दिल्ली पुलिस की एक बड़ी कामयाबी में रेलवे यूनिट ने बाल तस्करी के एक संगठित नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए आठ मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया और अपहृत शिशु को सुरक्षित बचा लिया। यह कार्रवाई नई दिल्ली रेलवे स्टेशन (एनडीआरएस) अजमेरी गेट साइड के प्रतीक्षालय से डेढ़ वर्षीय शिशु के अपहरण के बाद शुरू की गई थी।
बी. भारत रेड्डी, आईपीएस पुलिस उपायुक्त, रेलवे यूनिट, नई दिल्ली ने बताया कि शिकायतकर्ता उम्र लगभग 26 वर्ष, निवासी गाजियाबाद, उ.प्र. ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि उनका कोई स्थायी पता नहीं है। वह पिछले एक साल से अपने पति से अलग रह रही थीं और अपने डेढ़ वर्षीय बेटे के साथ नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के मुख्य हॉल में रह रही थीं। दिनांक 24.05.2026 को सुबह लगभग 6:30 बजे उन्होंने अपने बेटे को गायब पाया और आशंका जताई कि किसी ने उसका अपहरण कर लिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए रेलवे यूनिट, दिल्ली पुलिस ने तत्काल जांच शुरू की और लापता शिशु का पता लगाने व अपराधियों को पकड़ने के लिए एक विशेष टीम का गठन किया।
टीम का गठन एवं जांच: यह जांच निरीक्षक विश्वनाथ पासवान, एसएचओ/एनडीआरएस, निरीक्षक याकूब खान, एटीओ/एनडीआरएस, एसआई दीप शर्मा, एएसआई बगीचा सिंह, एएसआई संतोष, एएसआई भारत सिंह, एचसी गौरव तोमर, एचसी दिलबाग, कॉन्स्टेबल अमित, कॉन्स्टेबल साहिल, कॉन्स्टेबल प्रवीण, कॉन्स्टेबल गुलशन, महिला कॉन्स्टेबल बबीता, महिला कॉन्स्टेबल रीता और महिला कॉन्स्टेबल रीतू की एक समर्पित टीम द्वारा की गई। यह कार्रवाई श्री राजेश कुमार, एसीपी/रेलवे, एसीपी श्री संजय भारद्वाज के पर्यवेक्षण तथा अधोहस्ताक्षरी के समग्र निर्देशन में की गई। टीम के अथक प्रयासों और विस्तृत जांच ने मामले को सुलझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
तत्काल कार्रवाई एवं सीसीटीवी फुटेज विश्लेषण: सीसीटीवी फुटेज विश्लेषण से पता चला कि तीन व्यक्तियों ने डेढ़ साल के बच्चे का अपहरण किया। वे बच्चे के साथ नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से निकले और बैटरी-रिक्शा में सवार हुए। बैटरी-रिक्शा को ट्रेस करने पर पता चला कि संदिग्ध बच्चे के साथ मोरी गेट, दिल्ली पर उतरे। वहां से वे दूसरे ऑटो-रिक्शा से शास्त्री पार्क पहुंचे, फिर ऑटो बदलकर कासिम विहार, गाजियाबाद, उ.प्र. गए। इसके बाद वे फिर ऑटो-रिक्शा से शास्त्री पार्क की ओर गए। आगे कोई मूवमेंट ट्रेस नहीं हो सका। पीड़ित और संदिग्धों के फोटो पोस्टरों के माध्यम से यूपी व दिल्ली के विभिन्न स्थानों पर प्रसारित किए गए। हरिद्वार से सूचना मिली कि उसी तौर-तरीके से वहां भी एक बच्ची का अपहरण किया गया है और संदिग्ध भी वही हैं।
सीसीटीवी निगरानी का विस्तार एवं ऑटो-रिक्शा की पहचान: व्यापक ट्रैकिंग ऑपरेशन की आवश्यकता को समझते हुए, पुलिस टीम ने एनडीआरएस से कासिम विहार, गाजियाबाद तक लगभग 300 सीसीटीवी कैमरों की गहनता से जांच की। विस्तृत सीसीटीवी विश्लेषण से बैटरी रिक्शा का पंजीकरण नंबर और अन्य ऑटो रिक्शा की पहचान हुई, जिससे पुष्टि हुई कि उपरोक्त तीनों आरोपी एनडीआरएस से कासिम विहार तक गए थे।
समन्वित छापेमारी एवं गिरफ्तारी: रेलवे यूनिट, दिल्ली पुलिस द्वारा की गई निरंतर और बहुस्तरीय जांच — जिसमें सीसीटीवी निगरानी, जन-संपर्क, डिजिटल फोरेंसिक और समन्वित छापेमारी शामिल थी — के परिणामस्वरूप बाल तस्करी सिंडिकेट का भंडाफोड़ हुआ। पुलिस ने विभिन्न स्थानों पर एक साथ छापेमारी कर आरोपियों को गिरफ्तार किया गया जिसमें शिवा उर्फ गौरव पुत्र स्व. राजेंद्र प्रसाद, निवासी गांव पचरुखी गर्गमुहल्ला, थाना सिवान सिटी, जिला सिवान, बिहार (वर्तमान पता: झुग्गी- जटवाड़ापुल कोतवाली, ज्वालापुर, हरिद्वार), उम्र 24 वर्ष 2. धर्मेंद्र पुत्र होसराम, निवासी सिकंदरपुर, थाना भोपा, जिला मुजफ्फरनगर, उ.प्र., उम्र 36 वर्ष 3. अकील पुत्र अनीस अहमद, निवासी पैतीकलां, मिया सबुकिमकर, थाना डिडौली, जिला अमरोहा, उ.प्र., उम्र 28 वर्ष 4. प्रीति शर्मा पत्नी धर्मेंद्र, निवासी सिकंदरपुर, थाना भोपा, जिला मुजफ्फरनगर, उ.प्र., उम्र 36 वर्ष 5. पूजा पत्नी विनय पुरी, निवासी म.नं. 02/406, गीता मंदिर के पास, सेक्टर-2, जवाहर नगर, जयपुर, राजस्थान, उम्र 34 वर्ष 6. आरती पत्नी सोनू, निवासी मोहल्ला बजरिया, सहसवान, जिला बदायूं, उ.प्र., उम्र 38 वर्ष 7. विशाल पुत्र धर्मेंद्र, निवासी मोहम्मदपुर झरोड़ा, सेक्टर-37, गुरुग्राम, हरियाणा, उम्र 19 वर्ष 8. जिया पुत्र पूरन सिंह, निवासी रामदरबार, फेज-II, चंडीगढ़, उम्र 26 वर्ष शामिल है।
प्रीति, धर्मेंद्र और अकील के खुलासे के आधार पर तस्करी किए गए शिशु को बरामद किया गया, जिससे बाल तस्करी नेटवर्क की सीमा की पुष्टि हुई। एनडीआरएस से अपहृत बच्चे को आरती और पूजा से सुरक्षित बरामद किया गया। बचाए गए शिशु को चिकित्सा, सुरक्षा और कल्याण के लिए ‘मातृ छाया’ की देखरेख में रखा गया है।
जन परामर्श एवं निवारक उपाय: रेलवे यूनिट, दिल्ली पुलिस नागरिकों से आग्रह करती है कि वे सतर्क रहें और बच्चों की सुरक्षा के लिए निम्नलिखित सावधानियां बरतें:
- माता-पिता एवं अभिभावक: रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और बाजार जैसी भीड़-भाड़ वाली जगहों पर बच्चों पर हमेशा कड़ी नजर रखें। उन्हें अकेला न छोड़ें। • गोद लेने की जागरूकता: सुनिश्चित करें कि सभी गोद लेने की प्रक्रिया केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) जैसी मान्यता प्राप्त एजेंसियों के माध्यम से कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करे। कानूनी चैनलों के बाहर कोई भी गोद लेना बाल तस्करी से जुड़ा हो सकता है। • संदिग्ध गतिविधियों की रिपोर्ट करें: यदि आपको कोई व्यक्ति किसी बच्चे के साथ संदिग्ध रूप से व्यवहार करता दिखे, तो तुरंत 112 पर पुलिस को सूचित करें या निकटतम पुलिस स्टेशन जाएं। • सामुदायिक जागरूकता: यदि आपको लापता बच्चे मिलें या बाल तस्करी का संदेह हो, तो दिल्ली पुलिस की मानव तस्करी रोधी इकाई या बाल संरक्षण के लिए काम करने वाले एनजीओ को रिपोर्ट करें।
निष्कर्ष: रेलवे यूनिट, दिल्ली पुलिस के लिए ऐतिहासिक सफलता: यह ऑपरेशन बाल तस्करी से निपटने और कमजोर बच्चों की रक्षा के लिए रेलवे यूनिट, दिल्ली पुलिस की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इस संगठित तस्करी नेटवर्क को ध्वस्त करने में जांच टीम का समर्पण महत्वपूर्ण था।
अधिक सहायता के लिए संपर्क करें:
📞 दिल्ली पुलिस हेल्पलाइन: 112
📞 मानव तस्करी रोधी इकाई: 011-23239077
📞 चाइल्ड हेल्पलाइन: 1098
मामले की वर्तमान स्थिति: दो आरोपी, आरती और पूजा को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है और छह आरोपी – जिया, प्रीति, विशाल, शिवा, महेंद्र और अकील पुलिस हिरासत रिमांड पर हैं। अन्य पीड़ितों और सहयोगियों की पहचान के लिए आगे की जांच जारी है।