मध्य जिला पुलिस ने 1.5 करोड़ रुपये की सनसनीखेज लूट की गुत्थी सुलझाते हुए 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में लूट को अंजाम देने वाले, साजिश रचने वाले और मास्टरमाइंड शामिल हैं। पुलिस ने लूटी गई रकम में से लगभग 1 करोड़ रुपये, वारदात में इस्तेमाल मोटरसाइकिल, लूट के पैसों से खरीदा गया मोबाइल और कपड़े बरामद किए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि लूट के दौरान असली पिस्टल नहीं, बल्कि पिस्टल के आकार के लाइटर से पीड़ित को डराया गया था।
यह कार्रवाई दरियागंज थाना, स्पेशल स्टाफ और एएटीएस, मध्य जिला की संयुक्त टीम ने की है।
वारदात का संक्षिप्त विवरण
7 सितंबर 2026 को शाम करीब 8 बजे शिकायतकर्ता, जो एक व्यापारी के लिए कैश कलेक्शन का काम करता है, अपने सहयोगी नरेश के साथ चर्च मिशन टी-पॉइंट से एक टीएसआर में सवार होकर सफदरजंग जा रहा था। ऑटो में 3 करोड़ रुपये नकद से भरे दो बैग थे, जिनमें 1.5-1.5 करोड़ रुपये थे। यह रकम एक प्रॉपर्टी कारोबारी की थी।
जब ऑटो गीता कॉलोनी फ्लाईओवर, आउटर रिंग रोड के पास पहुंचा, तो काली स्प्लेंडर मोटरसाइकिल पर सवार तीन अज्ञात बदमाशों ने ऑटो को घेर लिया। दोनों तरफ से पिस्टल जैसी वस्तु दिखाकर बंदूक की नोक पर 1.5 करोड़ रुपये से भरा एक बैग लूट लिया और आईटीओ की तरफ फरार हो गए।
इस संबंध में थाना दरियागंज में FIR No. 329/2026 दिनांक 08.09.2026, धारा 309(4)/309(6)/3(5) BNS [392/397/34 IPC] व 27 आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया।
टीम और ऑपरेशन
मामले की गंभीरता को देखते हुए SHO दरियागंज निरीक्षक अजय शर्मा, इंचार्ज स्पेशल स्टाफ निरीक्षक संदीप यादव और इंचार्ज एएटीएस निरीक्षक संदीप दहिया के नेतृत्व में संयुक्त टीम का गठन किया गया। टीम को एसीपी दरियागंज धीरज नरंग, एसीपी ऑप्स पदम सिंह राणा, एडिशनल डीसीपी प्रशांत चौधरी के मार्गदर्शन और डीसीपी सेंट्रल रोहित राजबीर सिंह के समग्र पर्यवेक्षण में काम करने का निर्देश दिया गया।
पुलिस टीम ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया। चार दिनों तक लगातार सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए, पीड़ितों के आने-जाने के रूट को रीकंस्ट्रक्ट किया गया और तकनीकी व मानवीय खुफिया जानकारी जुटाई गई। जांच में खुलासा हुआ कि यह लूट प्राइवेट नौकरी करने वाले युवाओं के एक संगठित गिरोह ने की थी, जो पैसों की तंगी से जूझ रहे थे। सभी की भूमिका पहले से तय थी।
ऐसे हुई गिरफ्तारी
सबसे पहले पुलिस ने 12 सितंबर 2026 को आनंद विहार बस टर्मिनल से आरोपी सूरज पांडे को गिरफ्तार किया, जब वह यूपी भागने की फिराक में था। पूछताछ में उसने पूरी साजिश का खुलासा किया।
सूरज ने बताया कि चांदनी चौक इलाके में कैश की आवाजाही की पहले से रेकी की गई थी। मुख्य साजिशकर्ता रिंकू और दीपक ने पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन टी-पॉइंट पर पीड़ितों को चिह्नित किया और टीएसआर में बैठने के बाद उनका पीछा किया। वारदात के दिन संदीप उर्फ सैंडी बाइक चला रहा था, बीच में सूरज पांडे और पीछे दीपक गोस्वामी बैठा था। लूट के बाद सभी आरोपी नवादा, दिल्ली के एक किराए के कमरे में इकट्ठा हुए और रकम बांट ली।
उसकी निशानदेही पर पुलिस ने दिल्ली, हरियाणा और पंजाब में छापेमारी की –
13 सितंबर 2026 को नवादा, दिल्ली से आदर्श तिवारी और दीपक गोस्वामी गिरफ्तार। इनके पास से 32.5 लाख रुपये नकद और लूट के पैसों से खरीदी गई नई मोटरसाइकिल बरामद।
13 सितंबर को ही फरीदाबाद, हरियाणा से संदीप गिरफ्तार, 11 लाख रुपये बरामद।
13 सितंबर को ही लुधियाना, पंजाब से मास्टरमाइंड रिंकू गिरफ्तार, 37.5 लाख रुपये बरामद।
सूरज पांडे के पास से 17 लाख रुपये और लूट के पैसों से खरीदा गया एप्पल आईफोन बरामद हुआ है।
बरामदगी 1. लूटी गई रकम में से लगभग 1 करोड़ रुपये नकद 2. वारदात के समय पहने गए कपड़े और जूते 3. लूट के पैसों से खरीदी गई लगभग 2.10 लाख की मोटरसाइकिल 4. लूट के पैसों से खरीदा गया मोबाइल फोन 5. वारदात में इस्तेमाल पिस्टल के आकार का लाइटर आरोपियों की प्रोफाइल
पुलिस के मुताबिक मास्टरमाइंड रिंकू (27 वर्ष, लुधियाना) करोल बाग में एक दुकान पर अकाउंटेंट था। वह पहले अपने मालिक के लिए कैश लाने-ले जाने का काम करता था। रैपिडो राइड के दौरान उसकी मुलाकात प्रिंस से हुई। आदर्श तिवारी (22 वर्ष, नजफगढ़) ट्यूशन सेंटर चलाता था और रेकी में शामिल था। दीपक गोस्वामी (25 वर्ष) और सूरज पांडे (20 वर्ष) व संदीप उर्फ सैंडी (21 वर्ष) लूट को अंजाम देने वाले (Executor) हैं।
छठा आरोपी प्रिंस (26 वर्ष, फरीदाबाद) अभी फरार है, जिसकी बाइक DL-3S-JE-** वारदात में इस्तेमाल हुई थी। आरोपी संदीप पहले हरियाणा में पॉक्सो के एक मामले में जेल जा चुका है।
पुलिस का कहना है कि फरार आरोपी प्रिंस की तलाश और बाकी रकम की बरामदगी के लिए आगे की जांच जारी है।