24 मार्च को विश्व टीबी दिवस के अवसर पर सुबह 11 बजे अस्पताल के ओपीडी क्षेत्र में मरीजों एवं आम जनता के लिए एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में टीबी मरीजों, सामान्य मरीजों, उनके साथ आए परिजनों तथा आम जनता ने भाग लिया।
डॉ. एस.के. अरोड़ा, कंसल्टेंट, ने सभा को संबोधित करते हुए टीबी के लक्षण, उपचार तथा खांसी से संबंधित स्वच्छता (कफ हाइजीन) के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने विशेष रूप से जोर दिया कि दवाइयों को बिना किसी रुकावट के नियमित रूप से पूरी निर्धारित अवधि तक लेना अत्यंत आवश्यक है।
भारत सरकार के 100-दिवसीय कार्यक्रम के बारे में भी जानकारी दी गई, जिसका उद्देश्य संवेदनशील समूहों जैसे—परिवार के संपर्क में रहने वाले लोग, मधुमेह (डायबिटीज) के मरीज, एचआईवी संक्रमित, डायलिसिस पर रहने वाले मरीज, क्रॉनिक धूम्रपान करने वाले, नशा करने वाले, बुजुर्ग एवं स्वास्थ्यकर्मी—में अधिक से अधिक मरीजों की जांच एवं पहचान करना है।
उपस्थित लोगों को शीघ्र जांच एवं समय पर उपचार के लिए आगे आने हेतु प्रेरित किया गया। साथ ही यह भी बताया गया कि सभी मरीजों के लिए जांच एवं उपचार की सेवाएं निःशुल्क उपलब्ध हैं।
आहार से जुड़े मिथकों को भी दूर किया गया। डॉ. अरोड़ा ने बताया कि शाकाहारी भोजन जैसे रोटी, चावल, दाल, दूध तथा सस्ता फल केला टीबी के मरीजों के लिए पर्याप्त है और ठीक होने के लिए मांसाहारी भोजन अनिवार्य नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि गुड़ और भुना चना मिलाकर खाना हीमोग्लोबिन बढ़ाने का सबसे सस्ता और प्रभावी उपाय है, जिसे सभी लोगों को—चाहे वे बीमार हों या नहीं—विशेषकर महिलाओं को, जो मासिक धर्म के दौरान रक्त की कमी का सामना करती हैं, नियमित रूप से लेना चाहिए।