डीसी ने की बेटी बचाओ – बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम की समीक्षा

विशेष संवाददाता चिमन लाल

स्कूल ड्रॉप आउट बेटियों का स्कूल में दाखिला सुनिश्चित करें विभाग

झज्जर

डीसी स्वप्निल रविंद्र पाटिल ने मंगलवार को बेटी बचाओ – बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम के तहत गठित जिला टास्क फोर्स की बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि शिक्षित बेटी सामाजिक उत्थान का आधार है। सभी संबंधित विभाग यह सुनिश्चित करें कि स्कूल ड्रॉप आउट बेटियों का स्कूलों में दाखिला हो। स्कूल में शिक्षा ग्रहण कर रही बेटियों को गुणवता की शिक्षा दें। बेटियों के सर्वांगीण विकास के लिए शिक्षा के साथ साथ उनकी प्रतिभा के अनुरूप अन्य क्षेत्रों में भी उनका कौशल निखारने के लिए प्रेरित करें।
डीसी ने कहा कि लिंगानुपात में सुधार एक अनवरत सतत प्रक्रिया है। सरकार समय समय पर विस्तार से गाइडलाइन जा कर रही है, साथ ही इनके क्रियान्वयन की भी समीक्षा कर रही है। उन्होंने शत-प्रतिशत संस्थागत डिलिवरी और हर शिशु के जन्म का पंजीकरण करने पर फोकस करने को कहा। स्वास्थ्य विभाग ने बैठक में बताया कि इस वर्ष में अभी तक 10 हजार 831 बच्चों के जन्म का पंजीकरण हुआ है। इनमे 5562 लडक़े और 5169 लड़कियां शामिल है।
डीसी ने कहा कि पीएनडीटी और एमटीपी एक्ट को पूरी गंभीरता के साथ लागू करें। स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि चालू वर्ष में अभी तक सात रेड पीएनडीटी एक्ट के तहत की गई, जिनमें से पांच सफल हुई। एमटीपी एक्ट के तहत छह सफल रेड की गइ। आरोपियों के विरुद्ध कानूनी कार्यवाही की जा रही है। डीसी ने अल्ट्रासाउंड केंद्रों की नियमानुसार मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए।
डीसी ने कहा कि बेटियों को सुरक्षित माहौल देना हमारा सभी का दायित्व है। शिक्षण संस्थानों में, यातायात के दौरान, सार्वजनिक स्थानों, कार्य स्थलों आदि पर ऐसा सुरक्षित वातावरण होना चाहिए कि बेटियों व महिलाओं में असुरक्षा का भाव पैदा न हो। डी सी ने कहा कि बेटी बचाओ -बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम में प्रशासन के साथ साथ समाज की बड़े स्तर पर भागीदारी सुनिश्चित करें। ज्यादा से ज्यादा सामाजिक संस्थाओं को कार्यक्रम के साथ जोड़ें, विशेषकर कम लिंगानुपात वाले गांवों व शहरी वार्डों में। बैठक में शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, पुलिस, खेल, समाज कल्याण सहित संबंधित विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।

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