नई दिल्ली। पहाड़गंज के आर्य नगर स्थित 8421 नंबर भवन में संचालित बताए जा रहे ‘ब्लू बेल्स’ बेड एंड ब्रेकफास्ट को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों और दिल्ली पर्यटन विभाग की ओर से की गई कार्रवाई के बाद जिस प्रतिष्ठान को बंद कराया गया था, उसे अब संबंधित आदेशों और निर्देशों की अनदेखी करते हुए दोबारा खोल दिया गया है। इस मामले में बलविंदर कपूर का नाम सामने आ रहा है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि संबंधित विभागों के आधिकारिक अभिलेखों और मौके पर हुई कार्रवाई की रिपोर्ट से ही हो सकेगी।
मामले से जुड़े लोगों का कहना है कि 8421, आर्य नगर, पहाड़गंज स्थित इस प्रतिष्ठान के संचालन को लेकर पहले पुलिस तथा दिल्ली पर्यटन विभाग के स्तर पर कार्रवाई की गई थी। आरोप है कि सक्षम अधिकारियों के निर्देशों के बाद प्रतिष्ठान को बंद कराया गया था, लेकिन अब कथित तौर पर इसे फिर से संचालित किया जा रहा है। यदि वास्तव में किसी सक्षम प्राधिकारी की ओर से परिसर को बंद रखने अथवा संचालन पर रोक लगाने का लिखित आदेश जारी किया गया था, तो उसके बावजूद प्रतिष्ठान का दोबारा खुलना प्रशासनिक आदेशों की अवहेलना का गंभीर विषय बन सकता है।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि दिल्ली में होटल, गेस्ट हाउस और बेड एंड ब्रेकफास्ट प्रतिष्ठानों के संचालन के लिए निर्धारित नियमों और आवश्यक अनुमतियों का पालन करना अनिवार्य है। ऐसे प्रतिष्ठानों में सुरक्षा, अग्निशमन व्यवस्था, भवन उपयोग, पुलिस सत्यापन, पर्यटकों के रिकॉर्ड और संबंधित विभागों से आवश्यक अनुमति जैसे पहलू महत्वपूर्ण होते हैं। किसी प्रतिष्ठान को पहले बंद कराया गया हो तो उसके पुनः संचालन से पहले संबंधित विभागों से वैध अनुमति और अनुपालन की स्थिति स्पष्ट होना आवश्यक है।
मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि ‘ब्लू बेल्स’ को वास्तव में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों अथवा दिल्ली पर्यटन विभाग के आदेश पर बंद कराया गया था, तो उसे पुनः खोलने की अनुमति किस विभाग ने दी? क्या बंदी के बाद सभी कमियों को दूर कर आवश्यक दस्तावेज और अनुमतियां दोबारा प्राप्त की गईं? क्या मौके पर संबंधित विभागों के अधिकारियों ने निरीक्षण कर संचालन की अनुमति दी? और यदि ऐसी कोई अनुमति नहीं दी गई, तो प्रतिष्ठान दोबारा कैसे संचालित हो रहा है?
स्थानीय स्तर पर यह भी मांग उठ रही है कि संबंधित पुलिस थाना, जिला पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी और दिल्ली पर्यटन विभाग संयुक्त रूप से मौके का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करें। यदि प्रतिष्ठान बिना वैध अनुमति के संचालित पाया जाता है अथवा किसी प्रभावी सरकारी आदेश के बावजूद खोला गया है, तो नियमों के अनुसार जिम्मेदार व्यक्ति के विरुद्ध कार्रवाई की जानी चाहिए।
इस पूरे मामले में दस्तावेजों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। पूर्व में जारी बंदी अथवा कार्रवाई के आदेश, निरीक्षण रिपोर्ट, नोटिस, प्रतिष्ठान का पंजीकरण, बेड एंड ब्रेकफास्ट की अनुमति, अग्निशमन प्रमाणपत्र तथा पुनः संचालन की अनुमति जैसे दस्तावेज यह स्पष्ट कर सकते हैं कि वर्तमान संचालन वैध है या नहीं।
आरोपों के केंद्र में बताए जा रहे भू स्वामी/लीजर का पक्ष भी इस मामले में महत्वपूर्ण है। यदि उनके पास प्रतिष्ठान दोबारा खोलने से संबंधित सक्षम विभाग की अनुमति या आदेश है, तो उसे सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाना चाहिए, ताकि लगाए जा रहे आरोपों की वास्तविकता सामने आ सके। दूसरी ओर, यदि कोई वैध अनुमति नहीं है और पूर्व का बंदी आदेश अभी प्रभावी है, तो संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी बनती है कि वे मौके की जांच कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई करें।
पहाड़गंज राजधानी दिल्ली का प्रमुख पर्यटन और होटल क्षेत्र है, जहां देश-विदेश से बड़ी संख्या में लोग ठहरते हैं। ऐसे में किसी भी होटल, गेस्ट हाउस या बेड एंड ब्रेकफास्ट प्रतिष्ठान का नियमों के अनुरूप संचालन केवल कारोबारी हित का विषय नहीं, बल्कि पर्यटकों की सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था से भी जुड़ा मामला है। इसलिए ‘ब्लू बेल्स’ के दोबारा खुलने की शिकायत की निष्पक्ष जांच और संबंधित आदेशों की स्थिति सार्वजनिक करना जरूरी है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि प्रतिष्ठान वैध अनुमति के साथ संचालित हो रहा है या सरकारी आदेशों की अनदेखी की जा रही है। पहाड़ गंज में ऐसे ही ना जाने कितने की अवैध होटल बेड एंड ब्रेकफास्ट स्कीम की आड में चल रहे हैं। जिनकी जांच जरूरी है।