भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्य कांत ने न्यायपालिका में जमीनी स्तर पर काम करने वाले कर्मियों और स्वयंसेवकों की भूमिका को बेहद अहम बताया है। उन्होंने कहा कि न्याय पाने के लिए आने वाला हर व्यक्ति खुद को सुरक्षित महसूस करे, यही न्याय व्यवस्था की असली ताकत है।
एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए CJI ने कहा, “मैं हमेशा कहता हूं कि यह बात न्यायपालिका में सभी पर लागू होती है, चाहे वह न्यायिक अधिकारी हो या कोई अन्य कर्मचारी। और इसीलिए मैं अपने पैरालीगल वॉलंटियर्स को, जो जमीनी स्तर पर हमसे जुड़े हुए हैं, बहुत महत्वपूर्ण मानता हूं।”
उन्होंने आगे कहा, “जब कोई हमारे ‘न्याय के मंदिर’ में आता है, तो उसे यह महसूस होना चाहिए कि जिस अधिकार से उसे वंचित किया गया है, वह उसे वापस मिल जाएगा। उसे यह लगना चाहिए कि यह संस्था इतनी मजबूत और सक्षम है कि यहां के लोग उसके अधिकारों की रक्षा करने में सक्षम हैं।”
CJI के इस बयान को न्याय तक आम आदमी की पहुंच (Access to Justice) को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।