टी.बी. से जुड़े सवाल – डॉ. एस. के. अरोड़ा के साथ : टी.बी. प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट (TPT) : किसे, क्यों और कब?

“टी.बी. को शुरू होने से पहले रोकें।”

जानिए जरूरी सवाल जवाब

प्रश्न 1. टी.बी. प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट (TPT) क्या है?
उत्तर: टी.बी. प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट6 (TPT) ऐसी दवा है जो उन पात्र व्यक्तियों को दी जाती है जिनके शरीर में टी.बी. के जीवाणु मौजूद हैं, लेकिन उन्हें सक्रिय टी.बी. रोग नहीं है। इसका उद्देश्य भविष्य में टी.बी. होने से बचाना है।

प्रश्न 2. टी.बी. प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट की आवश्यकता क्यों है?
उत्तर: अनुमान है कि दुनिया की लगभग एक-चौथाई आबादी टी.बी. जीवाणु से संक्रमित है। इनमें से अधिकांश लोगों को कभी टी.बी. नहीं होती, लेकिन लगभग 5–10% लोगों में जीवनकाल के दौरान सक्रिय टी.बी. विकसित हो सकती है। यह जोखिम छोटे बच्चों, एचआईवी संक्रमित व्यक्तियों तथा अन्य उच्च जोखिम वाले लोगों में अधिक होता है। TPT इस जोखिम को काफी कम कर सकता है।

प्रश्न 3. किन लोगों को TPT की आवश्यकता हो सकती है?
उत्तर: राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP) के अनुसार निम्नलिखित पात्र व्यक्तियों को चिकित्सकीय सलाह के बाद TPT दिया जा सकता है—

  • संक्रामक टी.बी. रोगी के घर के निकट संपर्क में रहने वाले व्यक्ति
  • टी.बी. रोगी के संपर्क में आए 5 वर्ष से कम आयु के बच्चे
  • एचआईवी के साथ जीवन जी रहे व्यक्ति
  • अन्य उच्च जोखिम वाले पात्र व्यक्ति, जिनका चिकित्सक द्वारा मूल्यांकन किया गया हो।

प्रश्न 4. क्या कोई भी व्यक्ति स्वयं TPT शुरू कर सकता है?
उत्तर: बिल्कुल नहीं। TPT हमेशा डॉक्टर की सलाह पर ही शुरू किया जाना चाहिए। पहले यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि व्यक्ति को सक्रिय टी.बी. रोग नहीं है।

प्रश्न 5. डॉक्टर कैसे सुनिश्चित करते हैं कि सक्रिय टी.बी. नहीं है?
उत्तर: डॉक्टर रोगी के लक्षणों, चिकित्सकीय परीक्षण तथा आवश्यकता पड़ने पर छाती का एक्स-रे, CBNAAT, Truenat या अन्य उपयुक्त जांचों के आधार पर सक्रिय टी.बी. को बाहर करते हैं। इसके बाद ही TPT शुरू किया जाता है।

प्रश्न 6. क्या TPT और टी.बी. का इलाज एक ही बात है?
उत्तर: नहीं। सक्रिय टी.बी. होने पर कई दवाओं से पूरा इलाज किया जाता है, जबकि TPT केवल भविष्य में टी.बी. होने से बचाने के लिए पात्र व्यक्तियों को दिया जाता है।

प्रश्न 7. क्या TPT भारत से टी.बी. समाप्त करने में मदद कर सकता है?
उत्तर: हाँ। समय पर टी.बी. की पहचान, सही इलाज, तंबाकू से दूरी, पोषण एवं TPT—ये सभी राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP) के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। उच्च जोखिम वाले लोगों को TPT देने से भविष्य में टी.बी. के मामलों को कम किया जा सकता है।

डॉ. एस. के. अरोड़ा की सलाह:

“टी.बी. का इलाज जितना महत्वपूर्ण है, उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है टी.बी. की रोकथाम। यदि आपके परिवार में किसी को टी.बी. है या आप उसके निकट संपर्क में रहे हैं, तो स्वयं दवा न लें ब्लकि अपने चिकित्सक से सलाह लें कि क्या आप टी.बी. प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट (TPT) के पात्र हैं। सही समय पर की गई रोकथाम, भविष्य में टी.बी. को रोक सकती है।”

“टी.बी. को शुरू होने से पहले रोकें।”

“तंबाकू छोड़ें → टी.बी. रोकें → जीवन बचाएँ”

डॉ. एस.के. अरोड़ा
सीनियर चेस्ट विशेषज्ञ,कंसल्टेंट,
पूर्व दिल्ली स्टेट टीबी हेड, दिल्ली सरकार (डब्ल्यूएचओ द्वारा सम्मानित)
TB Expert | Tobacco Control Advocate | Public Health (India).

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