नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के पहाड़गंज इलाके में दिल्ली सरकार की बेड एंड ब्रेकफास्ट (बी एंड बी) स्कीम को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों और क्षेत्रीय सामाजिक संगठनों ने आरोप लगाया है कि टूरिज्म विभाग के कुछ अधिकारियों की कथित मिलीभगत से नियमों को दरकिनार कर बड़े पैमाने पर लाइसेंस जारी किए जा रहे हैं। आरोप है कि जिन भवनों में सीमित कमरे और पारिवारिक निवास की अनुमति होनी चाहिए, वहां व्यावसायिक गतिविधियां और होटलनुमा संचालन खुलेआम चल रहे हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार दिल्ली टूरिज्म विभाग की वर्ष 2007 की बेड एंड ब्रेकफास्ट स्कीम के तहत स्पष्ट नियम बनाए गए हैं। इन नियमों के अनुसार किसी भवन में सीमित संख्या में कमरों को ही पर्यटकों के लिए किराए पर देने की अनुमति होती है। साथ ही भवन मालिक का अपने परिवार के साथ उसी परिसर में निवास करना अनिवार्य माना गया है। स्कीम के दिशा-निर्देशों में यह भी उल्लेख है कि भवन के भूतल पर किसी प्रकार की व्यावसायिक गतिविधि, दुकान, गोदाम अथवा होटल रिसेप्शन नहीं चलाया जा सकता।
आरोप है कि पहाड़गंज क्षेत्र में इन नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। कई भवनों में प्रत्येक फ्लोर पर दो से तीन कमरे बनाए गए हैं, जबकि नियमों के अनुसार एक फ्लोर पर एक ही कमरे को संचालित किया जा सकते हैं। क्षेत्रीय निवासियों का दावा है कि कुछ इमारतों में 9 से 15 तक कमरे बनाए गए हैं और उन्हें मोटी रकम पर लीज पर दिया जा रहा है। बताया जा रहा है कि इन भवनों से हर महीने तीन से चार लाख रुपये तक का किराया वसूला जा रहा है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इतनी भारी लीज राशि की पूर्ति के लिए कई स्थानों पर अवैध और अनैतिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। लोगों ने आरोप लगाया कि दिन-रात बाहरी लोगों का जमावड़ा लगा रहता है, जिससे पारिवारिक माहौल प्रभावित हो रहा है और क्षेत्र में रहने वाले परिवारों का सामान्य आवागमन तक मुश्किल हो गया है। कई लोगों ने यह भी कहा कि यदि वास्तव में बेड एंड ब्रेकफास्ट स्कीम के तहत केवल सीमित कमरों की अनुमति है, यहां तक कि एक बिल्डिंग में केवल 4 से 6 कमरों की अनुमति है तो फिर लाइसेंस की आड में 9 से 15 कमरों का बेड एंड ब्रेकफास्ट स्कीम होटल कैसे चलाया जा रहा है। ऐसे में केवल 4 कमरों से इतनी अधिक कमाई और लीज व्यवस्था कैसे संभव हो रही है। इसे लेकर व्यापक जांच की मांग उठ रही है साथ ही एरिया इंस्पेक्टर की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं कि कैसे सभी नियमों की अनदेखी कर ऐसे एयर बेड एंड ब्रेकफास्ट स्कीम के होटल्स को दिए जा रहे हैं।
जानकारों के अनुसार दिल्ली सरकार की बेड एंड ब्रेकफास्ट स्कीम का उद्देश्य राजधानी में पर्यटकों को घरेलू वातावरण में सुरक्षित और सस्ती ठहरने की सुविधा उपलब्ध कराना था। इसके तहत मकान मालिकों को निर्धारित नियमों और सुरक्षा मानकों का पालन करना होता है। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर लाइसेंस रद्द करने का भी प्रावधान है। इसके बावजूद पहाड़गंज जैसे संवेदनशील और अत्यधिक भीड़भाड़ वाले इलाके में कथित रूप से बड़े पैमाने पर नियमों की अनदेखी होने से विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
क्षेत्रीय लोगों ने मांग की है कि दिल्ली सरकार और टूरिज्म विभाग इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराए। जिन भवनों में नियमों के विपरीत कमरे बनाए गए हैं या जहां व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो क्षेत्र में कानून व्यवस्था और सामाजिक वातावरण पर गंभीर असर पड़ सकता है।
वहीं, इस मामले में टूरिज्म विभाग के अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि बिना उचित निरीक्षण और नियमों की जांच किए लाइसेंस जारी किए जा रहे हैं। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि जिन अधिकारियों ने नियमों की अनदेखी कर लाइसेंस दिए हैं, उनकी जवाबदेही भी तय की जाए। अब देखना यह होगा कि दिल्ली सरकार और संबंधित विभाग इन आरोपों को कितनी गंभीरता से लेते हैं और क्या पहाड़गंज में चल रहे कथित अवैध संचालन पर कोई ठोस कार्रवाई होती है या नहीं। संबंधित विभाग इसकी जांच कर दोषियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्यवाही करे।