टी.बी. से जुड़े सवाल – डॉ. एस. के. अरोड़ा के साथ : टी.बी. और एचआईवी: जब दो संक्रमण साथ हों तो समय पर पहचान और एकीकृत उपचार जरूरी है

जानिए जरूरी सवाल जवाब

प्रश्न 1. टी.बी. और एचआईवी के बीच क्या संबंध है?
उत्तर: टी.बी. और एचआईवी का आपस में बहुत महत्वपूर्ण चिकित्सकीय संबंध है। एचआईवी शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर करता है, जिसके कारण टी.बी. संक्रमण के सक्रिय टी.बी. रोग में बदलने का खतरा बढ़ जाता है।
दूसरी ओर, टी.बी. एचआईवी के साथ जी रहे लोगों में बीमारी और मृत्यु का एक प्रमुख कारण बना हुआ है।
WHO के अनुसार, वर्ष 2024 में दुनिया भर में लगभग 6.19 लाख एचआईवी से पीड़ित लोगों को टी.बी. हुई और लगभग 1.50 लाख लोगों की एचआईवी-संबंधी टी.बी. से मृत्यु हुई।

प्रश्न 2. एचआईवी से टी.बी. का खतरा क्यों बढ़ जाता है?
उत्तर: हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली सामान्यतः टी.बी. के बैक्टीरिया को नियंत्रित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। एचआईवी प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर करता है और इस कारण शरीर में मौजूद निष्क्रिय टी.बी. संक्रमण सक्रिय हो सकता है।
एचआईवी से पीड़ित व्यक्ति को नया टी.बी. संक्रमण होने पर भी सक्रिय बीमारी का खतरा अधिक हो सकता है।
इसीलिए एचआईवी के साथ जी रहे लोगों की नियमित टी.बी. स्क्रीनिंग बहुत महत्वपूर्ण है।

प्रश्न 3. क्या टी.बी. कभी एचआईवी संक्रमण का पहला संकेत हो सकती है?
उत्तर: हाँ। कुछ लोगों में टी.बी. ऐसी बीमारी हो सकती है जिसके कारण डॉक्टर को अंतर्निहित एचआईवी संक्रमण की संभावना पर विचार करने की जरूरत पड़ती है। इसलिए टी.बी. से पीड़ित व्यक्ति में चिकित्सकीय स्थिति और राष्ट्रीय दिशानिर्देशों के अनुसार एचआईवी की जांच की पेशकश महत्वपूर्ण है।
एचआईवी की जल्दी पहचान होने से समय पर उपचार और देखभाल शुरू की जा सकती है तथा भविष्य की जटिलताओं को कम किया जा सकता है।

प्रश्न 4. क्या हर टी.बी. मरीज की एचआईवी जांच होनी चाहिए?
उत्तर: टी.बी. के मरीज की एचआईवी स्थिति जानना टी.बी. प्रबंधन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। WHO टी.बी. से पीड़ित लोगों में एचआईवी की जांच की सिफारिश करता है, जबकि जांच की प्रक्रिया देश की नीतियों और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार हो सकती है। वर्ष 2024 में दुनिया भर में नए टी.बी. मरीजों में लगभग 82% के लिए एचआईवी जांच का परिणाम दर्ज किया गया था।

प्रश्न 5. क्या एचआईवी के साथ जी रहे लोगों की टी.बी. के लिए स्क्रीनिंग होनी चाहिए?
उत्तर: बिल्कुल।
स्क्रीनिंग दोनों दिशाओं में होनी चाहिए:
टी.बी. मरीज → एचआईवी की जांच और
एचआईवी के साथ जी रहे व्यक्ति → टी.बी. की नियमित स्क्रीनिंग
एचआईवी के साथ जी रहे लोगों में टी.बी. के लक्षणों और जोखिम का नियमित मूल्यांकन किया जाना चाहिए। आवश्यकता होने पर आगे की जांच करानी चाहिए।
टी.बी. की जल्दी पहचान गंभीर बीमारी को रोकने और संक्रमण के फैलाव को कम करने में मदद कर सकती है।

प्रश्न 6. भारत में टी.बी.-एचआईवी की स्थिति कितनी गंभीर है?
उत्तर: भारत में टी.बी. और एचआईवी दोनों का महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य बोझ है।
India TB Report 2024 में WHO के अनुमान के आधार पर लगभग: 48,000
एचआईवी-पॉजिटिव टी.बी. के अनुमानित नए मामले, 11,000
एचआईवी-संबंधी टी.बी. से अनुमानित मौतें और 37,600
रिपोर्ट किए गए टी.बी. मरीज जो एचआईवी-पॉजिटिव थे 99%
रिपोर्ट किए गए एचआईवी-पॉजिटिव टी.बी. मरीज ART पर थे
इनमें पहले दो आंकड़े अनुमानित बीमारी और मृत्यु के आंकड़े हैं, जबकि अंतिम दो रिपोर्ट किए गए मरीजों से संबंधित आंकड़े हैं।
भारत में NTEP और NACP के बीच टी.बी.-एचआईवी सहयोग कार्यक्रम वर्ष 2001 से चल रहा है, जो दोनों संक्रमणों को एक साथ देखने के महत्व को दर्शाता है।

प्रश्न 7. यदि किसी व्यक्ति को टी.बी. और एचआईवी दोनों हों, तो क्या दोनों का इलाज संभव है?
उत्तर: हाँ। टी.बी. और एचआईवी दोनों का उपचार संभव है और उचित उपचार से रोगी के परिणामों में काफी सुधार किया जा सकता है। मरीज को उचित टी.बी. उपचार के साथ एचआईवी की देखभाल और एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी (ART) की आवश्यकता होती है।
इलाज का निर्णय टी.बी. के प्रकार, दवा-संवेदनशीलता, अन्य दवाओं और मरीज की समग्र चिकित्सकीय स्थिति के आधार पर किया जाता है। महत्वपूर्ण बात यह है कि:
टी.बी. और एचआईवी को दो बिल्कुल अलग समस्याओं के रूप में नहीं देखना चाहिए।

प्रश्न 8. क्या एचआईवी से पीड़ित व्यक्ति को टी.बी. होने पर ART शुरू की जाती है?
उत्तर: सामान्यतः एचआईवी के साथ जी रहे व्यक्ति को टी.बी. होने पर टी.बी. उपचार के साथ ART की आवश्यकता होती है।
ART शुरू करने का सही समय मरीज की चिकित्सकीय स्थिति और टी.बी. के प्रकार पर निर्भर करता है। विशेष रूप से टी.बी. मेनिन्जाइटिस में ART शुरू करने का समय विशेष सावधानी से तय किया जाता है।
इसलिए उपचार का निर्णय विशेषज्ञ चिकित्सकीय टीम द्वारा किया जाना चाहिए।

प्रश्न 9. क्या एचआईवी के साथ जी रहे व्यक्ति में टी.बी. को रोका जा सकता है?
उत्तर: हाँ। पात्र व्यक्तियों में, सक्रिय टी.बी. रोग को उचित रूप से बाहर करने के बाद TB Preventive Treatment (TPT) टी.बी. की रोकथाम का महत्वपूर्ण उपाय है। WHO के अनुसार, वर्ष 2024 में दुनिया भर में लगभग 18 लाख एचआईवी के साथ जी रहे लोगों को TB Preventive Treatment दिया गया।
टी.बी. को बीमारी बनने से पहले रोकना जीवन बचाने का महत्वपूर्ण तरीका है।

प्रश्न 10. क्या एचआईवी के साथ जी रहे व्यक्ति में टी.बी. का निदान कठिन हो सकता है?
उत्तर: हाँ, कुछ परिस्थितियों में।
जब प्रतिरोधक क्षमता बहुत कमजोर हो जाती है, तो टी.बी. के लक्षण और जांच के परिणाम सामान्य से अलग हो सकते हैं। टी.बी. फेफड़ों के अलावा शरीर के अन्य अंगों में भी हो सकती है।
इसलिए ऐसे मरीजों में टी.बी. का संदेह होने पर केवल लक्षणों या Chest X-ray पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। आवश्यकता के अनुसार microbiological और molecular tests का उपयोग महत्वपूर्ण है।

प्रश्न 11. यदि एचआईवी के साथ जी रहे व्यक्ति को टी.बी. है, तो परिवार को क्या सावधानी रखनी चाहिए?
उत्तर: सबसे महत्वपूर्ण कदम है टी.बी. की जल्दी पहचान और प्रभावी उपचार।
यदि मरीज को infectious pulmonary TB है, तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार पर्याप्त ventilation, खांसते समय सावधानी और अन्य infection-control उपाय अपनाए जाने चाहिए।
मरीज के साथ निकट संपर्क में रहने वाले परिवार के सदस्यों को भी उनकी उम्र, संपर्क और जोखिम के आधार पर टी.बी. की चिकित्सकीय जांच की आवश्यकता हो सकती है।

प्रश्न 12. क्या एचआईवी होने का मतलब है कि व्यक्ति को निश्चित रूप से टी.बी. होगी?
उत्तर: नहीं। एचआईवी से टी.बी. का खतरा काफी बढ़ जाता है, लेकिन एचआईवी के साथ जी रहे हर व्यक्ति को टी.बी. नहीं होती।
अच्छी HIV care, प्रभावी ART, नियमित TB screening और पात्र व्यक्तियों में TB Preventive Treatment से टी.बी. के खतरे को कम किया जा सकता है।

“तंबाकू छोड़ें → टी.बी. रोकें → जीवन बचाएँ”

डॉ. एस. के. अरोड़ा की सलाह :

“टी.बी. और एचआईवी को दो बिल्कुल अलग समस्याओं के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। टी.बी. से पीड़ित व्यक्ति में उपयुक्त रूप से एचआईवी की स्थिति की जांच महत्वपूर्ण है और एचआईवी के साथ जी रहे प्रत्येक व्यक्ति में नियमित रूप से टी.बी. की स्क्रीनिंग की जानी चाहिए। टी.बी. की जल्दी पहचान, समय पर उपचार, उचित ART और पात्र व्यक्तियों में टी.बी. की रोकथाम गंभीर बीमारी को रोकने और जीवन बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।”

डॉ. एस.के. अरोड़ा
सीनियर चेस्ट विशेषज्ञ,कंसल्टेंट,
पूर्व दिल्ली स्टेट टीबी हेड, दिल्ली सरकार (डब्ल्यूएचओ द्वारा सम्मानित)
TB Expert | Tobacco Control Advocate | Public Health (India).

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