जानिए जरूरी सवाल जवाब
प्रश्न 1. ड्रग-रेजिस्टेंट टी.बी. क्या है?
उत्तर: जब टी.बी. के बैक्टीरिया एक या अधिक एंटी-टी.बी. दवाओं के प्रति प्रतिरोधी हो जाते हैं, तो इसे ड्रग-रेजिस्टेंट टी.बी. (DR-TB) कहते हैं। इनमें रिफैम्पिसिन-रेजिस्टेंट टी.बी. (RR-TB) और मल्टीड्रग-रेजिस्टेंट टी.बी. (MDR-TB) प्रमुख हैं। MDR-TB में बैक्टीरिया कम-से-कम रिफैम्पिसिन और आइसोनियाजिड के प्रति प्रतिरोधी होते हैं।
प्रश्न 2. क्या भारत में ड्रग-रेजिस्टेंट टी.बी. एक बड़ी समस्या है?
उत्तर: हाँ। भारत दुनिया में MDR/RR-TB के सबसे बड़े बोझ वाले देशों में है। WHO Global Tuberculosis Report 2025 के अनुसार, वर्ष 2024 में दुनिया में अनुमानित 3.90 लाख लोगों में MDR/RR-TB विकसित हुई, जिनमें लगभग 32% भारत में थे। इसका अर्थ है कि भारत में लगभग 1.25 लाख नए MDR/RR-TB मामलों का अनुमान था। यह एक अनुमानित बीमारी का बोझ है, इसे वास्तविक रूप से जांचे या अधिसूचित किए गए मरीजों की संख्या नहीं समझना चाहिए।
प्रश्न 3. क्या टी.बी. का अधूरा इलाज ड्रग-रेजिस्टेंस पैदा कर सकता है?
उत्तर: हाँ, अधूरा या गलत तरीके से किया गया इलाज ड्रग-रेजिस्टेंस के विकास में योगदान कर सकता है। यदि सही दवाएं, सही संयोजन और सही अवधि में नहीं ली जातीं, तो संवेदनशील बैक्टीरिया नष्ट हो सकते हैं, जबकि प्रतिरोधी बैक्टीरिया जीवित रहकर बढ़ सकते हैं। लेकिन यह कहना सही नहीं होगा कि हर ड्रग-रेजिस्टेंट टी.बी. अधूरे इलाज के कारण ही होती है। किसी व्यक्ति को पहले से ड्रग-रेजिस्टेंट टी.बी. वाले व्यक्ति से संक्रमण भी हो सकता है।
प्रश्न 4. इलाज के दौरान ड्रग-रेजिस्टेंस कैसे विकसित हो सकती है?
उत्तर: यदि टी.बी. के बैक्टीरिया को अपर्याप्त या अनुपयुक्त दवा-प्रणाली का सामना करना पड़ता है, तो कुछ प्रतिरोधी बैक्टीरिया बच सकते हैं और उनकी संख्या बढ़ सकती है। इससे इलाज असफल हो सकता है और ड्रग-रेजिस्टेंस विकसित या बढ़ सकती है। इसलिए मरीज को अपने आप कोई दवा बंद, शुरू या बदलनी नहीं चाहिए।
प्रश्न 5. क्या ऐसा व्यक्ति भी MDR-TB से पीड़ित हो सकता है जिसने पहले कभी टी.बी. की दवा नहीं ली?
उत्तर: हाँ, बिल्कुल। यह एक महत्वपूर्ण तथ्य है। यदि कोई व्यक्ति पहले से ड्रग-रेजिस्टेंट टी.बी. से संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आता है, तो उसे सीधे ड्रग-रेजिस्टेंट टी.बी. का संक्रमण हो सकता है। इसलिए ड्रग-रेजिस्टेंस हमेशा पिछले इलाज की गलती का परिणाम नहीं होती; यह संक्रमण के माध्यम से भी प्राप्त हो सकती है।
प्रश्न 6. ड्रग-रेजिस्टेंट टी.बी. की पहचान कैसे की जाती है?
उत्तर: आज कई तेज आणविक जांच उपलब्ध हैं जो टी.बी. की पहचान के साथ-साथ महत्वपूर्ण दवाओं के प्रति प्रतिरोध की जानकारी भी जल्दी दे सकती हैं। CBNAAT और Truenat जैसी जांचें रिफैम्पिसिन-रेजिस्टेंस की पहचान में उपयोगी हैं। आवश्यकता के अनुसार Line Probe Assay (LPA), कल्चर और Drug Susceptibility Testing (DST) जैसी अन्य जांचें भी की जा सकती हैं।
भारत में ड्रग-रेजिस्टेंस की जांच की पहुंच में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। WHO के अनुसार, 2024 में भारत उन उच्च MDR/RR-TB बोझ वाले देशों में था जहां बैक्टीरियोलॉजिकल रूप से पुष्टि किए गए पल्मोनरी टी.बी. के मरीजों में रिफैम्पिसिन रेजिस्टेंस की जांच की कवरेज कम-से-कम 80% तक पहुंची।
प्रश्न 7. MDR-TB, Pre-XDR-TB और XDR-TB में क्या अंतर है?
उत्तर: MDR-TB: कम-से-कम रिफैम्पिसिन और आइसोनियाजिड के प्रति प्रतिरोध।
Pre-XDR-TB: MDR/RR-TB के साथ किसी फ्लुओरोक्विनोलोन, जैसे लेवोफ्लॉक्सासिन या मोक्सीफ्लॉक्सासिन, के प्रति अतिरिक्त प्रतिरोध।
XDR-TB: वर्तमान WHO परिभाषा के अनुसार MDR/RR-TB के साथ फ्लुओरोक्विनोलोन तथा कम-से-कम एक अन्य Group A दवा—बेडाक्विलिन या लाइनजोलिड—के प्रति प्रतिरोध।
इन परिभाषाओं में समय के साथ बदलाव हुए हैं, इसलिए पुराने स्रोतों में दी गई XDR-TB की परिभाषा वर्तमान परिभाषा से अलग हो सकती है।
प्रश्न 8. क्या ड्रग-रेजिस्टेंट टी.बी. का इलाज संभव है?
उत्तर: हाँ। ड्रग-रेजिस्टेंट टी.बी. इलाज योग्य और ठीक होने वाली बीमारी है, हालांकि इसका उपचार अधिक जटिल हो सकता है और मरीज के Drug Susceptibility Testing तथा अन्य चिकित्सकीय परिस्थितियों के अनुसार उचित regimen चुनना आवश्यक होता है।
पिछले कुछ वर्षों में उपचार में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है और पात्र मरीजों के लिए छोटे, पूरी तरह oral उपचार विकल्प उपलब्ध हैं। WHO के अनुसार MDR/RR-TB उपचार शुरू करने वाले मरीजों में वैश्विक treatment success rate 2012 में 50% से बढ़कर 2022 में 71% हो गया।
प्रश्न 9. ड्रग-रेजिस्टेंस की जल्दी जांच इतनी महत्वपूर्ण क्यों है?
उत्तर: यदि ड्रग-रेजिस्टेंस का समय पर पता चल जाए, तो मरीज को उसकी बीमारी के अनुरूप सही उपचार दिया जा सकता है और ऐसी दवाओं के अनावश्यक इस्तेमाल से बचा जा सकता है जिनके प्रति बैक्टीरिया प्रतिरोधी हैं। जल्दी पहचान से इलाज शुरू करने में देरी कम होती है और संक्रमण को दूसरे लोगों तक पहुंचने का जोखिम भी कम किया जा सकता है।
जल्दी जांच → सही उपचार → बेहतर परिणाम → कम संक्रमण
प्रश्न 10. यदि टी.बी. की दवाओं से परेशानी या साइड इफेक्ट हो तो मरीज को क्या करना चाहिए?
उत्तर: मरीज को स्वयं दवा बंद नहीं करनी चाहिए। तुरंत अपने उपचार कर रहे डॉक्टर या स्वास्थ्यकर्मी से संपर्क करना चाहिए। दवाओं के दुष्प्रभाव, काम या आर्थिक समस्या, यात्रा, सामाजिक परिस्थितियां या अन्य कठिनाइयां—इन सभी पर उपचार टीम से चर्चा की जानी चाहिए।
समस्या का समय पर समाधान, इलाज बीच में छोड़ने से कहीं बेहतर है।
प्रश्न 11. परिवार के सदस्य ड्रग-रेजिस्टेंट टी.बी. के संक्रमण को रोकने में कैसे मदद कर सकते हैं?
उत्तर: परिवार मरीज को नियमित उपचार लेने में सहयोग कर सकता है, डॉक्टर की सलाह के अनुसार follow-up सुनिश्चित कर सकता है, घर में पर्याप्त ventilation रख सकता है और खांसते समय उचित सावधानियां बरत सकता है। करीबी संपर्क में आए लोगों को भी चिकित्सकीय सलाह के अनुसार टी.बी. की जांच करानी चाहिए।
डॉ. एस. के. अरोड़ा की सलाह :
“ड्रग-रेजिस्टेंट टी.बी. केवल मरीज द्वारा इलाज बीच में छोड़ने का परिणाम नहीं है। यह अनुपयुक्त या अपर्याप्त उपचार के दौरान विकसित हो सकती है और किसी ऐसे व्यक्ति से संक्रमण के कारण भी हो सकती है जिसे पहले से ड्रग-रेजिस्टेंट टी.बी. है। इसलिए ड्रग-रेजिस्टेंस की जल्दी पहचान, सही उपचार, उपचार के दौरान निरंतर सहयोग और संक्रमण की रोकथाम—सभी आवश्यक हैं। टी.बी. की दवाएं अपने आप कभी बंद या बदलें नहीं।” याद रखें प्रतिरोध की जांच करके सही उपचार लें और इलाज पूरा करें तथा संक्रमण को रोकें
तंबाकू छोड़ें → टी.बी. रोकें → जीवन बचाएँ
डॉ. एस.के. अरोड़ा
सीनियर चेस्ट विशेषज्ञ,कंसल्टेंट,
पूर्व दिल्ली स्टेट टीबी हेड, दिल्ली सरकार (डब्ल्यूएचओ द्वारा सम्मानित)
TB Expert | Tobacco Control Advocate | Public Health (India).