नई दिल्ली, 12 अगस्त 2026
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए कुख्यात ड्रग तस्कर को प्रिवेंटिव डिटेंशन कानून के तहत निरुद्ध किया है।
एच जी एस धालीवाल, स्पेशल कमिश्नर ऑफ पुलिस, क्राइम ब्रांच के अनुसार, अपराधी की पहचान धर्मवीर सिंह उर्फ पल्ला पुत्र फूल सिंह, निवासी जे.जे. कॉलोनी, इंद्रपुरी, दिल्ली, उम्र 51 वर्ष के रूप में हुई है। आरोपी के खिलाफ PITNDPS एक्ट, 1988 की धारा 3(1) के तहत निवारक निरोध का आदेश जारी किया गया है।
दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की WR-II यूनिट ने आरोपी की लगातार नशा तस्करी में सक्रिय संलिप्तता को देखते हुए उसके खिलाफ निवारक निरोध का प्रस्ताव तैयार किया था। इस प्रस्ताव को भारत सरकार के वित्त मंत्रालय, राजस्व विभाग के PITNDPS डिवीजन को भेजा गया था।
सामग्री और तथ्यों पर विचार करने के बाद डिटेनिंग अथॉरिटी ने 26 फरवरी 2026 को धर्मवीर उर्फ पल्ला के खिलाफ निवारक निरोध का आदेश जारी किया। आदेश के तहत आरोपी को सेंट्रल जेल, पुज्हल, चेन्नई, तमिलनाडु में निरुद्ध किए जाने का निर्देश दिया गया।
बीते 10 अगस्त 2026 को हेड कांस्टेबल रविंद्र सिंह और हेड कांस्टेबल प्रमोद कुमार को आरोपी के फतेह नगर में छिपे होने की गुप्त सूचना मिली। सूचना पर एसीपी राजपाल डाबस के पर्यवेक्षण में इंस्पेक्टर सतीश मलिक के नेतृत्व में एसआई अनुज छिकारा, एसआई प्रदीप दहिया, हेड कांस्टेबल प्रमोद कुमार और हेड कांस्टेबल रविंद्र की टीम ने तुरंत कार्रवाई की।
एसआई अनुज छिकारा ने तकनीकी निगरानी के जरिए उसकी लोकेशन ट्रेस की और आरोपी को फतेह नगर से गिरफ्तार कर लिया। कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उसे निरोध आदेश के तहत हिरासत में ले लिया गया। अब उसे नशे की सप्लाई चेन तोड़ने के लिए चेन्नई की पुज्हल जेल में शिफ्ट किया जा रहा है।
यह पूरा ऑपरेशन डीसीपी क्राइम ब्रांच हर्ष इंदौरा, आईपीएस और जॉइंट सीपी क्राइम ब्रांच सुरेंद्र कुमार, आईपीएस के समग्र पर्यवेक्षण में अंजाम दिया गया।
पूछताछ में सामने आया कि आरोपी धर्मवीर का जन्म 1975 में इंद्रपुरी में सांसी समुदाय में हुआ था। उसका पिता फूल सिंह भी अवैध शराब का धंधा करता था और इंद्रपुरी थाने का बीसी था। धर्मवीर अनपढ़ है और शुरू में पारिवारिक अवैध शराब के धंधे में लगा। 1994 में शादी के बाद उसने दिल्ली में अवैध गांजा सप्लाई शुरू कर दी। अपनी अवैध गतिविधियों पर पर्दा डालने के लिए उसने इंद्रपुरी में केबल ऑपरेटर का काम शुरू किया।
पुलिस के अनुसार, वह धीरे-धीरे दिल्ली का ड्रग लॉर्ड बन गया। उसका गांजा दक्षिण भारत से दिल्ली तस्करी कर लाया जाता था और वह अपनी बिरादरी के कई लोगों को सप्लाई करता था।
आरोपी का आपराधिक इतिहास लंबा है। उसके खिलाफ पहले से कई मामले दर्ज हैं ।आरोपी 2020 से लगातार सक्रिय था, जमानत पर बाहर था और PITNDPS की कार्रवाई से बचने के लिए लगातार अपना ठिकाना बदल रहा था।
पुलिस का कहना है कि सामान्य आपराधिक कानून आरोपी को रोकने में नाकाम रहे थे। समाज में उसकी मौजूदगी जन स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। इसलिए संगठित और आदतन तस्करों के लिए बने विशेष कानून PITNDPS एक्ट के तहत उसे निरुद्ध करना जरूरी हो गया था। यह कानून आम कानूनों का विकल्प नहीं, बल्कि संगठित ड्रग नेटवर्क को खत्म करने के लिए एक अतिरिक्त कानूनी हथियार है।