राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के प्रमुख लालू यादव, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव के लिए यह एक बड़ा झटका है।
आईआरसीटीसी घोटाला केस भी लालू के रेल मंत्री कार्यकाल से जुड़ा है। सीबीआई का आरोप है कि लालू यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव समेत अन्य आरोपियों ने रांची और पुरी स्थित बीएनआर (BNR) होटलों के रखरखाव का ठेका देने में भ्रष्टाचार किया था। यह आरोप लगाया गया कि टेंडर प्रक्रिया में हेरफेर करके ठेका एक निजी फर्म को दिया गया, जिसके बदले में लालू परिवार को पटना में कीमती जमीन मिली। इस मामले में भी लालू-तेजस्वी समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 120बी (आपराधिक साजिश), 420 (धोखाधड़ी) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत आरोप पत्र दायर किया गया है, और कोर्ट इसमें भी आरोप तय करने पर फैसला सुना रही है।
दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने आईआरसीटीसी स्कैम और बहुचर्चित ‘नौकरी के बदले जमीन’ (लैंड फॉर जॉब) मामले में लालू परिवार के खिलाफ आरोप तय करने पर फैसला सुना दिया है।
यह फैसला ऐसे समय आया है जब बिहार विधानसभा चुनाव नजदीक हैं, जिससे आरजेडी के शीर्ष नेतृत्व पर कानूनी दबाव बढ़ गया है। कोर्ट के इस कदम से इन तीनों प्रमुख नेताओं को अब कानूनी प्रक्रिया के अगले चरणों का सामना करना पड़ेगा, जिसका सीधा असर बिहार की राजनीति और आरजेडी के चुनावी अभियान पर पड़ना तय है।
इस मामले का संबंध लालू यादव के रेल मंत्री (2004 से 2009) कार्यकाल से है। सीबीआई का आरोप है कि लालू यादव ने रेलवे में ग्रुप ‘डी’ की नौकरी देने के बदले में उम्मीदवारों से सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से पटना में कीमती जमीनें रिश्वत के रूप में ली थीं। सीबीआई की विशेष अदालत ने पाया कि लालू यादव ने टेंडर प्रक्रिया में दखल दिया और इसमें बड़ा बदलाव कराया था। जज विशाल गोगने की कोर्ट ने इस मामले में 25 अगस्त को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था और आज धोखाधड़ी, भ्रष्टाचार समेत विभिन्न धाराओं के तहत आरोप तय कर दिए।