जानिए जरूरी सवाल-जवाब
प्रश्न 1: क्या तंबाकू से टीबी का खतरा बढ़ता, है?
हाँ, तंबाकू सेवन करने वालों में टीबी का खतरा 2–3 गुना अधिक होता है।
प्रश्न 2: तंबाकू टीबी को कैसे प्रभावित करता है?
यह बीमारी को अधिक गंभीर बनाता है, ठीक होने में देरी करता है और जटिलताएं बढ़ाता है ।
प्रश्न 3: क्या तंबाकू इलाज को प्रभावित करता है?
हाँ, इससे इलाज असफल हो सकता है,बीमारी दोबारा हो सकती है, बीमारी MDR-TB का रूप ले सकती है, मृत्यु का खतरा बढ़ता है।
प्रश्न 4: क्या परोक्ष धूम्रपान ( Passive smoking)भी खतरनाक है?
हाँ, दूसरों के धुएं (Passive smoking) से भी टीबी का खतरा बढ़ता है, खासकर बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं में।
प्रश्न 5: भारत में यह समस्या कितनी बड़ी है?
भारत में टीबी के मरीज अधिक हैं और तंबाकू का सेवन भी अधिक है
👉 लगभग 30–40% टीबी मरीजों में तंबाकू का सेवन पाया जाता है
प्रश्न 6: टीबी मरीजों को क्या करना चाहिए?
तुरंत तंबाकू छोड़ें, नियमित दवाएं लें, इलाज पूरा ले और जरूरत पड़ने पर डाक्टर का परामर्श लें ।
प्रश्न 7: सरकार क्या कर रही है?
National TB Elimination Programme के तहत तंबाकू छोड़ने की सेवाओं को टीबी इलाज से जोड़ा जा रहा है। तंबाकू छोड़ने के नए केंद्र बनाए जा रहे हैं। नैशनल टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर 1800-11-2356 पर कॉल करने से तंबाकू छोड़ने में मदद ली जा सकती है ।
प्रश्न 8: मुख्य संदेश क्या है?
तंबाकू छोड़ना – जल्दी ठीक होने,
बेहतर परिणाम और संक्रमण रोकने के लिए जरूरी है।
निष्कर्ष:
डॉ. एस.के. अरोड़ा का कहना है कि टीबी और तंबाकू का संयोजन एक गंभीर खतरा है, लेकिन जागरूकता और तंबाकू त्याग से इसे रोका जा सकता है। National TB Elimination Programme को Tobacco Control Programme के साथ इंटीग्रेट करके ही हम टी.बी मुक्त भारत अभियान का लक्ष्य प्राप्त कर सकते हैं ।
डॉ. एस.के. अरोड़ा
सीनियर चेस्ट विशेषज्ञ,कंसल्टेंट,
पूर्व दिल्ली स्टेट टीबी हेड, दिल्ली सरकार (डब्ल्यूएचओ द्वारा सम्मानित)
TB Expert | Tobacco Control Advocate | Public Health (India)