दिल्ली पुलिस ने ‘ऑपरेशन साय-हॉक’ के दौरान 600 से अधिक लोगों को किया गिरफ्तार,8,300 से अधिक संदिग्धों को हिरासत में लिया

दिल्ली पुलिस ने ‘ऑपरेशन साय-हॉक’ के दौरान 600 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है और 8,300 से अधिक संदिग्धों को हिरासत में लिया है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी। संयुक्त पुलिस आयुक्त (आईएफएसओ) रजनीश गुप्ता ने यहां पत्रकारों को बताया कि गिरफ्तार किए गए लोगों में दिल्ली स्थित एक मशहूर रेस्तरां शृंखला के मालिक का बेटा भी शामिल है।

उन्होंने कहा, ”व्यापार में घाटे के कारण, इस विशेष मामले में प्रसिद्ध रेस्तरां शृंखला के मालिक के बेटे ने कमीशन के आधार पर अपना बैंक खाता उपलब्ध कराया था, जिसमें उसे तीन प्रतिशत कमीशन मिलता था। चूंकि उसने अपने बैंक खाते की ‘यूजर आईडी’ और ‘पासवर्ड’ साझा किया था, इसलिए चोरी या ठगी का पैसा उसी खाते के माध्यम से निकाला गया। इस मामले में हमने आरोपी को गिरफ्तार किया है और आगे की जांच जारी है।”

अधिकारी ने कहा कि ‘ऑपरेशन साय-हॉक’ का उद्देश्य राष्ट्रीय राजधानी में सक्रिय संगठित साइबर अपराध गिरोह की वित्तीय रीढ़ और परिचालन तंत्र को निशाना बनाना था।

उन्होंने बताया कि छह से सात अप्रैल को चलाए गए ‘ऑपरेशन साय-हॉक 4.0’ के तहत पुलिस की विभिन्न शाखाओं एवं इकाइयों के करीब 5,000 कर्मियों को तैनात किया गया।

गुप्ता के मुताबिक, इस दौरान चिह्नित हुए ‘म्यूल खाते’ राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर दर्ज 3,564 शिकायतों से संबंधित थे, जिनके माध्यम से तकरीबन 520 करोड़ रुपये की ठगी की गई थी।

गुप्ता ने कहा कि विभिन्न जिलों में एक साथ की गई समन्वित छापेमारी के दौरान पूछताछ और सत्यापन के लिए कुल 8,371 लोगों को हिरासत में लिया गया, 667 लोगों को गिरफ्तार किया गया एवं 752 लोगों को पाबंद किया गया।

उन्होंने बताया कि इसके अलावा, ऐसे अपराधों से जुड़ी वित्तीय शृंखला का हिस्सा होने के संदिग्ध 2,203 व्यक्तियों को नोटिस जारी किए गए।

गुप्ता ने बताया कि इस अभियान के तहत चिह्नित साइबर जालसाजों के खिलाफ 499 नई प्राथमिकी भी दर्ज की गईं और जांचकर्ता नए मामलों के अलावा साइबर धोखाधड़ी के पहले से लंबित 324 मामलों को सुलझाने में सफल रहे। उन्होंने बताया कि अभियान के दौरान जुटाए गए डिजिटल और वित्तीय सबूतों के आधार पर कई आरोपियों को पकड़ा गया।

संयुक्त आयुक्त ने बताया कि अभियान के दौरान ठगी के पैसे हासिल करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले ‘म्यूल’ बैंक खातों (ऐसे खाते जो कमीशन पर दिए जाते हैं) को उपलब्ध कराने वालों एवं इनसे पैसा निकालने वाले को पकड़ा गया।

अधिकारी ने कहा, “कार्रवाई के तहत दिल्ली के विभिन्न हिस्सों में चल रहे कई अवैध कॉल सेंटर की पहचान कर उन्हें बंद कर दिया गया। इससे नौकरी के फर्जी प्रस्ताव, ‘डिजिटल अरेस्ट’, टेलीमार्केटिंग के माध्यम से ठगी और ग्राहक सहायताकर्मी बनकर की जाने वाली ठगी पर रोक लगी।”

उन्होंने बताया कि कई स्थानों पर की गई छापेमारी में मोबाइल फोन, लैपटॉप, हार्ड ड्राइव, सिम कार्ड, डेबिट और क्रेडिट कार्ड के साथ-साथ वित्तीय रिकॉर्ड और बही-खातों सहित भारी मात्रा में आपत्तिजनक डिजिटल सबूत बरामद हुए हैं।

यह अभियान गृह मंत्रालय के तहत भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र के सहयोग से चलाया गया था। भाषा नोमान सुरेश

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