बड़ी खबर – पहाड़गंज से : गली हरि मंदिर में 5 फुट की गली में अवैध होटल को लाइसेंस देने की तैयारी, बिना फायर NOC के MCD स्वास्थ्य विभाग में बड़ा खेल

नई दिल्ली, पहाड़गंज। राजधानी में अवैध होटलों पर सख्ती के तमाम दावों की पोल खोलता एक मामला पहाड़गंज के गली हरि मंदिर से सामने आया है। यहां मात्र 5 फुट की संकरी गली में बने एक अवैध होटल को दिल्ली नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग द्वारा लाइसेंस देने की तैयारी की जा रही है, वो भी बिना फायर NOC के।

जबकि दिल्ली सरकार के नए नियमों के अनुसार किसी भी होटल के लिए कम से कम 6 मीटर चौड़ी गली होना और फायर NOC होना अनिवार्य है।

“पहाड़गंज में ही ऑफिस खोलकर चल रहा लाइसेंस का अवैध धंधा”
जो जानकारी मिली है उसके अनुसार इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ है कि MCD स्वास्थ्य विभाग के लाइसेंस विभाग के अधिकारी / कर्मचारी ही पहाड़गंज क्षेत्र में ही कार्यालय बनाकर अपने निजी लोगों के माध्यम से अवैध रूप से ऑनलाइन लाइसेंस दिलाने का खेल खेल रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार, चाहे MCD का होटल लाइसेंस हो, स्पा का लाइसेंस हो या रेस्टोरेंट का लाइसेंस हो, आपको चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। कागज पूरे हों या न हों, सभी जरूरी कागजातों की पूर्ति ये विभाग खुद ही पूरी कर देगा, बस इनके निजी लोगों से संपर्क करना होता है।

इसी फार्मूले के तहत गली हरि मंदिर वाले इस अवैध होटल की फाइल भी आगे बढ़ाई जा रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि 5 फुट की गली में फायर की गाड़ी घुसना भी नामुमकिन है, अगर कोई हादसा हुआ तो दर्जनों जानें जा सकती हैं। करोल बाग अग्निकांड को लोग भूले नहीं हैं।

“नेताओं की शह पर तंग गलियों में बन रहे अवैध होटल”

स्थानीय निवासियों का आरोप है कि ऐसे ही पहाड़गंज के कई हिस्सों में तंग गलियों में नेताओं की शह पर अवैध रूप से होटल बनाए जा रहे हैं और MCD से लेकर दिल्ली सरकार के मंत्री से लेकर अधिकारी तक आंखें मूंदे बैठे हैं, एक और नए हादसे के होने पर घड़ियाली आंसू बहाने के लिए।

करोल बाग और अर्पित पैलेस जैसे हादसों के बाद भी सिस्टम नहीं सुधरा है। 5 फुट की गली में अगर आग लगी तो फायर ब्रिगेड की गाड़ी कैसे पहुंचेगी, इसका जवाब किसी के पास नहीं है।

मांग है कि इस पूरे मामले की दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच, CBI या विजिलेंस जांच हो और इस अवैध होटल के साथ-साथ पहाड़गंज में चल रहे पूरे लाइसेंस रैकेट पर कार्रवाई की जाए।

इस nexus की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए कि आखिर सरकारी कर्मचारी होते हुए पहाड़गंज में प्राइवेट ऑफिस किस नियम के तहत चल रहे हैं और ऑनलाइन सिस्टम में फर्जीवाड़ा कर कैसे अवैध होटलों, स्पा और रेस्टोरेंट को लाइसेंस बांटे जा रहे हैं।

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