नई दिल्ली: आर्थिक अपराध शाखा (EOW), दिल्ली पुलिस ने ₹9 करोड़ की ठगी के मामले में फरार चल रहे उद्घोषित अपराधी सत्यानारायण अनोरिया को जयपुर से गिरफ्तार कर लिया है।
सुबोध कुमार गोस्वामी, पुलिस उपायुक्त, आर्थिक अपराध शाखा के मुताबिक EOW थाना में 07.04.2020 को दर्ज FIR No. 51/2020, धारा 420/419/120-B IPC के तहत 53 वर्षीय सत्यानारायण अनोरिया पुत्र स्व. प्रहलाद सिंह, निवासी शास्त्री नगर, जयपुर को गिरफ्तार किया गया है।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि वर्ष 2014 में आरोपी सत्यानारायण अनोरिया, अमित गुप्ता, राकेश गोयल, गणेश इंगोले व अन्य साथियों ने उसे “राइस पुलर”, रेडियोएक्टिव मिरर और अन्य दुर्लभ एंटीक सामान में निवेश करने के लिए प्रेरित किया। आरोपियों ने खुद को देश-विदेश की प्रतिष्ठित वैज्ञानिक संस्थाओं से जुड़ा विशेषज्ञ बताकर दावा किया कि केवल BARC, DRDO और पुरातत्व प्रयोगशालाओं के वैज्ञानिक ही इन वस्तुओं की प्रामाणिकता की जांच कर सकते हैं।
शिकायतकर्ता को बताया गया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऐसे एंटीक सामान की कीमत लगभग ₹11 करोड़ प्रति इंच है और उसे भारी मुनाफा होगा। टेस्टिंग चार्ज, सर्टिफिकेशन फीस व अन्य खर्चों के नाम पर आरोपियों ने शिकायतकर्ता से चेक, RTGS और नकद के माध्यम से लगभग ₹9 करोड़ वसूल लिए। न तो कोई वास्तविक जांच कराई गई और न ही कोई एंटीक सामान दिया गया।
आरोपियों ने सुनियोजित आपराधिक साजिश के तहत “राइस पुलर” और “रेडियोएक्टिव मिरर” को अत्यधिक वैज्ञानिक गुणों वाला और अंतरराष्ट्रीय बाजार में करोड़ों का बताकर शिकायतकर्ता को झांसे में लिया। खुद को वैज्ञानिक संस्थानों से जुड़ा बताकर BARC व DRDO के नाम पर फर्जी टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन का झांसा दिया गया। ₹9 करोड़ लेने के बाद न जांच हुई, न सामान मिला।
ACP नगीन कौशिक के निकट पर्यवेक्षण और DCP सुबोध कुमार गोस्वामी के समग्र मार्गदर्शन में SI देशपाल, HC मनीष कुमार व HC अमित कुमार की टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद आरोपी को जयपुर से गिरफ्तार किया।
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सत्यानारायण अनोरिया पहले MCD जयपुर में कर्मचारी था। 2018 में 6 इसी तरह के वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में संलिप्त पाए जाने पर उसे नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया था। वर्तमान में वह एक मंदिर में पुजारी का काम कर रहा था।
जयपुर में इसी तरह के 6 वित्तीय धोखाधड़ी के मामले दर्ज हैं।
पुलिस का कहना है;सतर्क नागरिक बनें। बिना सत्यापन के अत्यधिक मुनाफे का लालच देने वाली योजनाओं में निवेश न करें।