10 हजार की साइबर ठगी से 70 करोड़ के म्यूल अकाउंट नेटवर्क का भंडाफोड़, दुबई-UK तक फैला था जाल

सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट साइबर पुलिस की बड़ी कार्रवाई: 10 आरोपी धरे गए, सूर्याेदय बैंक का मैनेजर और इंडसइंड बैंक के 4 अधिकारी/एजेंट भी शामिल; 248 बैंक अकाउंट किट, 38 सिम, 22 मोबाइल और 1 लाख कैश बरामद

नई दिल्ली। मध्य जिला साइबर थाना पुलिस ने महज 10 हजार रुपये की साइबर ठगी की जांच से शुरू होकर 70 करोड़ रुपये के विशाल अंतरराष्ट्रीय म्यूल अकाउंट सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है। यह रैकेट पिछले 3-4 साल से भारत, दुबई और यूके में साइबर ठगों को फर्जी कंपनियों के नाम पर करंट बैंक अकाउंट सप्लाई कर रहा था।

पुलिस ने इस मामले में सूर्याेदय स्मॉल फाइनेंस बैंक के एक मैनेजर को गिरफ्तार किया है, जबकि इंडसइंड बैंक की द्वारका शाखा की दो महिला मैनेजर, एक टेलर और एक इंश्योरेंस एजेंट समेत 4 लोगों को भी पकड़कर पाबंद किया गया है। कुल 10 आरोपी शिकंजे में हैं।

पुलिस उपायुक्त, मध्य जिला, रोहित राजबीर सिंह, IPS ने बताया कि छापेमारी में 248 पूरे बैंक अकाउंट किट, 38 सिम कार्ड, 22 मोबाइल फोन, 28 फर्जी फर्मों की रबर स्टैंप, 55 डेबिट/क्रेडिट कार्ड, 1 लाख रुपये नकद और एक मारुति ब्रेजा कार बरामद की गई है।

जांच में खुलासा हुआ है कि इन 248 खातों से 70 करोड़ रुपये से ज्यादा का लेन-देन हुआ है। ये खाते देश के 19 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की 156 NCRP शिकायतों से जुड़े हैं, जिनमें करीब 20 करोड़ रुपये की ठगी हुई है। पुलिस ने 56 लाख रुपये फ्रीज कराए हैं।
कैसे खुला 70 करोड़ का जाल?
यह मामला पटेल नगर के पंजाबी बस्ती, बलीजीत नगर निवासी एक व्यक्ति की शिकायत से शुरू हुआ। शिकायतकर्ता को सोशल मीडिया पर वर्क-फ्रॉम-होम फ्रीलांसिंग का झांसा दिया गया। जॉब रजिस्ट्रेशन और अकाउंट प्रोसेसिंग फीस के नाम पर उससे कई किस्तों में 10,000 रुपये ठग लिए गए और फिर ठगों ने उसे ब्लॉक कर दिया।

इस संबंध में NCRP शिकायत संख्या 30805260037028 पर FIR No. 33/2026 धारा 318(4)/319(2)/61/112/3(5) BNS के तहत साइबर थाना, मध्य जिला में मामला दर्ज किया गया।

तकनीकी जांच में पता चला कि ठगी के 5,000 रुपये कई परतों से होते हुए “Damion Traders” नाम की एक फर्जी फर्म के एक्सिस बैंक करंट अकाउंट में गए। यह फर्म मौजूद ही नहीं थी। इसी लिंक से पुलिस फील्ड रिक्रूटर मोहित सोनी तक पहुंची, जिसे 08.07.2026 को गिरफ्तार किया गया। मोहित से ही इस पूरे “बैंक किट फैक्ट्री” रैकेट का खुलासा हुआ।
बैंक किट फैक्ट्री का modus operandi
इंस्पेक्टर योगराज दलाल, SHO साइबर थाना के नेतृत्व में SI कमलेश कुमार, SI दीपक, SI अंकुर सेजवाल, HC संदीप, HC परमवीर और W/Ct. मेघा की टीम ने ACP पहाड़गंज सौरभ ए. नरेंद्र के निर्देशन में जांच की।

जांच में सामने आया कि –

  1. रिक्रूटर भोले-भाले लोगों के दस्तावेज लेते थे।
  2. . “Damion Traders” जैसी फर्जी प्रोपराइटरशिप फर्में बनाई जाती थीं।
  3. . मुख्य कोऑर्डिनेटर दिशांत खन्ना बैंक स्टाफ से मिलीभगत कर खाते खुलवाता था।
  4. . सूर्याेदय बैंक मैनेजर कुंदन कुमार ने 75,000 रुपये की रिश्वत ली, जिसमें से 55,000 सीधे उसके निजी खाते में आए।
  5. . इंडसइंड बैंक के अधिकारियों ने कैश किकबैक और इंश्योरेंस पॉलिसी के बदले बिना KYC वेरिफिकेशन के खाते खोले।
  6. . शालीमार बाग में किराए के मकान में इंटरनेट बैंकिंग, डेबिट कार्ड, चेकबुक, पासबुक, फर्जी स्टैंप और सिम वाले पूरे किट तैयार कर भारत, दुबई और यूके के ठगों को बेचे जाते थे। सिलसिलेवार गिरफ्तारियां
    पुलिस ने पहले मोहित सोनी को पकड़ा। उसके बाद 09 करंट अकाउंट वाले म्यूल खाताधारक रंजीत डेमियन एक्का और उसके साथी योगेश कुमार को 08.07.2026 को ही गिरफ्तार किया।

बीते 14.जुलाई.2026 को शालीमार बाग में छापे में मुख्य सरगना दिशांत खन्ना (36) और उसका साथी मृदुल (22) गिरफ्तार हुआ। यहीं से 248 बैंक किट का जखीरा मिला।

वॉट्सऐप चैट और कैश डिपॉजिट रसीदों से बैंक अधिकारियों की भूमिका उजागर हुई, जिसके बाद 20.07.2026 को सूर्याेदय बैंक मैनेजर कुंदन कुमार (35) को गिरफ्तार किया गया और इंडसइंड बैंक, द्वारका सेक्टर-22 की मैनेजर कोमाक्षी शर्मा, डिप्टी मैनेजर पायल सेठिया, टेलर श्रृष्टि और इंश्योरेंस एजेंट चिराग भाटिया को पकड़कर पाबंद किया गया।

मुख्य सरगना जो भारत में फरार है और UAE में बैठे मास्टरमाइंड की तलाश जारी है। दोनों के खिलाफ लुक आउट सर्कुलर जारी किया गया है।
पूरे देश से जुड़े तार
यह नेटवर्क आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल समेत 19 राज्यों की 156 शिकायतों से जुड़ा है।

पुलिस की अपील: कभी भी अपने पहचान पत्र, बैंक खाते, चेकबुक, डेबिट कार्ड, इंटरनेट बैंकिंग पासवर्ड या सिम किसी को न बेचें, न दें। अनजान लोगों या फर्जी फर्मों के नाम पर खाता खोलना आपको भी कानूनी रूप से अपराधी बना सकता है। बैंकों को KYC का सख्ती से पालन करना होगा। मिलीभगत करने वाले बैंक अधिकारी भी साइबर अपराधियों की तरह ही जेल जाएंगे। साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत करें।

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