सत्य निकेतन और मालवीय नगर हादसों से भी नहीं जागा सिस्टम, पहाड़गंज की तंग गलियों में बेरोकटोक जारी है 5-6 मंजिला अवैध फ्लैट्स दुकानें और अवैध होटलों का निर्माण
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में मालवीय नगर और सत्य निकेतन में हुए दर्दनाक हादसों ने एक बार फिर सिस्टम की लापरवाही और अवैध निर्माण के गठजोड़ की पोल खोल दी है। इन हादसों में कई मासूमों की जान चली गई, कई परिवार उजड़ गए। अपनी साख बचाने के लिए हादसों के बाद MCD का पीला पंजा राजधानी के कई इलाकों में अवैध निर्माणों पर चल रहा है, रोज नोटिस और तोड़फोड़ की कार्रवाई की खबरें सुर्खियां बन रही हैं।
लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। बड़ा सवाल यह है कि क्या यह कार्रवाई सिर्फ दिखावे के लिए है?
पहाड़गंज में क्यों खामोश है MCD का पीला पंजा?
सूत्रों के मुताबिक मध्य दिल्ली का पहाड़गंज इलाका इस कार्रवाई से पूरी तरह अछूता बना हुआ है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि यहां की लगभग हर गली-कूचे में अवैध निर्माण का खेल धड़ल्ले से चल रहा है। पार्किंग के लिए आरक्षित भू-तल पर दुकानें बनाई जा रही हैं, और आवासीय प्लॉट्स पर अवैध रूप से होटल और फ्लैट्स खड़े किए जा रहे हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार –
- 4196/1, गली भगवती भवन, तेल मंडी, पहाड़गंज में संकरी गली में सभी नियमों को ताक पर रखकर दिन-रात अवैध होटल का निर्माण किया जा रहा है।
- 1041, मैन बाजार, पहाड़गंज में भी अवैध रूप से होटल का निर्माण जारी है।
- संगतराशन और चूना मंडी की गली नंबर 5-6 में, 2777 गली नंबर 6 से लेकर 2735, गली नंबर 5, चूना मंडी में दो प्रॉपर्टीज़ को जोड़कर युद्ध स्तर पर अवैध निर्माण हो रहा है।
आरोप है कि यहां 4 मंजिला तो छोड़िए, 5 से 6 मंजिल तक अवैध होटल बनाए जा रहे हैं। न नक्शा पास है, न फायर NOC, और न ही बिल्डिंग सेफ्टी के नियमों की कोई परवाह की जा रही है।
बिना पिलर-नींव के 5 मंजिला इमारत, हादसे को खुला न्योता
इस लापरवाही का सबसे खतरनाक नमूना भवन संख्या 2753, गली नंबर 6, चूना मंडी, पहाड़गंज में देखने को मिला है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि यहां पुरानी DDA स्लम की प्रॉपर्टी पर बिना पिलर और मजबूत नींव के ही 5 मंजिला इमारत खड़ी कर दी गई है।
यह इमारत अब एक तरफ झुक चुकी है और इसे गिरने से बचाने के लिए लोहे के गर्डरों का सहारा दिया गया है। भू-तल पर अवैध रूप से दुकानें बना दी गई हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर यह इमारत गिरी तो बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान होगा।
“JE/AE करोल बाग जोन पर गंभीर आरोप, शिकायतों के बाद भी चुप्पी”
हैरानी की बात यह है कि इतने खतरनाक निर्माण के बावजूद MCD करोल बाग जोन के बिल्डिंग डिपार्टमेंट ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि दर्जनों बार लिखित शिकायतें देने के बावजूद विभाग ने आंखें मूंद रखी हैं।
आरोप है कि JE/AE बिल्डिंग डिपार्टमेंट, करोल बाग जोन द्वारा न तो इस बिल्डिंग के विरुद्ध वर्क स्टॉप नोटिस जारी किया गया है, न ही इसे बुक किया गया है और न ही DMC एक्ट के तहत कोई कानूनी कार्रवाई की गई है। एक भी अवैध होटल, फ्लैट या दुकान पर सीलिंग या ध्वस्तीकरण की कार्रवाई नहीं हुई है।
‘”4 इंजन की सरकार’ पर उठे सवाल”
स्थानीय लोगों का आरोप है कि इसके पीछे की वजह सियासी संरक्षण है। लोगों का कहना है कि इस इलाके के नेता, जनप्रतिनिधि, सांसद और खुद दिल्ली की मुख्यमंत्री भारतीय जनता पार्टी से हैं। जब निगम से लेकर विधानसभा और संसद तक यानी 4 इंजन की सरकार एक ही पार्टी की है, तो MCD की क्या मजाल जो पहाड़गंज में बन रहे अवैध होटलों/ अवैध फ्लैट्स दुकानों पर हाथ डाल दे।
स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि बिल्डर खुलेआम कहते हैं कि “ऊपर तक बात हो गई है”। आरोप है कि राजनीतिक संरक्षण के कारण फील्ड स्टाफ शिकायतों पर कार्रवाई नहीं करता, या महज खानापूर्ति के लिए नोटिस देकर फाइल ठंडे बस्ते में डाल दी जाती है।
MCD की जिम्मेदारी क्या है?
नियमानुसार MCD का बिल्डिंग विभाग किसी भी निर्माण का असली पहरेदार होता है। दिल्ली नगर निगम अधिनियम और Unified Building Bye Laws 2016 के तहत उसकी जिम्मेदारी तय है:
- नक्शा पास करना और जांचना: बिना स्वीकृत बिल्डिंग प्लान के कोई भी निर्माण अवैध है।
- नियमित निगरानी: हर वार्ड में तैनात JE और AE को अपने क्षेत्र में चल रहे निर्माणों की रोजाना मॉनिटरिंग करनी होती है।
- अवैध निर्माण को बुक करना: अतिरिक्त फ्लोर या बिना सेटबैक के निर्माण दिखते ही उसे तुरंत ‘बुक’ कर नोटिस जारी करना और फाइल को डेमोलिशन सेल में भेजना।
- ध्वस्तीकरण और सीलिंग: नोटिस के बाद भी काम न रुके तो ध्वस्तीकरण और सीलिंग की कार्रवाई करना।
दिल्ली हाईकोर्ट पहले ही कह चुका है कि अगर अतिक्रमण नहीं हटा तो संबंधित MCD इंजीनियर और SHO जिम्मेदार होंगे। नियमों के मुताबिक अगर किसी क्षेत्र में लगातार अवैध निर्माण हो रहा है, तो यह सीधे तौर पर स्थानीय JE/AE और Executive Engineer की लापरवाही या मिलीभगत माना जाता है।
जनता पूछ रही है – क्या मालवीय नगर और सत्य निकेतन के मासूमों की जान की कीमत पर ही MCD जागा था? और अब क्या पहाड़गंज में किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है, तब जाकर पीला पंजा चलेगा?
इस संबंध में MCD करोल बाग जोन के अधिकारियों से पक्ष जानने की कोशिश की गई, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। वहीं स्थानीय नेता भी कैमरे के आगे आने से बचते नजर आए।
इन सब के बीच पहाड़गंज की जनता का एक ही सवाल है – क्या हमें इस जंजाल के बीच पहाड़गंज में परिवार के साथ सुरक्षित रहने का अधिकार भी है या नहीं?