RTI में एक ही रटा-रटाया जवाब देकर जनता को कर रहे गुमराह
नई दिल्ली। दिल्ली नगर निगम के करोल बाग जोन में फैले कथित भ्रष्टाचार और अवैध निर्माणों के खेल ने एक बार फिर नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत अवैध निर्माणों की जानकारी मांगने वाले नागरिकों को करोल बाग जोन के बिल्डिंग विभाग की ओर से लगातार एक ही तरह का जवाब दिया जा रहा है, जिससे साफ प्रतीत होता है कि विभाग जानबूझकर जिम्मेदारी से बचने और मामले को दबाने का प्रयास कर रहा है।
सूत्रों और आरटीआई आवेदनों से सामने आया है कि करोल बाग जोन के बिल्डिंग विभाग के एक्सक्यूटिव इंजीनियर की ओर से लगभग हर शिकायत और आरटीआई में एक जैसा जवाब दिया जा रहा है कि “जूनियर इंजीनियर (बिल्डिंग) को कार्रवाई करने के लिए कहा गया है, लेकिन अभी तक उसकी ओर से ATR यानी एक्शन टेकन रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है।” हैरानी की बात यह है कि प्रथम अपील के बाद भी विभाग का यही घिसा-पिटा जवाब दिया जा रहा है। इससे यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर नगर निगम का पूरा तंत्र केवल “ATR नहीं मिली” कहकर अपनी जिम्मेदारी से कैसे बच सकता है?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि करोल बाग जोन में बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण चल रहे हैं, लेकिन निगम अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं। आरोप यह भी है कि बिल्डिंग विभाग के कुछ अधिकारी और कर्मचारी अवैध निर्माणकर्ताओं के साथ मिलीभगत कर नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़वा रहे हैं। यदि कोई नागरिक शिकायत करता है या सूचना मांगता है, तो उसे केवल औपचारिक जवाब देकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।
सबसे गंभीर बात यह सामने आई है कि करोल बाग जोन में तैनात डिप्टी कमिश्नर के पर्सनल असिस्टेंट पर भी लोगों को डिप्टी कमिश्नर से न मिलने देने के आरोप लग रहे हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि कई बार समय मांगने और कार्यालय पहुंचने के बावजूद उन्हें डिप्टी कमिश्नर से मिलने नहीं दिया जाता। इससे यह धारणा और मजबूत हो रही है कि निगम अधिकारी जनता की समस्याएं सुनने के बजाय उन्हें दबाने में ज्यादा रुचि रखते हैं।
नगर निगम की इस कार्यशैली ने दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार के भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन के दावों की भी पोल खोल दी है। सवाल यह है कि जब एक विभाग बार-बार एक ही जवाब देकर अपनी जिम्मेदारी टाल रहा है, तब उच्च अधिकारी इस पर कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे? क्या जूनियर इंजीनियरों की जवाबदेही तय नहीं होनी चाहिए? यदि ATR महीनों तक नहीं आती, तो संबंधित अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों नहीं होती?
आरटीआई कार्यकर्ताओं और सामाजिक संगठनों का कहना है कि यह मामला केवल सूचना छिपाने का नहीं, बल्कि अवैध निर्माणों को संरक्षण देने का प्रतीत होता है। यदि समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो करोल बाग जोन में अवैध निर्माणों का जाल और फैल सकता है, जिससे भविष्य में बड़े हादसों का खतरा भी बढ़ेगा।
अब जरूरत इस बात की है कि दिल्ली नगर निगम के उच्च अधिकारी, विजिलेंस विभाग और भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसियां करोल बाग जोन के बिल्डिंग विभाग की कार्यप्रणाली की निष्पक्ष जांच कराएं। साथ ही यह भी जांच हो कि आखिर क्यों हर आरटीआई में एक जैसा जवाब देकर जनता को गुमराह किया जा रहा है। दिल्ली की जनता अब यह जानना चाहती है कि क्या नगर निगम वास्तव में भ्रष्टाचार पर कार्रवाई करेगा या फिर फाइलों और ATR के नाम पर भ्रष्टाचार का यह खेल यूं ही चलता रहेगा।