दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल (ईस्टर्न रेंज) ने सीलमपुर में हुए सनसनीखेज रोडरेज मर्डर केस के वांछित हथियारबंद बदमाश को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। आरोपी के कब्जे से एक सेमी-ऑटोमैटिक पिस्टल और 4 जिंदा कारतूस बरामद हुए हैं।
गिरफ्तारी का विवरण:
इंस्पेक्टर सुनील तेवतिया के नेतृत्व में और एसीपी/ईस्टर्न रेंज श्री राहुल कुमार सिंह के पर्यवेक्षण में स्पेशल सेल/ईआर की टीम ने एक रणनीतिक जाल बिछाकर आरोपी मो. गाजी उर्फ गाजी अब्बास (27 वर्ष), निवासी ब्रह्मपुरी, दिल्ली को मयूर विहार फेज-3 के पास से गिरफ्तार किया।
गिरफ्तारी 18 अक्टूबर 2026 की रात को SFS फ्लैट रोड, कांच रेस्टोरेंट के पास मयूर विहार फेज-3 में की गई, जब आरोपी अपने एक साथी से मिलने जा रहा था। तलाशी लेने पर उसके पास से अवैध हथियार बरामद हुआ।
घटना का संक्षिप्त विवरण:
दिनांक 14 अक्टूबर 2026 की शाम को गली नंबर 8, गौतमपुरी, दिल्ली के बाहर फायरिंग की घटना हुई थी। घायल व्यक्ति को जेपीसी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मृतक की पहचान वसीम निवासी सीलमपुर के रूप में हुई। इस संबंध में थाना सीलमपुर में FIR No. 358/26 दर्ज की गई थी।
जांच के दौरान पता चला कि 14 अक्टूबर की शाम को गली नंबर 8, गौतमपुरी में एक सफेद ब्रेजा कार की मामूली टक्कर को लेकर कहासुनी हो गई थी। देखते ही देखते विवाद हिंसक हो गया और आरोपी ने नजदीक से वसीम को गोली मार दी, जिससे उसकी मौत हो गई।
आरोपी के पास से 1 सेमी-ऑटोमैटिक पिस्टल और 4 जिंदा कारतूस बरामद हुए हैं।
पूछताछ में आरोपी ने अपना नाम मो. गाजी पुत्र सादिक अब्बास, निवासी ब्रह्मपुरी बताया। उसका जन्म 1 अप्रैल 1999 को दुर्गापुरी, दिल्ली में हुआ था। मूल रूप से उसका परिवार जिला बुलंदशहर, उत्तर प्रदेश का रहने वाला है। आरोपी ने गौतमपुरी के एक सरकारी स्कूल से सेकेंडरी शिक्षा प्राप्त की है और वर्तमान में मेरठ से डिस्टेंस लर्निंग के माध्यम से एलएलबी कर रहा है।
पढ़ाई में ध्यान न देना और इलाके के गलत संगत में पड़ने के कारण वह अपराध की दुनिया में चला गया। उसका पहला आपराधिक मामला FIR No. 99/2021, धारा 302/34 IPC, थाना जाफराबाद में दर्ज हुआ था, जिसके बाद वह लगभग तीन साल तक मंडोली जेल में बंद रहा। जेल के दौरान और बाद में वह स्थानीय अपराधियों के संपर्क में आकर अपराध में और लिप्त हो गया।
आरोपी के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है और अवैध हथियार सप्लाई नेटवर्क का पता लगाने के लिए आगे की जांच जारी है। अन्य सह-आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।