“दिल्ली सरकार के बीट ऑफिसर जिम्मेदार वाले आदेश के बाद भी चूना मंडी से आरा कशा रोड तक बेरोकटोक निर्माण, ज्यादातर अवैध होटल” ???
नई दिल्ली। दिल्ली के पहाड़गंज में अवैध निर्माण का खेल एक बार फिर चरम पर है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नेताओं और रसूखदारों के संरक्षण में प्रशासन आंखें मूंदे बैठा है, जबकि कोर्ट के सख्त आदेशों के बावजूद दिन-रात अवैध इमारतें खड़ी की जा रही हैं।
क्षेत्र के चूना मंडी, चित्र गुप्ता रोड, मैन बाजार पहाड़गंज, संगतराशन, मंटोला, गली चांदी वाली, हरि मंदिर गली, मुल्तानी ढांडा और आरा कशा रोड में सभी नियमों को ताक पर रखकर अवैध निर्माण चल रहा है। आरोप है कि इनमें से 90 फीसदी निर्माण अवैध होटलों के हैं, जिनकी आड़ में अवैध गतिविधियों से स्थानीय लोगों का जीना मुश्किल हो गया है।
“क्या कहता है नियम” ?
दिल्ली नगर निगम अधिनियम (DMC Act) की धारा 336 के तहत किसी भी वैध निर्माण के लिए सरल स्कीम के तहत प्लान सेक्शन कराना अनिवार्य है। धारा 343, 344 के तहत बिना स्वीकृत नक्शे के निर्माण को अवैध मानते हुए सीलिंग और ध्वस्तीकरण का अधिकार निगम को है। साथ ही निर्माण स्थल पर स्वीकृत प्लान की कॉपी पोस्टर के रूप में चस्पा करना अनिवार्य है, ऐसा न करने पर 5,000 रुपये तक का चालान किया जा सकता है। पहाड़गंज के किसी भी निर्माण स्थल पर ऐसा विवरण नहीं लगा है।
दिल्ली सरकार ने हाल ही में सख्त आदेश जारी कर कहा था कि अवैध निर्माण के लिए सबसे पहले क्षेत्र के बीट ऑफिसर, (JE/AE) की जिम्मेदारी तय होगी।
“अदालतों के सख्त आदेश फिर भी बेअसर”
- सुप्रीम कोर्ट का जीरो टॉलरेंस आदेश: सुप्रीम कोर्ट ने 17 दिसंबर 2024 को राजेंद्र कुमार बरजात्या बनाम यू.पी. आवास एवं विकास परिषद [Civil Appeal No. 14604/2024] [2024 SCC OnLine SC 3767] में ऐतिहासिक फैसला देते हुए कहा है – “अवैध निर्माण को किसी भी कीमत पर नियमित (Regularize) नहीं किया जा सकता। अवैध निर्माण को तोड़ा ही जाना चाहिए, इसका कोई दूसरा रास्ता नहीं है। पैसे खर्च होने या समय बीत जाने का हवाला देकर इसे वैध नहीं बनाया जा सकता।”
सुप्रीम कोर्ट ने ही एम.सी. मेहता बनाम भारत संघ (2006) मामले में दिल्ली में बड़े पैमाने पर सीलिंग अभियान शुरू कराया था।
- दिल्ली हाईकोर्ट का पहाड़गंज पर सीधा आदेश: दिल्ली हाईकोर्ट ने इसी पहाड़गंज को लेकर सख्त रुख अपनाया है। जस्टिस मिनी पुष्करणा ने गली नं. 9, चूना मंडी, पहाड़गंज के एक मामले में एमसीडी को तुरंत और कानून के अनुसार कार्रवाई करने और स्थानीय SHO को आगे अवैध निर्माण रोकने का निर्देश दिया था।
इसके अलावा हाईकोर्ट ने एक अन्य मामले में टिप्पणी की थी कि “दिल्ली में अभूतपूर्व पैमाने पर अवैध निर्माण हो रहा है, वो भी दिल्ली के दिल में। इसके लिए एमसीडी और डीडीए को स्ट्रक्चरल सुधार करने होंगे और अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करनी होगी।”
कोर्ट ने यह भी कहा है कि अधिकारी अवैध निर्माण से मिलीभगत कर रहे हैं और बिना उनकी आंख बंद किए इतना निर्माण संभव नहीं है।
“ट्रिपल इंजन सरकार भी आखिर क्यों है बेबस” ?
सवाल यह है कि जब सुप्रीम कोर्ट कह रहा है कि अवैध निर्माण को बेरहमी से तोड़ा जाए और हाईकोर्ट पहाड़गंज में ही कार्रवाई का आदेश दे रहा है, तो फिर भू-माफिया बिल्डरों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? स्थानीय जनता का कहना है कि रसूखदारों और नेताओं के आगे अधिकारी बेबस हैं। जनता अब पूछ रही है कि पहाड़गंज को ‘होटल गंज’ बनाने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई होगी या वोट के समय जनता इसका हिसाब लेगी।