नई दिल्ली, 09 जुलाई 2026
मध्य जिला पुलिस के हौज काजी थाने ने आयकर विभाग में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस मामले में आयकर विभाग के पूर्व एमटीएस कर्मचारी समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
रोहित राजवीर सिंह आईपीएस डीसीपी सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट ने बताया कि 18 मई 2026 को हौज काजी थाने में फर्जी सरकारी नौकरी रैकेट की सूचना मिली। अजमेरी गेट निवासी एक शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि नवीन प्रकाश, दीपक तिवारी और रोहित चौहान ने आयकर विभाग में एमटीएस पद दिलाने का झूठा वादा कर उसके साथ ठगी की।
दिसंबर 2025 में आरोपी नवीन प्रकाश ने खुद को आयकर विभाग का कर्मचारी बताकर शिकायतकर्ता को एमटीएस की नौकरी दिलाने का लालच दिया। उसने सह-आरोपी दीपक तिवारी से मिलवाया, जिसने खटीकान मंदिर, अजमेरी गेट पर ₹5,000 नकद लिए और रोहित चौहान के बैंक खाते की जानकारी दी।
झूठे आश्वासनों पर विश्वास कर शिकायतकर्ता ने 22.12.2025 से 31.12.2025 के बीच डिजिटल माध्यम से अपनी पीएफ की पूरी राशि ₹1,98,500 ट्रांसफर कर दी। नकद भुगतान मिलाकर शिकायतकर्ता को कुल ₹2,03,500 का नुकसान हुआ। आरोपियों ने विश्वास जीतने के लिए फर्जी आयकर वेरिफिकेशन फॉर्म का भी इस्तेमाल किया। मार्च 2026 तक झूठे आश्वासन देते रहे, फिर लापता हो गए।
इस पर हौज काजी थाने में 18.05.2026 को एफआईआर संख्या 270/2026, धारा 318(4)/61(2)/3(5) बीएनएस के तहत मामला दर्ज कर जांच इंस्पेक्टर संदीप कालखांडे, एटीओ/हौज काजी को सौंपी गई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए इंस्पेक्टर संदीप कालखांडे के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई। टीम में एसआई अभिषेक, पीएसआई विवेक ग्रेवाल, एचसी मातू राम, कांस्टेबल गणेश, कांस्टेबल हरेंद्र और कांस्टेबल ए.बी. सिंह शामिल थे। पूरी कार्रवाई एसएचओ हौज काजी और एसीपी/कमला मार्केट की देखरेख में हुई।
टीम ने हौज काजी क्षेत्र में कई छापे मारे और गुप्त सूत्र तैनात किए। आरोपियों के फोन कॉल और बैंक खातों का तकनीकी विश्लेषण किया गया। लगातार निगरानी के बाद 03.07.2026 को रोहित चौहान उर्फ दीपक तिवारी, निवासी कमल विहार, करावल नगर, उम्र 37 वर्ष, को रोहिणी से गिरफ्तार किया गया। आगे की जांच में चिराग अग्रवाल उर्फ नवीन प्रकाश और तरुण गोस्वामी उर्फ गिरिराज को गिरफ्तार किया गया, जबकि पवन दत्त शर्मा को पाबंद किया गया।
पूछताछ में रोहित चौहान उर्फ दीपक तिवारी ने अपना जुर्म कबूल किया और गिरोह का तरीका बताया।
उसने बताया कि वह फ्रीलांस प्लेसमेंट एजेंट है और तरुण गोस्वामी, पवन दत्त शर्मा, चिराग अग्रवाल व एक अन्य साथी के साथ मिलकर बेरोजगारों से आयकर विभाग में एमटीएस की नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी की साजिश रची।
आरोपियों ने फर्जी पहचान बनाकर पीड़ितों से संपर्क किया और खुद को आयकर विभाग का वेंडर बताया। सोशल मीडिया पर आयकर विभाग में भर्ती के विज्ञापन देकर बेरोजगार युवाओं को फंसाया।
हर पीड़ित से ₹1 से ₹2 लाख लेकर उनके दस्तावेज लिए गए। सिविक सेंटर स्थित आयकर विभाग के दफ्तर और पार्किंग में फर्जी इंटरव्यू व ओरिएंटेशन कराए गए ताकि भर्ती असली लगे। फर्जी सर्विस बुक और वेरिफिकेशन फॉर्म तैयार किए गए। पीड़ितों को बताया गया कि उनके पहचान पत्र बन रहे हैं। न कोई नियुक्ति पत्र दिया गया, न पहचान पत्र और न ही कोई रसीद।
ठगी की रकम गिरोह के सदस्यों में बांटी गई। जांच में सामने आया कि 6-7 पीड़ितों से करीब ₹10 लाख की ठगी हुई है।
जांच शुरुआती दौर में है। मास्टरमाइंड समेत बाकी आरोपियों की तलाश जारी है। आयकर विभाग के किसी अधिकारी की संलिप्तता से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी, अन्य पीड़ितों की पहचान और पूरे रैकेट की सीमा का पता लगाने के लिए जांच जारी है।