विशेष संवाददाता
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के पहाड़गंज इलाके में अवैध निर्माण और प्रशासनिक लापरवाही का ऐसा मामला सामने आया है जिसने सत्ता, संगठन और सिस्टम—तीनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस दिल्ली में केंद्र से लेकर नगर निगम तक भाजपा की सरकार और सत्ता है, उसी पार्टी की महिला मोर्चा की पूर्व महामंत्री आज अपने ही घर को बचाने के लिए सरकारी दफ्तरों की चौखटें नापने को मजबूर दिखाई दे रही हैं। मामला पहाड़गंज के 6 टूटी चौक स्थित दीनानाथ बिल्डिंग और उससे जुड़ी प्रॉपर्टियों का है, जहां कथित रूप से प्रॉपर्टी संख्या 5035 से 5041 तक छह मकानों को जोड़कर बड़े स्तर पर अवैध निर्माण कर होटल बनाने का कार्य धड़ल्ले से चल रहा है।
स्थानीय शिकायतकर्ता और आसपास के निवासियों का आरोप है कि इस निर्माण कार्य ने पूरे इलाके की सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है। आरोप है कि निर्माण करने वाले बिल्डर द्वारा गहरी बेसमेंट खुदाई की जा रही है, जिससे आसपास के मकानों में दरारें पड़ चुकी हैं और कई मकान कमजोर हो गए हैं। शिकायतकर्ता महिला का कहना है कि उसके मकान को भी गंभीर क्षति पहुंची है और कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। इसके बावजूद न तो प्रशासन कार्रवाई कर रहा है और न ही कोई जनप्रतिनिधि पीड़ित परिवार की सुनने को तैयार है।
स्थानीय लोगों ने बताया कि दिन में निर्माण कार्य खुल्लमखुल्ला चलता है, जबकि रात के समय जेसीबी मशीनों से बेसमेंट की खुदाई की जाती है। रातभर चलने वाले इस शोर और कंपन के कारण लोगों का सोना तक मुश्किल हो गया है। निवासियों का कहना है कि इलाके में लगातार भय का माहौल बना हुआ है क्योंकि बेसमेंट की खुदाई से आसपास की इमारतों की नींव कमजोर हो रही है और किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है। लोगों ने यह भी दावा किया कि कुछ समय पहले इसी निर्माण स्थल पर आग लगने की घटना भी हुई थी, जिसके बाद फायर ब्रिगेड की गाड़ियां मौके पर पहुंची थीं। उस समय शिकायतों के बाद निर्माण कार्य कुछ समय के लिए रोका गया था, लेकिन अब फिर से काम पहले की तरह शुरू हो चुका है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि संबंधित प्रॉपर्टी डीडीए स्लम क्षेत्र से जुड़ी बताई जा रही है, इसके बावजूद नियमों को ताक पर रखकर होटल निर्माण का काम जारी है। सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर इतनी बड़ी खुदाई, भारी मशीनों का इस्तेमाल और कई मकानों को जोड़कर हो रहे निर्माण के बावजूद संबंधित विभागों की आंखें क्यों बंद हैं? क्या नगर निगम, पुलिस और अन्य विभागों को यह अवैध गतिविधियां दिखाई नहीं दे रहीं, या फिर सब कुछ किसी बड़े संरक्षण में चल रहा है?
इस पूरे मामले ने भाजपा संगठन पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि जब अपनी ही पार्टी की महिला कार्यकर्ता को न्याय नहीं मिल पा रहा, तो आम जनता की सुनवाई किस हाल में होती होगी। स्थानीय लोगों का कहना है कि सत्ता और संगठन के बड़े-बड़े दावे केवल मंचों और भाषणों तक सीमित नजर आ रहे हैं, जबकि जमीनी स्तर पर अवैध निर्माण माफिया खुलेआम कानून को चुनौती दे रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट समय-समय पर दिल्ली में अवैध निर्माण और बेसमेंट खुदाई को लेकर सख्त आदेश दे चुका है, लेकिन पहाड़गंज का यह मामला उन आदेशों की खुलेआम धज्जियां उड़ाता दिखाई दे रहा है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो यहां कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है और उसकी जिम्मेदारी सीधे प्रशासन और संबंधित विभागों पर होगी।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर दिल्ली में कानून का राज चलेगा या फिर रसूख और पहुंच रखने वालों का? क्या प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है, या फिर इस अवैध निर्माण पर सचमुच सख्त कार्रवाई होगी ?