पहाड़गंज में एमसीडी के करोलबाग जोन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल, बिना लाइसेंस धड़ल्ले से चल रहा THE BOSS GUEST HOUSE

अवैध निर्माण, पार्किंग की जगह दुकानें और अग्नि सुरक्षा नियमों की अनदेखी के आरोप, नोटिस और चालान तक सीमित कार्रवाई से निगम अधिकारियों की भूमिका संदेह के घेरे में

नई दिल्ली। 30 अक्तूबर 2026: राजधानी दिल्ली के पहाड़गंज इलाके में अवैध रूप से संचालित हो रहे गेस्ट हाउसों का मामला एक बार फिर दिल्ली नगर निगम के करोलबाग जोन की कार्यप्रणाली और भवन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। नियमों को ताक पर रखकर व्यावसायिक गतिविधियां चलाने वालों के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्हें न तो निगम के भवन निर्माण संबंधी नियमों की परवाह दिखाई देती है और न ही यात्रियों की जान की सुरक्षा की चिंता। ताजा मामला मुल्तानी धंधा, पहाड़गंज स्थित THE BOSS GUEST HOUSE का है, जहां बिना वैध लाइसेंस के गेस्ट हाउस संचालित किए जाने और बड़े पैमाने पर नियमों के उल्लंघन के आरोप सामने आए हैं।

प्राप्त जानकारी और स्थानीय स्तर पर लगाए जा रहे आरोपों के अनुसार THE BOSS GUEST HOUSE, मकान संख्या 8944-45, गली नंबर-1, मुल्तानी धंधा, पहाड़गंज, नई दिल्ली में कथित तौर पर बिना दिल्ली नगर निगम के वैध स्वास्थ्य व्यापार लाइसेंस के गेस्ट हाउस की गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। सबसे गंभीर सवाल इस इमारत के निर्माण और उसके व्यावसायिक इस्तेमाल को लेकर उठ रहे हैं। आरोप है कि जहां तीन मंजिल तक निर्माण की अनुमति बताई जा रही है, वहां चार मंजिल से अधिक निर्माण कराकर लगभग 11 से 12 कमरे तैयार कर दिए गए हैं। यदि यह जानकारी जांच में सही साबित होती है तो यह केवल भवन निर्माण नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि निगम की अनुमति और निगरानी व्यवस्था को खुली चुनौती देने जैसा मामला है।

मामले का दूसरा गंभीर पहलू भवन के भूतल से जुड़ा है। स्थानीय सूत्रों का आरोप है कि जिस स्थान को पार्किंग के लिए आरक्षित रखा जाना चाहिए था, वहां दुकानें बनाकर व्यावसायिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। सवाल यह है कि यदि भवन के स्वीकृत नक्शे में पार्किंग का प्रावधान है तो उस स्थान पर दुकानें किसकी अनुमति से बनाई गईं? क्या निगम के भवन विभाग ने कभी इस निर्माण का निरीक्षण किया? यदि निरीक्षण हुआ तो अनियमितताएं अधिकारियों की नजर से कैसे बच गईं? और यदि निरीक्षण नहीं हुआ तो क्षेत्र में भवन निर्माण की निगरानी करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही कौन तय करेगा?

तीसरा और सबसे चिंताजनक मुद्दा अग्नि सुरक्षा तथा आपातकालीन निकासी का है। आरोप है कि ऊपरी मंजिलों तक पहुंचने के लिए मात्र चार फुट चौड़ा जीना बनाया गया है। किसी भी आगजनी, धुएं या अन्य आपातकालीन स्थिति में इतनी सीमित निकासी व्यवस्था यात्रियों और कर्मचारियों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती है। पहाड़गंज जैसे घनी आबादी और संकरी गलियों वाले इलाके में गेस्ट हाउसों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर किसी भी प्रकार की लापरवाही को सामान्य प्रशासनिक चूक मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। आरोप यह भी है कि संबंधित प्रतिष्ठान के पास दिल्ली अग्निशमन सेवा की आवश्यक अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) उपलब्ध नहीं है। इस तथ्य की आधिकारिक पुष्टि और मौके पर सुरक्षा व्यवस्था की जांच तत्काल आवश्यक है।

हैरानी की बात यह है कि इस पूरे प्रकरण में एमसीडी करोलबाग जोन के स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई भी सवालों के घेरे में बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार विभाग की ओर से नोटिस जारी किया गया और चालान की कार्रवाई की गई, लेकिन इसके बावजूद कथित रूप से गेस्ट हाउस का संचालन जारी है। यदि प्रतिष्ठान वास्तव में बिना आवश्यक लाइसेंस के चल रहा है तो केवल नोटिस जारी कर देना और चालान काट देना क्या पर्याप्त कार्रवाई है? क्या निगम का दायित्व केवल कागजी कार्रवाई पूरी करना है या नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना भी उसकी जिम्मेदारी है?

यहां सबसे बड़ा सवाल दिल्ली नगर निगम के करोलबाग जोन के भवन विभाग और स्वास्थ्य विभाग की भूमिका को लेकर है। भवन में कथित अतिरिक्त मंजिलें कैसे तैयार हुईं? पार्किंग की जगह दुकानों का निर्माण कैसे हुआ? गेस्ट हाउस का संचालन किन दस्तावेजों के आधार पर किया जा रहा है? क्या निगम अधिकारियों ने स्वीकृत भवन नक्शे, निर्माण की स्थिति, लाइसेंस और अग्नि सुरक्षा संबंधी दस्तावेजों की जांच की? यदि अनियमितताएं मौजूद हैं तो अब तक निर्णायक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? इन सवालों का जवाब संबंधित अधिकारियों को सार्वजनिक रूप से देना चाहिए।

यह भी जांच का विषय है कि कहीं नोटिस और चालान जैसी सीमित कार्रवाई के सहारे अवैध गतिविधियों को जारी रहने का अवसर तो नहीं दिया जा रहा। हालांकि किसी अधिकारी की मिलीभगत या भ्रष्टाचार का निष्कर्ष बिना जांच और प्रमाण के नहीं निकाला जा सकता, लेकिन यदि शिकायतों और कथित अनियमितताओं के बावजूद कार्रवाई आगे नहीं बढ़ती तो अधिकारियों की जवाबदेही तय करना अनिवार्य है। निगम प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि संबंधित भवन के निरीक्षण की जिम्मेदारी किन अधिकारियों की थी और निरीक्षण के बाद क्या रिपोर्ट तैयार की गई।

क्षेत्रवासियों की मांग है कि एमसीडी आयुक्त और करोलबाग जोन के उपायुक्त इस मामले का तत्काल संज्ञान लें। भवन विभाग की अलग टीम गठित कर स्वीकृत नक्शे और मौके पर हुए निर्माण का मिलान कराया जाए। स्वास्थ्य विभाग से गेस्ट हाउस के लाइसेंस की स्थिति स्पष्ट कराई जाए तथा दिल्ली अग्निशमन सेवा से अग्नि सुरक्षा संबंधी अनापत्ति प्रमाणपत्र की जांच कराई जाए। नियमों का उल्लंघन प्रमाणित होने पर नियमानुसार सीलिंग, अवैध निर्माण के विरुद्ध कार्रवाई और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।

पहाड़गंज देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों और यात्रियों का प्रमुख ठिकाना है। यहां गेस्ट हाउसों का संचालन कानून और सुरक्षा मानकों के अनुरूप होना चाहिए, न कि मनमाने निर्माण और कथित प्रशासनिक संरक्षण के भरोसे। यदि किसी बड़े हादसे के बाद प्रशासन जागता है तो ऐसी कार्रवाई का कोई औचित्य नहीं रह जाएगा। दिल्ली नगर निगम को यह साबित करना होगा कि कानून केवल आम नागरिकों के लिए नहीं, बल्कि व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और उन्हें नियंत्रित करने वाले अधिकारियों पर भी समान रूप से लागू होता है। अब देखना यह है कि निगम प्रशासन इस मामले में वास्तविक कार्रवाई करता है या फिर एक बार नोटिस और चालान की फाइलों में ही जवाबदेही दफन हो जाती है।

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