बिना अनुमति पेड़ काटने/स्थानांतरण पर होगी सख्त कार्रवाई: उपायुक्त रोहतक सचिन गुप्ता 

विशेष संवाददाता चिमन लाल

रोहतक,

उपायुक्त सचिन गुप्ता ने बताया कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण द्वारा गैर-वन क्षेत्रों में पेड़ों की कटाई एवं स्थानांतरण को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। उक्त आदेश को माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा यथावत रखते हुए अंतिम रूप प्रदान किया गया है। उन्होंने बताया कि उपरोक्त आदेशों के अनुपालन में जिला के सभी विभागों, शैक्षणिक संस्थानों, शहरी स्थानीय निकायों, पंचायतों, सार्वजनिक उपक्रमों एवं भूमि स्वामित्व/प्रबंधन से जुड़े अन्य संस्थानों को निर्देशित किया गया है कि किसी भी प्रकार की पेड़ कटाई अथवा स्थानांतरण से पूर्व संबंधित प्रभागीय वन अधिकारी से पूर्व अनुमति प्राप्त करना अनिवार्य होगा। उन्होंने बताया कि पेड़ काटने अथवा स्थानांतरण से पूर्व संबंधित प्रभागीय वन अधिकारी को आवेदन प्रस्तुत करना होगा, जिसमें भूमि का पूर्ण विवरण (स्वामित्व, कब्जा, स्थान, सीमाएं), स्थल का क्षेत्रफल एवं समन्वय सहित मानचित्र, प्रस्तावित कटाई/स्थानांतरण हेतु पेड़ों की प्रजाति एवं संख्या, पेड़ काटने का स्पष्ट औचित्य/कारण, प्रस्तावित प्रतिपूरक वृक्षारोपण का विवरण एवं चिन्हित भूमि शामिल है। प्रभागीय वन अधिकारी द्वारा स्थल निरीक्षण कर पारिस्थितिकी एवं पर्यावरणीय पहलुओं का परीक्षण करते हुए आवेदन का निपटान किया जाएगा।
उपायुक्त सचिन गुप्ता ने बताया कि अनुमति प्रदान करते समय प्रत्येक काटे गए पेड़ के बदले कम से कम तीन स्वदेशी प्रजातियों के पौधों का रोपण करना अनिवार्य होगा तथा इन पौधों का न्यूनतम पांच वर्षों तक रखरखाव सुनिश्चित करना होगा। बिना अनुमति पेड़ काटने, प्रतिपूरक वृक्षारोपण की शर्तों का पालन न करने अथवा बिना चिन्हित पेड़ों को नुकसान पहुंचाने की स्थिति में संबंधित प्रभागीय वन अधिकारी द्वारा पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति अधिरोपित की जाएगी, जिसमें वन विभाग की दरों के अनुसार लकड़ी का मूल्य, तीन गुना प्रतिपूरक वृक्षारोपण एवं पांच वर्षों तक रखरखाव की लागत शामिल है। उन्होंने बताया कि यह क्षतिपूर्ति राशि भू-राजस्व बकाया के रूप में वसूल की जाएगी तथा इसका उपयोग केवल प्रतिपूरक वृक्षारोपण एवं पारिस्थितिकी पुनर्स्थापन कार्यों के लिए किया जाएगा। जिला प्रशासन ने सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि किसी भी विकासात्मक परियोजना की योजना बनाने से पूर्व वन विभाग से समन्वय स्थापित करना सुनिश्चित करें तथा अधीनस्थ अधिकारियों एवं फील्ड स्टाफ को एनजीटी के दिशा-निर्देशों के प्रति जागरूक किया जाये।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *