जेएनयू के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद की अंतरिम जमानत याचिका दिल्ली की एक अदालत ने मंगलवार 19 मई को खारिज कर दी है। बता दें, उमर खालिद ने अपनी बीमार मां की देखभाल करने और चाचा के निधन के बाद होने वाली पारिवारिक रस्मों में शामिल होने के लिए अदालत से राहत मांगी थी। जानकारी के अनुसार, यह आदेश कड़कड़डूमा कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश समीर बाजपेयी ने सुनाया है।
उमर खालिद पर वर्ष 2020 में हुए उत्तर पूर्वी दिल्ली दंगों के कथित मुख्य साजिशकर्ताओं में शामिल होने का आरोप है. उनके खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी यूएपीए और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था. इन दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी जबकि 700 से ज्यादा लोग घायल हुए थे.
दिल्ली में यह हिंसा नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शनों के दौरान भड़की थी. जांच एजेंसियों का दावा है कि दंगों के पीछे एक बड़ी साजिश रची गई थी, जिसमें उमर खालिद सहित कई लोगों की भूमिका सामने आई थी।
इस बीच, उमर खालिद को हाल ही में सुप्रीम कोर्ट से कुछ राहत मिलने की उम्मीद जगी थी। सुप्रीम कोर्ट ने इसी साल जनवरी में दिए गए उस फैसले पर सवाल उठाए थे, जिसमें उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार किया गया था। कोर्ट का कहा था कि यूएपीए जैसे मामलों में भी जेल अपवाद और जमानत नियम है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों के बावजूद फिलहाल उमर खालिद को दिल्ली की निचली अदालत से राहत नहीं मिली है. अब इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और उच्च अदालतों के रुख पर सभी की नजर बनी हुई है।