पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के अप्वाइंट अफसरों ने अपने पद से इस्तीफा देना किया शुरू

पश्चिम बंगाल में 15 साल सरकार चलाने के बाद चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के महज 80 सीटों पर सिमटने का असर राज्य की ब्योरोक्रेसी में दिखने लगा है। भले ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपनी हार को नहीं स्वीकारते हुए पद से इस्तीफा देने को तैयार नहीं हैं, लेकिन उनकी सरकार की ओर से अप्वाइंट कई अफसरों ने अपने पद से इस्तीफा देने शुरू कर दिया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) की हार के बाद, ममता बनर्जी की ओर से नियुक्त कई पूर्व नौकरशाहों और सलाहकारों ने पिछले 48 घंटे के अंदर अपने इस्तीफे दे दिए हैं।

ममता बनर्जी की सरकार जाने के बाद इस्तीफा देने वालों में कई बड़े नाम हैं. इस लिस्ट में पूर्व मुख्य सचिव अलापन बंद्योपाध्याय, एचके द्विवेदी और मनोज पंत जैसे बड़े नाम शामिल हैं. इसके अलावा अर्थशास्त्री अभिरूप सरकार ने भी इस्तीफा दे दिया है।

अप्रैल में दो चरणों की वोटिंग के बाद 4 मई को हुई वोटों की गिनती में बीजेपी को प्रचंड जीत मिली है. 294 सीटों वाले पश्चिम बंगाल में बीजेपी ने 207 सीटें जीतीं और ममता बनर्जी की टीएमसी महज 80 सीटों पर सिमट गई. यहां तक कि ममता बनर्जी खुद भवानीपुर से चुनाव हार गई हैं।

वही जानकारी के मुताबिक अभिरूप सरकार ने कहा, ‘भले ही मैं कोई राजनीतिक व्यक्ति नहीं हूं, लेकिन ये नियुक्तियां राजनीतिक थीं. मेरी नियुक्ति तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने की थी. चूंकि वह चुनाव हार गई हैं, इसलिए अब पद पर बने रहने का मेरा कोई नैतिक अधिकार नहीं है.’ सरकार ने अतीत में कई समितियों, आयोगों और निगमों में विभिन्न पदों पर काम किया है।

मई 2021 में, केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल के तत्कालीन मुख्य सचिव अलापन बंद्योपाध्याय को वापस बुलाने का आदेश जारी किया था यह आदेश चक्रवात ‘यास’ के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ होने वाली बैठक में शामिल न होने के कारण दिया गया था. राज्य सरकार से कहा गया था कि वह इस IAS अधिकारी को कार्यमुक्त करे और उन्हें दिल्ली के नॉर्थ ब्लॉक में रिपोर्ट करने का निर्देश दे।

हालांकि, ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री से इस आदेश को वापस लेने का अनुरोध किया. बाद में उन्होंने बताया कि बंद्योपाध्याय ने सेवा से रिटायरमेंट ले लिया है और वह दिल्ली में कार्यभार ग्रहण नहीं करेंगे. इसके बजाय उन्होंने बंद्योपाध्याय को अपना मुख्य सलाहकार नियुक्त कर दिया. राज्य सरकार की ओर से दी गई तीन महीने की सेवा विस्तार की अवधि का लाभ उठाने के बजाय, उन्होंने 31 मई को ही रिटायर होने का फ़ैसला किया. बंद्योपाध्याय ने कहा, ‘मंगलवार को मैंने राज्य के मुख्य सचिव को अपना इस्तीफा भेज दिया।’

सचिवालय के सूत्रों के अनुसार, कुछ अन्य पूर्व नौकरशाहों ने भी अपने इस्तीफ़े भेज दिए हैं. इनमें वे अधिकारी शामिल हैं जो राज्य के मुख्य सचिव के पद से रिटायर हुए थे और बाद में बनर्जी की ओर से सलाहकार के रूप में नियुक्त किए गए थे. इस सूची में एचके द्विवेदी और मनोज पंत के नाम भी शामिल हैं. राज्य के सूचना एवं संस्कृति विभाग में मीडिया सलाहकार के तौर पर कार्यरत एक पूर्व पत्रकार ने भी मंगलवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया।

ये इस्तीफ़े ऐसे समय में आए हैं, जब ममता बनर्जी ने मुख्यमंत्री पद से हटने से साफ इनकार कर दिया है. उनका दावा है कि उनकी पार्टी ने चुनाव तो जीता था, लेकिन वोटों की गिनती की प्रक्रिया में चुनाव आयोग, केंद्रीय अर्धसैनिक बलों और बीजेपी ने मिलकर धांधली की है।

इसी बीच जो जानकारी मिली है उसके अनुसार, राज्य के महाधिवक्ता (Advocate General) किशोर दत्ता ने भी पश्चिम बंगाल के राज्यपाल आरएन रवि को अपना इस्तीफा सौंप दिया है. दत्ता दिसंबर 2023 से एडवोकेट जनरल के तौर पर काम कर रहे थे और इससे पहले 2017 से 2021 तक भी इस पद पर रह चुके थे. दत्ता ने बताया, ‘मैंने मंगलवार को गवर्नर को अपना इस्तीफ़ा भेज दिया है।’

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