पति-पत्नी के बीच प्रेम और सामंजस्य बढ़ाती है।
तुलसी विवाह के आयोजन से वैवाहिक जीवन की समस्याएं समाप्त होती हैं। यह आध्यात्मिक और पारिवारिक समृद्धि का प्रतीक है।
तुलसी विवाह का शुभ मुहूर्त
तिथि प्रारंभ: 2 नवंबर (रविवार), सुबह 7:31 बजे से
तिथि समाप्त: 3 नवंबर (सोमवार), सुबह 5:07 बजे तक
शुभ विवाह मुहूर्त: शाम 5:35 बजे से 7:13 बजे तक
इस बार तुलसी विवाह सर्वार्थ सिद्धि योग और त्रिपुष्कर योग में पड़ रहा है, जो इसे और भी शुभ बनाता है।
त्रिपुष्कर योग: सुबह 7:31 बजे से शाम 5:03 बजे तक
सर्वार्थ सिद्धि योग: शाम 5:03 बजे से पूरी रात तक
इन योगों में किया गया तुलसी विवाह हर मनोकामना को पूर्ण करने वाला माना गया है।
तुलसी विवाह के लिए आवश्यक पूजा सामग्री
यदि आप इस साल अपने घर पर तुलसी विवाह का आयोजन कर रहे हैं, तो पूजा सामग्री पहले से तैयार कर लें ताकि किसी तरह की कमी न रह जाए।
- भगवान शालिग्राम की मूर्ति या शालिग्राम शिला
- तुलसी का पौधा (सुंदर और हरा-भरा)
- लाल चुनरी और पीला कपड़ा या धोती
- अक्षत, सिंदूर, कुमकुम, कच्चा सूत
- पंचामृत, शहद, गाय का घी
- मूली, गन्ना, और मौसमी फल जैसे अमरूद, आंवला, शकरकंद, सिंघाड़ा, सीताफल
- फूल और फूलों की माला
- मिट्टी के दीये, रुई की बाती
- 16 श्रृंगार का सामान
तुलसी विवाह कथा, तुलसी चालीसा, विष्णु सहस्रनाम, तुलसी विवाह मंगलाष्टक आदि पुस्तकें
तुलसी विवाह का महत्व
हिंदू परंपरा के अनुसार, तुलसी विवाह का आयोजन करने से जीवन में शुभता और समृद्धि आती है। माना जाता है कि जो लोग तुलसी जी और भगवान शालिग्राम का विवाह करवाते हैं, उनके घर में सदैव सुख-शांति बनी रहती है।
जिनके विवाह में देरी हो रही है, उनके लिए तुलसी विवाह का आयोजन अत्यंत शुभ माना गया है। यह पूजा पति-पत्नी के बीच प्रेम और सामंजस्य बढ़ाती है।
तुलसी विवाह के आयोजन से वैवाहिक जीवन की समस्याएं समाप्त होती हैं। यह आध्यात्मिक और पारिवारिक समृद्धि का प्रतीक है।