मुख्य बिंदु:-
👉 थाना साइबर वेस्ट ने फर्जी लोन और स्कॉलरशिप के नाम पर ठगी करने वाले संगठित साइबर ठग गिरोह का पर्दाफाश किया।
👉 बैंक खाते व सिम कार्ड उपलब्ध कराने, ठगी की रकम निकालने और कॉलिंग नेटवर्क से समन्वय करने के आरोप में चार आरोपी गिरफ्तार।
👉 12 मोबाइल फोन, 09 कीपैड मोबाइल फोन, दस्तावेज और ₹45,170/- नकद बरामद।
👉 मामले में पांच महिला टेलीकॉलर्स को पाबंद किया गया।
नई दिल्ली: हरेश्वर वी स्वामी डीसीपी वेस्ट डिस्ट्रिक्ट के मुताबिक NCRP पोर्टल और समन्वय पोर्टल पर उपलब्ध साइबर अपराध शिकायतों और वित्तीय ट्रेल के विश्लेषण के दौरान थाना साइबर वेस्ट के स्टाफ ने पश्चिमी जिले में संचालित बैंक खातों से जुड़े संदिग्ध साइबर फ्रॉड के पैटर्न का पता लगाया। पीड़ितों, विशेष रूप से तमिलनाडु और दक्षिण भारत के अन्य हिस्सों के निवासियों को कथित तौर पर स्कॉलरशिप और अन्य वित्तीय लाभ दिलाने के नाम पर पैसे ट्रांसफर करने के लिए प्रेरित किया जाता था।
सत्यापन के दौरान कर्नाटक बैंक, विकासपुरी, दिल्ली में संचालित एक खाता NCRP की तीन शिकायतों से जुड़ा पाया गया। खाते और उससे जुड़े सिम कार्ड की जांच के दौरान पुलिस अमित कपूर तक पहुंची, जो कथित तौर पर खाते को संभालता था और पीड़ितों से प्राप्त धन की निकासी में मदद करता था।
इसी आधार पर थाना साइबर वेस्ट में FIR No. 56/2026 U/s 112(2)/318(4)/317(2)/61(2)/3(5) BNS के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।
राजेश कुमार, ACP/ऑपरेशंस, पश्चिमी जिला के पर्यवेक्षण और अधोहस्ताक्षरी के समग्र पर्यवेक्षण में, थाना प्रभारी/साइबर वेस्ट इंस्पेक्टर विकास कुमार बुलडक के नेतृत्व में SI योगेश, SI अरविंद, HC पवन, HC नरेश और Ct. सुरेंद्र की एक टीम गठित की गई।
वित्तीय ट्रेल के विश्लेषण और निरंतर जांच के माध्यम से टीम ने अमित कपूर, शिवा सिंह चौधरी और एस. गौरव उर्फ अप्पू को गिरफ्तार किया। इनकी कथित भूमिका बैंक खाते और सिम कार्ड की व्यवस्था करने, निकासी की सुविधा देने और ठगी के पैसे के लेन-देन में समन्वय करने की थी।
आगे की जांच में पता चला कि एस. गौरव उर्फ अप्पू कथित तौर पर बैंक खाता उपलब्ध कराने वालों और दक्षिण भारत में पीड़ितों को निशाना बनाने वाले कॉलिंग ऑपरेशन से जुड़े लोगों के बीच कड़ी के रूप में काम करता था।
जांच के दौरान मिले सुरागों पर कार्रवाई करते हुए टीम ने बुधेला, विकासपुरी, दिल्ली में एक परिसर में छापा मारा। वहां पांच महिला टेलीकॉलर्स सहित छह लोग मिले और सिराज अंसारी उर्फ दाऊद, जो कथित तौर पर इस प्रतिष्ठान का प्रबंधन करता था, भी मौजूद था।
परिसर की जांच में मोबाइल फोन, नोटपैड, रजिस्टर और ग्राहकों व संदिग्ध पीड़ितों के विवरण वाले बैंकिंग दस्तावेज बरामद हुए। बरामद सामग्री से लोन और अन्य योजनाओं की आड़ में संदिग्ध कॉलिंग गतिविधियों के संकेत मिले।
जांच के दौरान एकत्र किए गए साक्ष्यों के आधार पर सिराज अंसारी उर्फ दाऊद को बाद में गिरफ्तार कर लिया गया। पांच महिला टेलीकॉलर्स को भी मामले में पाबंद किया गया।
तरीका वारदात (Modus Operandi):-
अब तक की जांच में एक ऐसे नेटवर्क का पता चला है जिसमें अलग-अलग लोगों की कथित तौर पर विशिष्ट भूमिकाएं थीं। पीड़ितों से पैसा प्राप्त करने के लिए बैंक खाते और सिम कार्ड की व्यवस्था कर सप्लाई किए जाते थे, जबकि कॉलिंग ऑपरेशन से जुड़े लोग कथित तौर पर लोन, स्कॉलरशिप और अन्य वित्तीय लाभों के नाम पर पीड़ितों को पैसे ट्रांसफर करने के लिए प्रेरित करते थे।
पैसा प्राप्त करने के लिए बैंक खाते का विवरण, UPI ID और QR कोड कथित तौर पर साझा किए जाते थे। पैसा जमा होने के बाद उसे एटीएम सहित विभिन्न माध्यमों से निकाल लिया जाता था और नकदी नेटवर्क के अन्य लोगों तक पहुंचा दी जाती थी। खातों की व्यवस्था करने, सिम कार्ड सप्लाई करने और धन के लेन-देन में मदद करने के लिए कथित तौर पर कमीशन रखा जाता था।
आरोपियों का विवरण:-
👉 अमित कपूर: बैंक खातों और सिम कार्डों की व्यवस्था और संचालन तथा पीड़ितों से प्राप्त धन की निकासी में कथित रूप से शामिल।
👉 शिवा सिंह चौधरी: बैंक खातों की व्यवस्था में समन्वय करने और निकाली गई रकम को नेटवर्क के अन्य लोगों तक पहुंचाने में कथित रूप से शामिल।
👉 एस. गौरव उर्फ अप्पू: बैंक खाता उपलब्ध कराने वालों और कॉलिंग नेटवर्क से जुड़े लोगों के बीच कड़ी के रूप में काम करने का आरोप।
👉 सिराज अंसारी उर्फ दाऊद: कथित तौर पर उस परिसर का प्रबंधन करता था जहां संदिग्ध कॉलिंग ऑपरेशन चलाया जा रहा था।
बरामदगी:-
👉 12 मोबाइल फोन
👉 09 कीपैड मोबाइल फोन
👉 पीड़ितों/ग्राहकों के विवरण वाले 10 नोटपैड
👉 पीड़ितों/ग्राहकों के विवरण वाले 05 रजिस्टर
👉 01 डेबिट कार्ड
👉 02 चेक बुक
👉 ₹45,170/- नकद
बरामद डिजिटल उपकरणों और दस्तावेजों की जांच की जा रही है ताकि अतिरिक्त पीड़ितों की पहचान की जा सके, जुड़े हुए बैंक खातों का पता लगाया जा सके और नेटवर्क में अन्य लोगों की संलिप्तता का पता लगाया जा सके।
आगे की जांच जारी है।