टी.बी. से जुड़े सवाल – डॉ. एस. के. अरोड़ा के साथ : बुजुर्गों में टी.बी. – जब टी.बी. सामान्य रूप में दिखाई न दे

जानिए जरूरी सवाल जवाब

प्रश्न 1. क्या बुजुर्गों में टी.बी. आम है?

उत्तर: हाँ। टी.बी. किसी भी उम्र में हो सकती है, लेकिन बुजुर्गों में इसके प्रति विशेष सावधानी आवश्यक है। उम्र बढ़ने के साथ शरीर की प्रतिरोधक क्षमता में बदलाव आता है और कई बार वर्षों पहले हुआ टी.बी. संक्रमण दोबारा सक्रिय हो सकता है। विश्व स्तर पर अधिसूचित टी.बी. रोगियों में लगभग 12% लोग 65 वर्ष से अधिक उम्र के हैं।

प्रश्न 2. बुजुर्गों में टी.बी. की पहचान करना मुश्किल क्यों हो सकता है?

उत्तर: बुजुर्गों में टी.बी. हमेशा अपने पारंपरिक लक्षणों के साथ सामने नहीं आती। लगातार खाँसी, बलगम या तेज बुखार की बजाय भूख कम लगना, वजन कम होना, कमजोरी, थकान, हल्का या रुक-रुक कर आने वाला बुखार, सांस फूलना, गतिविधियों में कमी या कभी-कभी भ्रम और दैनिक कार्यक्षमता में गिरावट जैसे लक्षण प्रमुख हो सकते हैं।

इन लक्षणों को कई बार सामान्य बढ़ती उम्र या पहले से मौजूद बीमारी का हिस्सा मान लिया जाता है।

प्रश्न 3. बुजुर्गों में टी.बी. का निदान और चुनौतीपूर्ण क्यों हो जाता है?

उत्तर: बुजुर्गों में एक साथ कई बीमारियाँ हो सकती हैं—जैसे मधुमेह, COPD या अन्य पुरानी फेफड़ों की बीमारी, हृदय रोग, किडनी की बीमारी और कुपोषण। इन बीमारियों के लक्षण टी.बी. से मिलते-जुलते हो सकते हैं। इसके अलावा कई दवाएँ एक साथ लेने के कारण उपचार के दौरान दवा-दवा परस्पर प्रभाव और दुष्प्रभावों पर भी विशेष ध्यान देना पड़ता है।

प्रश्न 4. क्या बुजुर्गों में टी.बी. फेफड़ों के अलावा अन्य अंगों में भी हो सकती है?

उत्तर: बिल्कुल। टी.बी. केवल फेफड़ों तक सीमित नहीं है। यह लिम्फ नोड्स, हड्डियों और जोड़ों, रीढ़, पेट, मस्तिष्क तथा अन्य अंगों को भी प्रभावित कर सकती है। इसलिए यदि फेफड़ों के टी.बी. के सामान्य लक्षण न हों, तब भी टी.बी. की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता।

प्रश्न 5. किन लक्षणों में बुजुर्ग व्यक्ति में टी.बी. की जाँच के बारे में सोचना चाहिए?

उत्तर: यदि बिना स्पष्ट कारण वजन कम हो रहा हो, भूख कम हो गई हो, लगातार या बार-बार बुखार/रात में पसीना आता हो, दो सप्ताह से अधिक समय से खाँसी हो, सांस फूलती हो, एनीमिया का कारण स्पष्ट न हो, छाती की जाँच या इमेजिंग में नया बदलाव दिखाई दे, पहले टी.बी. हो चुकी हो या टी.बी. रोगी के संपर्क में रहे हों, तो टी.बी. की संभावना पर विचार करना चाहिए।

साथ ही, सामान्य उपचार के बावजूद बीमारी में सुधार न होना भी एक महत्वपूर्ण संकेत हो सकता है।

प्रश्न 6. क्या हर बुजुर्ग व्यक्ति की टी.बी. की स्क्रीनिंग आवश्यक है?

उत्तर: नहीं। हर बुजुर्ग व्यक्ति की अनिवार्य रूप से टी.बी. स्क्रीनिंग आवश्यक नहीं है। स्क्रीनिंग का निर्णय व्यक्ति के लक्षणों, जोखिम कारकों, संपर्क इतिहास और चिकित्सकीय मूल्यांकन के आधार पर होना चाहिए। मधुमेह, पुरानी फेफड़ों की बीमारी, कुपोषण, पहले टी.बी. का इतिहास या टी.बी. रोगी के निकट संपर्क जैसे कारकों की मौजूदगी में विशेष सतर्कता आवश्यक है।

प्रश्न 7. बुजुर्गों में टी.बी. की जाँच कैसे की जाती है?

उत्तर: जाँच रोगी के लक्षणों और बीमारी के संभावित स्थान के अनुसार की जाती है। इसमें छाती की इमेजिंग, बलगम की जाँच, Xpert MTB/RIF जैसे रैपिड मॉलिक्यूलर टेस्ट, कल्चर और दवा-संवेदनशीलता की जाँच शामिल हो सकती है। यदि टी.बी. फेफड़ों के बाहर होने का संदेह हो तो संबंधित अंग से आवश्यक नमूने की जाँच की जाती है।

प्रश्न 8. क्या बुजुर्गों में टी.बी. का उपचार अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है?

उत्तर: हाँ। बुजुर्गों में कई सह-रोग, कई दवाओं का सेवन और शरीर की कम शारीरिक क्षमता उपचार को अधिक जटिल बना सकती है। इसलिए उपचार के दौरान दवाओं की नियमितता, दुष्प्रभाव, अन्य दवाओं के साथ संभावित परस्पर प्रभाव और सह-रोगों के नियंत्रण पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है।

प्रश्न 9. टी.बी. से पीड़ित बुजुर्ग व्यक्ति की देखभाल में परिवार की क्या भूमिका है?

उत्तर: परिवार की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। दवाएँ नियमित रूप से लेने में सहायता करना, डॉक्टर की सलाह और जाँचों का पालन सुनिश्चित करना, पर्याप्त एवं पौष्टिक भोजन देना तथा दवाओं के किसी भी असामान्य दुष्प्रभाव की जानकारी समय पर देना उपचार को सफल बनाने में मदद करता है। बुजुर्ग रोगी को भावनात्मक और सामाजिक सहयोग भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

डॉ. एस. के. अरोड़ा की सलाह :

उम्र बढ़ना स्वाभाविक है, लेकिन हर कमजोरी को उम्र का असर न मानें—टी.बी. के बारे में भी सोचें।” यदि किसी बुजुर्ग व्यक्ति में बिना स्पष्ट कारण वजन कम हो रहा है, भूख कम है, लगातार कमजोरी है, बुखार, खाँसी या सांस फूलने की समस्या है अथवा सामान्य स्वास्थ्य में लगातार गिरावट हो रही है, तो इसके कारण की उचित जाँच आवश्यक है।

समय पर पहचान, सही जाँच और उचित उपचार गंभीर बीमारी को रोक सकते हैं और जीवन बचा सकते हैं।

“तंबाकू छोड़ें → टी.बी. रोकें → जीवन बचाएँ”

डॉ. एस.के. अरोड़ा
सीनियर चेस्ट विशेषज्ञ,कंसल्टेंट,
पूर्व दिल्ली स्टेट टीबी हेड, दिल्ली सरकार (डब्ल्यूएचओ द्वारा सम्मानित)
TB Expert | Tobacco Control Advocate | Public Health (India).

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