ट्विशा शर्मा मामले में आरोपी पूर्व जज गिरिबाला सिंह को सीबीआई ने किया गिरफ्तार

ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने आरोपी पूर्व जज गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। निचली अदालत के फैसले में खामियां मिलने के बाद हाईकोर्ट ने यह निर्णय सुनाया। इसके बाद, सीबीआई ने गिरिबाला सिंह को उनके भोपाल स्थित आवास से गिरफ्तार कर लिया है। सीबीआई ने हाई-टेक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए उनके घर की 3D स्कैनिंग की और सबूतों से छेड़छाड़ के आरोपों को लेकर पूछताछ की। ट्विशा के पिता ने इसे ‘लैंडमार्क डिसीजन’ बताया है।

बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नित्या रामकृष्णन ने गिरिबाला सिंह को जेल जाने से बचाने के लिए अदालत के सामने कई तर्क रखे, लेकिन हाईकोर्ट ने उन्हें खारिज कर दिया:

दलील 1: “चैट्स में सिर्फ पति पर आरोप हैं, सास पर नहीं”

बचाव पक्ष का दावा:ट्विशा की व्हाट्सऐप चैट्स में दहेज प्रताड़ना के जो भी आरोप हैं, वे मुख्य रूप से उसके पति समर्थ सिंह के खिलाफ हैं. ट्विशा ने अपनी सास के लिए चैट्स में लिखा था कि- अम्मा एक अच्छी इंसान हैं.

कोर्ट:जस्टिस देवनारायण मिश्रा ने आदेश में कहा कि WhatsApp चैट्स को देखने से यह बिल्कुल नहीं कहा जा सकता कि आरोप सिर्फ पति पर हैं. ट्रायल कोर्ट ने इन तथ्यों और गवाहों के बयानों को पूरी गंभीरता से नहीं देखा.

दलील 2: “हमने तो बहू के खाते में 7 लाख रुपये ट्रांसफर किए थे”

बचाव पक्ष का दावा:गिरिबाला सिंह अपनी बहू का ख्याल रखती थीं और उन्होंने यूपीआई (UPI) के जरिए ट्विशा के खाते में 7 लाख रुपये से ज्यादा ट्रांसफर किए थे. ऐसे में दहेज की मांग का आरोप गलत है.

कोर्ट:हाईकोर्ट ने बैंक रिकॉर्ड खंगाला और पाया कि शादी 9 दिसंबर 2025 को हुई थी. पैसों का लेनदेन अक्टूबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच हुआ था. मौत (12 मई) के आसपास कोई पैसा ट्रांसफर नहीं किया गया. कोर्ट ने कहा कि सिर्फ इस लेनदेन से यह नहीं माना जा सकता कि दहेज की मांग नहीं हो रही थी.

दलील 3: “ट्विशा खुद गर्भपात (Abortion) कराना चाहती थी”

बचाव पक्ष का दावा:शादी के दो महीने के भीतर ही ट्विशा का गर्भपात हुआ था, लेकिन इसके लिए उस पर कोई दबाव नहीं था, बल्कि वह खुद ऐसा चाहती थी.

कोर्ट:कोर्ट ने कहा कि व्हाट्सऐप चैट्स और मृतका के परिजनों के बयानों से साफ है कि गर्भधारण और उसके समाप्त होने को लेकर दोनों पक्षों में गंभीर विवाद था. मृतका पर जबरन गर्भपात का दबाव बनाया जा रहा था.

दलील 4: “63 साल की बुजुर्ग महिला के भागने का कोई खतरा नहीं”

बचाव पक्ष का दावा:गिरिबाला सिंह एक 63 वर्षीय बुजुर्ग महिला हैं, भोपाल की स्थायी निवासी हैं और रिटायर्ड ज्यूडिशियल ऑफिसर हैं. उनके कहीं भागने या छिपने की कोई संभावना नहीं है.

कोर्ट:कोर्ट ने कहा कि केवल उम्र और रसूख के आधार पर ऐसे संगीन मामले में अग्रिम जमानत नहीं दी जा सकती.

पोस्टमार्टम के वो ‘6 निशान’ जिन्होंने पलट दिया पूरा केस

इस मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब मृतका ट्विशा शर्मा की पोस्टमार्टम और एम्स (AIIMS) की क्वेरी रिपोर्ट सामने आई. एम्स की रिपोर्ट के मुताबिक- वैसे तो मौत की वजह फंदे पर लटकना बताई गई थी, लेकिन ट्विशा के शरीर पर छह अन्य चोटों के निशान भी मिले थे. इनमें चार चोटें बाएं हाथ पर, एक रिंग फिंगर पर और एक सिर पर थी. ये सभी चोटें मौत से ठीक पहले की थीं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *