वैज्ञानिक ने सरकार पर भी निशाना साधा और आरोप लगाया कि विभागीय क्रियाकलापों के कारण देश को आर्थिक क्षति का भी सामना करना पड़ रहा है। शोधकर्ता वैज्ञानिक राठी ने एक गणना पेश करते हुए कहा कि यदि विभाग द्वारा एलियनों/अनिर्दिष्ट उपभोक्ताओं को दिए जा रहे पानी की कीमत मात्र एक पैसा प्रति लीटर मानी जाए तो इससे सरकार को लगभग 90 लाख करोड़ रुपए का प्रत्यक्ष वित्तीय नुकसान होता है, जो दो वर्षों के केंद्रीय बजट के बराबर है।
राठी ने जोर देकर कहा कि यह मामला सिर्फ तकनीकी या वित्तीय नहीं है। यह जीवन और मृत्यु का मामला है। उन्होंने सरकार, जल संपदा विभाग और सम्बद्ध अधिकारियों से मांग की कि वे तत्काल पारदर्शी जांच कराकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करें। साथ ही उन्होंने राष्ट्रपति से भी अपील की कि वे “आम लोगों के जीवन की रक्षा” के लिए संवैधानिक संरक्षण और तत्काल निर्देश जारी करें, ताकि करोड़ों भारतीयों को जहरीले जलपीने से बचाया जा सके।
विशेषज्ञों, नागरिक समाज और पीड़ित परिवारों का कहना है कि यदि राठी के दावे सत्य पाए जाते हैं तो यह केवल नीति विफलता नहीं बल्कि जनजीवन के प्रति गंभीर अपराध होगा। इसलिए शीघ्र, पारदर्शी और सक्षम कदम उठाने की आवश्यकता है। सरकार की अधिकृत प्रतिक्रिया अभी शेष है; अधिकारी बयान जारी करने की प्रक्रिया में बताए जा रहे हैं।