दिल्ली में भाजपा की वरिष्ठ कार्यकर्ता न्याय के लिए दर-दर भटकने को मजबूर, अवैध निर्माण से मकान में दरारें

नई दिल्ली: दिल्ली जहां हादसों का शहर बनती जा रही है। मालवीय नगर अग्निकांड हो या हाल ही में सत्य निकेतन में बिल्डिंग गिरने से मासूमों की मौत, इन सबके बावजूद राजधानी में अवैध निर्माण का खेल बेरोकटोक जारी है। ताजा मामला अक्सर सुर्खियों में रहने वाले पहाड़गंज का है।

पहाड़गंज की हर गली-कूचे में नियमों को ताक पर रखकर दिन-रात अवैध निर्माण चल रहा है। ऐसा ही एक मामला प्रॉपर्टी संख्या 5050, छे टूटी चौक, मेन बाजार, पहाड़गंज का सामने आया है। आरोप है कि यहां कई शिकायतों के बावजूद रात-दिन अवैध निर्माण जारी है।

पीड़िता के अनुसार, इस निर्माण में बिना किसी अनुमति के बेसमेंट भी बनाई जा रही है, जिसके कारण सटे हुए उनके मकान में दरारें आ गई हैं। मकान कभी भी गिर सकता है, लेकिन शिकायतों के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हो रही है।

सबसे बड़ी बात – पीड़िता खुद भाजपा की वरिष्ठ कार्यकर्ता

सबसे अहम बात यह है कि पीड़ित महिला खुद भाजपा की वरिष्ठ कार्यकर्ता हैं। पीड़िता अंजू सूद करोल बाग जिला की पूर्व महामंत्री रह चुकी हैं। दिल्ली में ट्रिपल इंजन की सरकार है और नगर निगम में भी भाजपा शासित है, पहाड़गंज वार्ड 82 के निगम पार्षद भी भाजपा से ही हैं। इसके बावजूद भाजपा की ही कार्यकर्ता को अपने मकान को बचाने के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है।

पीड़िता अंजू सूद का आरोप है कि 5050, छे टूटी चौक में अवैध रूप से बन रहे इस होटल के निर्माण में एक रिटायर्ड पुलिस अधिकारी, स्थानीय नेता और कई रसूखदार लोग शामिल हैं। यही वजह है कि पुलिस प्रशासन उनकी लिखित शिकायत पर कोई कानूनी कार्रवाई नहीं कर रहा है। यहां तक कि PCR कॉल करने पर भी कोई कार्रवाई नहीं होती।

बेटी ने लगाया छेड़छाड़ और धमकाने का आरोप

वहीं पीड़िता की बेटी ने रोते हुए बताया कि जब वह घर पर अकेली होती है, तो बिल्डर और उनके ठेकेदार गंदे इशारे करते हैं और डराते-धमकाते हैं। शिकायत के बावजूद न तो आरोपियों पर कार्रवाई हो रही है और न ही अवैध निर्माण पर रोक लग रही है।

सवाल उठता है कि दिल्ली में इतने बड़े हादसों के बाद भी सरकारी तंत्र सिर्फ बयानबाजी कर खानापूर्ति क्यों करता है? दिखावे की कार्रवाई के बाद सिस्टम फिर से आंखें मूंद लेता है और अवैध निर्माण फिर शुरू हो जाता है। पहाड़गंज का हाल किसी से छिपा नहीं है। कहावत है – जब सैंया भए कोतवाल तो डर काहे का।

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