दिल्ली – 28 अक्टूबर 2026
मध्य दिल्ली जिला पुलिस की साइबर थाना पुलिस ने बैंक अधिकारियों को झांसा देकर कॉर्पोरेट खातों से लाखों रुपये उड़ाने वाले एक शातिर गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और उनके पास से करीब 2.50 करोड़ रुपये की संपत्ति बरामद की गई है।
पुलिस ने बताया कि एक आरोपी 7 साल से फरार घोषित अपराधी (Proclaimed Offender) है।
यह मामला बैंक ऑफ इंडिया, राजेंद्र प्लेस शाखा के मैनेजर की शिकायत पर दर्ज किया गया था।
शिकायत के अनुसार, 05.08.2026 को शाखा में एक व्यक्ति ने खुद को कंपनी डायरेक्टर श्री दीपक मल्होत्रा बताकर फोन किया। पहले आरोपी ने भरोसा जीतने के लिए 1 करोड़ रुपये की FD बनवाने की बात की, फिर ब्याज दरों पर चर्चा की।
कुछ देर बाद उसी व्यक्ति ने दोबारा फोन कर कहा कि उसे कंपनी के खाते से जरूरी पेमेंट करना है और कंपनी की चेकबुक खत्म हो गई है। इसके बाद उसने कंपनी की असली ईमेल आईडी से मिलती-जुलती एक फर्जी ईमेल आईडी से, कंपनी के फर्जी लेटरहेड पर 22,56,922 रुपये का RTGS ट्रांसफर करने का फर्जी अनुरोध भेजा।
जब बैंक अधिकारियों ने जरूरी दस्तावेज (Indemnity) मांगे, तो आरोपी ने पहले भी ऐसे ट्रांसफर होने का हवाला देकर और अर्जेंसी दिखाकर दबाव बनाया। इसी झांसे में आकर बैंक ने 22,56,922 रुपये का RTGS कर दिया।
इस पर e-FIR No. 0228/2026, दिनांक 05.08.2026, धारा 318(4)/319/340 BNS के तहत थाना साइबर, सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट में मामला दर्ज किया गया।
जांच में पता चला कि ठगी की रकम पश्चिम बंगाल के बंधन बैंक के एक म्यूल अकाउंट में गई थी। फोन नंबर और ईमेल फर्जी पहचान पर लिए गए थे।
एसएचओ साइबर थाना श्री योगराज दलाल और एसीपी पहाड़गंज श्री सौरभ ए. नरेंद्र की देखरेख में SI कमलेश कुमार के नेतृत्व में टीम – ASI पंकज यादव, HC मनवीर सिंह, HC शमीम, Ct. नितिन, W/HC सुनीता और W/Ct. ललिता – ने तकनीकी जांच, टेलीकॉम रिकॉर्ड और डिजिटल सबूतों का विश्लेषण किया।
कड़ी मशक्कत के बाद पुलिस ने दो मुख्य आरोपियों को लोनी, गाजियाबाद (UP) से गिरफ्तार किया:
- विनय कुमार यादव, उम्र 36 साल, निवासी लोनी, गाजियाबाद
- अनिल कुमार सहगल, उम्र 65 साल, निवासी नोएडा
ठगी का तरीका
आरोपी कॉर्पोरेट कंपनियों के बैंकिंग डिटेल्स और डायरेक्टर्स के नाम हासिल करते थे। फिर बैंक अधिकारियों को खुद को डायरेक्टर बताकर फोन करते थे। फर्जी कंपनी लेटरहेड और मिलती-जुलती फर्जी ईमेल आईडी बनाकर पेमेंट रिक्वेस्ट भेजते थे और अर्जेंसी का दबाव बनाते थे। पैसा आते ही उसे सोने में बदलना और ATM से निकालना शुरू कर देते थे। जांच में सामने आया कि 18.50 लाख रुपये का सोना पश्चिम बंगाल के एक ज्वेलर से ऑनलाइन खरीदा गया था।
2.50 करोड़ की बरामदगी
पुलिस ने इस केस और इससे जुड़े अन्य मामलों में करीब 1500 ग्राम सोना और अन्य संपत्ति बरामद की है:
- 101 सोने के सिक्के (लगभग 924 ग्राम) • 17 सोने की चेन • 09 सोने के ब्रेसलेट / कड़े • 03 सोने के हार • 03 सोने की अंगूठी, 06 झुमके, 01 नथ और 01 टीका • एक बिल्कुल नई महिंद्रा थार रॉक्स गाड़ी (अगस्त 2026 में खरीदी गई) • 2,37,000 रुपये नकद और 3 मोबाइल फोन पुराना अपराधी निकला एक आरोपी
दोनों आरोपियों का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड है। वे गाजियाबाद, दसना, सहारनपुर, अयोध्या और फरीदाबाद में वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में शामिल रहे हैं। दोनों की मुलाकात जेल में हुई थी और पहले “मैजिक पेन” से चेक फ्रॉड करते थे।
विनय कुमार यादव 08.08.2019 से घोषित अपराधी है और जाली नोट के मामले में 7 साल से फरार था। 2009 में उससे 4500 रुपये के जाली नोट भी बरामद हुए थे। उस पर हत्या और आर्म्स एक्ट सहित 9 केस दर्ज हैं।
अनिल सहगल पर भी फरीदाबाद, अयोध्या, गाजियाबाद सहित 5 केस दर्ज हैं।
6 अन्य मामले भी सुलझे
इनकी गिरफ्तारी से इसी तरह के 6 अन्य मामले सुलझ गए हैं, जिनमें ICICI, बैंक ऑफ इंडिया और केनरा बैंक से करीब 6 करोड़ रुपये की ठगी / ठगी के प्रयास हुए थे:
- FIR 134/2026, PS साइबर साउथ, गुरुग्राम – 2.98 करोड़
- FIR 342/2026, PS पलवल कैंप – 1.30 करोड़
- FIR 176/2026, PS साइबर क्राइम, गुरुग्राम – 52.35 लाख
- FIR 55/2026, PS साइबर, साउथ-ईस्ट दिल्ली – 20.50 लाख 5. FIR 341/2026, PS साइबर, रोहिणी – 16.65 लाख 6. FIR 30/2026, PS साइबर, रोहिणी – 88 लाख (प्रयास)
- पुलिस को जांच में पश्चिम बंगाल और बिहार के साथियों के लिंक भी मिले हैं।
पुलिस एडवाइजरी: सभी बैंकों से अपील है कि हाई-वैल्यू ट्रांजेक्शन में SOP का सख्ती से पालन करें, बैंक रिकॉर्ड में दर्ज नंबर पर ही अधिकृत व्यक्ति से वेरिफिकेशन करें और किसी भी तरह की अर्जेंसी के दबाव में दस्तावेज प्रक्रिया को न छोड़ें। किसी भी संदिग्ध कॉल की सूचना तुरंत 1930 या www.cybercrime.gov.in पर दें।