भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ बड़ा अभियान छेड़ते हुए सख्त कार्रवाई करते हुए राजस्थान में CM भजनलाल शर्मा ने एक आईएएस अधिकारी सहित 103 अधिकारियों को सस्पेंड किया है। वहीं, भ्रष्टाचार के गंभीर मामलों में 6 अधिकारियों को सेवा से बर्खास्त किया गया है, जबकि 11 सेवानिवृत्त अधिकारियों की आजीवन शत-प्रतिशत पेंशन पर रोक लगा दी गई है।
राज्य सरकार के अनुसार भ्रष्टाचार मुक्त और जवाबदेह प्रशासन उसकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इसी नीति के तहत भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी, आय से अधिक संपत्ति और पद के दुरुपयोग जैसे मामलों में दोषी पाए गए अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि जनता के हितों से खिलवाड़ करने वाले अधिकारियों को किसी भी स्तर पर बख्शा नहीं जाएगा।
बर्खास्त किए गए अधिकारियों में भीलवाड़ा के तत्कालीन विकास अधिकारी भरत प्रकाश मेघवाल, झुंझुनूं के तत्कालीन कृषि उप निदेशक राजेश कुमार नैनावत, भरतपुर के तत्कालीन सहायक आयुक्त महावीर सिंह आसीवाल शामिल हैं। इसके अलावा चिकित्सा विभाग के डॉ. राम मोहन सिंह चौहान, डॉ. मुरलीधर शर्मा और डॉ. मनोहर लाल को भी सेवा से हटाया गया है। इसी तरह कोटा के तत्कालीन अतिरिक्त लोक अभियोजक (एपीपी) हरिसिंह मीना को एसीबी कोर्ट से सजा मिलने के बाद नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया।
भ्रष्टाचार के मामलों में सरकार ने सेवानिवृत्त अधिकारियों पर भी कार्रवाई की है। 11 अधिकारियों की आजीवन शत-प्रतिशत पेंशन बंद कर दी गई है। इनमें पूर्व आरएएस अधिकारी बनवारी लाल मीणा, देवेंद्र सिंह ढिल्लो, पूर्व आरपीएस अधिकारी महेंद्र सिंह, तत्कालीन बीडीओ मनोहर लाल सिसोदिया और तत्कालीन एक्सईएन देशराज नूनिया प्रमुख हैं।
इसके अलावा नृसिंह रेबारी, सुरेश माथुर और चार अन्य चिकित्सकों के खिलाफ भी इसी प्रकार की कार्रवाई की गई है। सरकार का मानना है कि सेवानिवृत्ति के बाद भी भ्रष्टाचार के मामलों में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों को दंडित किया जाना आवश्यक है।